dharma sangrah
✕

इस सदी में ‘मौत’ का नया नाम ‘कोरोना’... जिसने अपनों को नहीं कहने दिया ‘अलविदा’

Updated: गुरुवार, 3 दिसंबर 2020 (17:48 IST)

इस सदी में मौत को उसके नए ‘कोरोना’ नाम से संबोधि‍त किया जाए तो शायद गलत नहीं होगा। इसमें कोई शक नहीं कि कोरोना ने लाखों जिंदगि‍यों को खाक में मिला दिया। हालांकि इसके पहले भी दुनियाभर में लोग मरते रहे हैं और लोग मौत को एक अटल सत्‍य मानते आए हैं। लेकिन कोरोना एक ऐसी नई मौत का नाम था, जो इतिहास में पहले हुई सभी मौतों में सबसे ज्‍यादा भयावह और त्रासदी से भरी थी।

दरअसल, अंतिम क्षणों का यह मतलब होता है कि जब आपका कोई प्र‍ि‍य अपनी जिंदगी के लिए मौत से जूझ रहा हो तो उस अंतिम क्षण में आप उसका हाथ थाम सको, उसकी आखि‍री बात, उसकी आवाज को सुन सको, उसे छू सको और उसे भारी मन से आखि‍री विदाई दे सको, अलविदा कह सको।

लेकिन इस सदी की इस नई मौत इतनी क्रूर थी कि उसने अपनों को अलविदा कहने का मौका भी नहीं दिया। यही इसका सबसे बेबस और बे-दर्द एंगल था। वरना ऐसा नहीं है कि लोगों की पहले कभी मौतें न हुईं हों।

दुनिया में जितनी भी मौतें कोरोना से हुई उससे बेशक लोगों को हिलाकर रख दिया, लेकिन इसमें सबसे बड़ी त्रासदी यही थी कि वो मरने वालों को अपनी अंतिम घड़ी में भी अस्‍पताल के किसी वार्ड में अकेले ही ही अपना आखि‍री सफर तय करना पड़ा। उस वक्‍त न उसके बच्‍चे थे, न बीवी, न मां-बाप और ही कोई दोस्‍त और रिश्‍तेदार।
किसी को अपने पिता की अर्थी को छूने का मौका नहीं मिला तो किसी को अंतिम संस्‍कार का मौका। कोई बेटा अपने पिता को आखि‍री कांधा नहीं सका तो कहीं पिता बेटे को आखि‍री वक्‍त में आंखभर कर नहीं देख सका। न दोस्‍तों का साथ मिला और न ही कोई रिश्‍तेदार ही काम आया।

पूरी दुनिया में इंसानियत मौत की एक अछूत गठरी बनकर ही रह गई...!

युद्धों की बात छोड़ दें तो दुनिया में कहीं भी किसी दूसरी वजह से शवों को इकठ्ठा नहीं किया जाता है, लेकिन कोरोना ही सदी की वो त्रासदी बनी, जिसमें बल्‍क में लाशों को ढोया गया। एंबुलेंस से शमशान घाट तक या अस्‍पताल से कब्रस्‍तान तक। दूर-दूर तक अगर कुछ था तो ठंडे निस्‍तेज पड़े लावारिस शव और उनके आसपास सफेद पोशाकों में मंडराते कुछ डरे-सह‍मे साये।

यह मौत का वो भयावह दृश्‍य था जिसमें बच्‍चे, बूढे, महिलाएं और जवान सभी शामिल थे, और जो जिंदा बच गए उनके चेहरे पर आने वाली मौत का खौफ और उसकी दहशत।

जब अपने सबसे प्रि‍य लोगों के शव धूं-धू कर जल रहे थे तो उन्‍हें निहारने वाला उनके करीब कोई नहीं था। जब कब्रों में लाशों को दफनाया जा रहा था तो उनके पास एक मुठ्ठी मिट्टी डालने वाला कोई अपना नहीं था। कोई फूल या उसकी एक कली वहां रखने वाला कोई नहीं था।

इस कोरोना ने वो आलम दिखाया कि मुखाग्‍नि‍ तो दूर कई मौतों के बाद तो परिजन अपनों के शव को मर्चुरी और अस्‍पताल तक में लेने नहीं गए।

इटली से लेकर स्‍पेन तक। अमेरिका से लेकर भारत और ब्र‍िटेन से लेकर चीन तक। जो इंसान एक साथ एकत्र होकर नाचने-गाने का आदी था, जो एक दूसरे के बगैर सांस नहीं लेता था, वो इंसान अ‍केला मर रहा था, हर जगह, हर शहर और हर देश में।

कहीं कुछ नहीं था सिवाय विलाप के, सदी के सबसे भयावह एक वायरस के और उससे होने वाली निपट अकेली मौतों के और लाशों के। साल 2020 का यही एकमात्र दृश्‍य था। जिसे कोई भी अब देखना नहीं चाहता है।

(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। इसमें शामिल तथ्य तथा विचार/विश्लेषण 'वेबदुनिया' के नहीं हैं और 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)
लेखक के बारे में
नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्‍म में मास्‍टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्‍कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्‍ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्‍हें फिल्‍ड रिपोर्टिंग का अच्‍छा-खासा अनुभव है। उन्‍होंने अखबार.... और पढ़ें

Show comments

SIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कहा- हमारे हाथ बंधे नहीं हैं

CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को बड़ी राहत, SEM कोर्ट ने दिया रिहाई का आदेश

Gold-Silver Price Today: सस्ता हुआ सोना, चांदी के दामों में गिरावट, जानिए देश के बड़े शहरों में क्या रहे भाव

Electric Scooter : TVS और Ather को टक्कर देने आ रहा है VinFast का सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर, पेटेंट में दिखा 14-इंच व्हील वाला डिजाइन

जेफ्री एपस्टीन के साथ हरदीप सिंह पुरी की तस्वीरें वायरल: विपक्ष ने घेरा, गरमाई सियासत

सभी देखें

भारत-पोलैंड के बीच गहरी हुई दोस्ती: पीएम मोदी बोले- रक्षा, स्पेस और ट्रेड में बढ़ेंगे नए अवसर

K. Annamalai Vs BJP: 'हर किसी को विदेशी एजेंट बताना बंद करो...' अन्नामलाई का भाजपा पर तीखा हमला, मचा बवाल!

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोले- ईरान के साथ नहीं चल रही बातचीत, जल्द होने वाला है कुछ बड़ा

LIVE: पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की पीएम मोदी से मुलाकात

सोमनाथ में सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर प्रशासन का बड़ा कदम, 60 दिनों के लिए लागू हुए ये 3 प्रतिबंध

अगला लेख