dharma sangrah
✕

इंदौर के वैज्ञानिक को मिले कोरोना के 5 हजार से ज्‍यादा वेरिएंट्स

Updated: गुरुवार, 25 मार्च 2021 (13:29 IST)
नई दिल्ली, वर्ष 2019 के आरंभ से विश्व कोरोना महामारी की गिरफ्त में है। महामारी पर अंकुश के लिए भले ही दुनियाभर में तमाम वैक्सीन तैयार कर ली गई हों, लेकिन इसके वायरस का निरंतर बदलता रूप इसकी रोकथाम की हर कोशिश के लिए कठिन चुनौती साबित हो रहा है।

इस वायरस के विभिन्न प्रतिरूपों का पता लगाने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के शोधकर्ताओं ने ने एक अध्ययन किया है। इस अध्ययन में उन्हें वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस के पांच हजार से भी अधिक रूपांतरित प्रतिरूपों (म्युटेंट वेरिएंट्स) का पता चला है।

किसी वायरस में मौजूद प्रोटीन के प्रकार में बदलाव से उस वायरस का मूल रूप बदल जाता है। इस वजह से, वायरस का प्रभाव भी परिवर्तित हो जाता है। ऐसे वायरस को म्युटेंट वेरिएंट कहा जाता है। वेरिएंट, वायरस का उत्परिवर्तित या बदला हुआ प्रकार होता है, जिसको प्रतिरूप भी कहते हैं।

कोरोना के लिए जिम्मेदार वायरस सार्स-कोव-2 में एनवेलोप (ई), मेम्ब्रेन (एम) और स्पाइक (एस) नामक तीन प्रमुख प्रोटीन होते हैं। इन प्रोटीन में से किसी एक या एक से ज्यादा का स्वरूप समय के साथ बदल जाता है।
म्युटेंट के प्रोटीन में बदलाव होता है, तो उसकी रक्त-कोशिकाओं से बाइंडिंग यानी जुड़ने की क्षमता भी बदल जाती है। इसीलिए, हर वेरिएंट का वायरस अलग तरह से असर करता है। वायरस का प्रोटीन ही मानव शरीर में उपस्थित एसीई-2 रिसेप्टर से जुड़कर उसे संक्रमित करता है।

आईआईटी इंदौर के बायोसाइंस और बायोमेडिकल साइंस विभाग के प्रोफेसर हेमचंद्र झा और उनकी टीम ने मिलकर यह शोध किया है। उन्होंने बताया कि “इस शोध में, पिछले वर्ष जनवरी से जुलाई के मध्य कोरोना वायरस के नये रूपों के डेटा को ऑनलाइन माध्यम से एकत्र किया गया।

इस दौरान विश्व की प्रयोगशालाओं में मिले 22 हजार अलग-अलग प्रोटीन आइसोलेट यानी नमूनों का अध्ययन किया गया है।” प्रोफेसर हेमचंद्र ने बताया कि सार्स-कोव-2 के ‘एस’ प्रोटीन में सबसे ज्यादा बदलाव देखे गए हैं। मूल स्वरूप में बदलाव के बाद जहां ई प्रोटीन के 42 म्युटेंट और एम प्रोटीन के 156 म्युटेंट पाए गए, तो वहीं एस प्रोटीन के 5449 म्युटेंट मिले हैं, जो सबसे अधिक थे। वायरस के बाहरी आवरण पर कांटों की तरह दिखने वाले प्रोटीन को ही स्पाइक प्रोटीन या एस प्रोटीन कहा जाता है।

शोध के दौरान नमूनों के अध्ययन में कोरोना वायरस के कुल 5,647 म्युटेंट वेरिएंट सामने आए हैं। इस शोध को अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल 'हेलियान' में प्रकाशित करने के लिए स्वीकृत किया गया है। इस शोध में हेमचंद्र झा के साथ आईआईटी इंदौर के शोधार्थी श्वेता जखमोला, ओमकार इंदारी, धर्मेंद्र कश्यप, निधि वार्ष्णेय, अयान दास और मनीवनन इलंगोवन शामिल हैं।(इंडिया साइंस वायर)

Show comments

अंकिता भंडारी हत्याकांड: तीनों दोषियों को उम्रकैद, उत्तराखंड पुलिस ने बताया कैसे 88 दिन में पूरी हुई जांच

Toyota Glanza Facelift : टोयोटा की सस्ती कार लॉन्च, त्योहारों पर मचाएगी धमाका, जानिए क्या हैं फीचर्स

हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने पर नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगामा, अभिजीत दीपके बोले- 50-100 रुपए देकर बाहर कीजिए, लहरा दो तिरंगा को लेकर बताया प्लान

Stock Market Rally : शेयर बाजार में तूफानी तेजी, सेंसेक्स 1,533 अंक उछला, निफ्टी में भी 375 अंकों की छलांग

सभी देखें

जीएसआरटीसी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, CM भूपेंद्र पटेल ने महंगाई भत्ते में किया 2% का इजाफा

भारत में विरोध प्रदर्शनों का इतिहास: भाषा आंदोलन से 'राम मंदिर, किसान और युवा प्रदर्शनों' तक, जानें कैसे बदला देश का सियासी नक्शा

Top News 16 October : दिल्ली में CJP का तिरंगा मार्च, धारा 163 लागू, चुनाव आयोग का 17 राज्यों के लिए बड़ा आदेश

LIVE: दिल्ली में आज CJP का तिरंगा मार्च, पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

दिल्ली में CJP के तिरंगा मार्च से पहले बड़ा फैसला, 16-17 अक्टूबर को बंद रहेगा कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क

अगला लेख