मिशन वैक्सीन : भारत में शुरू हुआ रूसी वैक्सीन Sputnik V का क्लिनिकल ट्रॉयल

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Last Updated: मंगलवार, 1 दिसंबर 2020 (21:34 IST)
हैदराबाद। स्वास्थ्य क्षेत्र के अग्रणी संस्थान और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) ने मंगलवार को घोषणा की कि केंद्र सरकार की केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला, कसौली से आवश्यक मंजूरी प्राप्त करने के बाद में स्पूतनिक वी वैक्सीन के अनुकूल दौर दूसरे और तीसरे चरण का नैदानिक ​​परीक्षण शुरू कर दिया है।
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कंपनी की ओर से मंगलवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह एक बहुस्तरीय और रैंडम कंट्रोल रिचर्स होगा जिसमें सुरक्षा और प्रतिरक्षण अध्ययन शामिल तथा अन्य कारकों के संबंध में आंकड़े जुटाए जाएंगे।

इस नैदानिक ​​परीक्षण में जेएसएस मेडिकल रिसर्च ​​अनुसंधान भागीदार के रूप में शामिल हो रहा है। इसके अलावा डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज ने सलाहकार समर्थन के लिए जैव प्रौद्योगिकी शोध सहायता परिषद (बिराक), जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ भी गठजोड़ किया है और वह वैक्सीन के लिए संस्थान के चिकित्सकीय परीक्षण केंद्रों का इस्तेमाल करेगा।
हाल ही में आरडीआईएफ ने चिकित्सकीय परीक्षण आंकड़ों के दूसरे अंतरिम विश्लेषण की घोषणा की है जिसमें कहा गया है कि वैक्सीन के पहले डोज के 28 दिनों बाद इसकी प्रभाविता क्षमता 91.4 प्रतिशत देखी गई है और पहले डोज के 42 दिन बाद यह क्षमता 95 प्रतिशत पाई गई है।
इस समय स्पूतनिक वी चिकित्सकीय परीक्षणों के तीसरे चरण में 40,000 स्वयंसेवक हिस्सा ले रहे हैं जिनमें से 22,000 से अधिक को वैक्सीन का पहला डोज दिया जा चुका है और 19,000 से अधिक को वैक्सीन की टीके का पहला और दूसरा डोज दिया जा चुका है।
डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के सह-अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक जीवी प्रसाद ने कहा कि यह एक और महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि हम भारत में वैक्सीन शुरू करने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकारी निकायों के साथ-साथ कई संस्थाओं के साथ सहयोग जारी रख रहे हैं। हम आयात और स्वदेशी उत्पादन मॉडल को मिलाकर वैक्सीन को भारत में उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि सितंबर 2020 में डॉ रेड्डीज और आरडीआईएफ ने स्पूतनिक वी वैक्सीन के नैदानिक ​​परीक्षण और भारत में पहली 100 मिलियन डोज के वितरण के अधिकारों के लिए साझेदारी की थी। (वार्ता)



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