राहत की खबर : रेमेडिसिविर इंजेक्शन के 20 हजार वायल्ज‌ इंदौर पहुंचे, ऑक्सीजन की सप्लाई भी बढ़ी

विकास सिंह| पुनः संशोधित रविवार, 11 अप्रैल 2021 (21:53 IST)
भोपाल। ‌में कोरोना के बढ़ते‌ मरीजों के बीच पिछले कई दिनों लोगों को ‌की कमी से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में अस्पतालों ‌में भर्ती मरीजों को आसानी से रेमेडिसिविर इंजेक्शन मिल सके, इसके लिए सरकार ने रेमेडिसिविर इंजेक्शन ‌के 1 लाख डोज खरीदने का फैसला किया था। ‌सरकार के इस फैसले के बाज आज‌ देर शाम रेमेडिसिविर के 20 हजार वायल्ज पहुंच गए है। आज आए रेमेडिसिविर के
85% इंजेक्शन प्रदेश के मेडिकल कॉलेज में और 15% जिला अस्पतालो में भेजे जाएंगे।
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इससे पहले रविवार को सरकार की ओर से प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, जहां सर्वाधिक मरीजों का इलाज किया जा रहा है, के लिए पृथक से रेमेडिसिविर इंजेक्शन 5000 यूनिट की आपूर्ति की गई है। प्रदेश में आज कुल 21862 यूनिट की आपूर्ति की गई है।
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में रेमेडिसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा हरसंभव प्रयास किए गए हैं।

सरकार का प्रयास है कि सभी को जरूरत अनुसार उचित दाम पर उक्त औषधि की उपलब्धता सुगम हो, साथ ही इसकी कालाबाजारी एवं अवैध विक्रय न हो इसके लिए प्रदेश के समस्त औषधि निरीक्षकों को निर्देश जारी किए गए हैं। औषधि निरीक्षकों द्वारा विगत दो दिवसों में कुल 476 निरीक्षण किये गए हैं एवं एमआरपी से अधिक मूल्य पर बिक्री एवं काला बाजारी पर प्रभावी नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके साथ जिला प्रशासन एवं औषधि निरीक्षकों द्वारा रेमेडिसिविर औषधि की आपूर्ति एवं वितरण पर सतत निगरानी रखी जा रही है। वर्तमान में रेमेडिसिविर इंजेक्शन का वितरण केवल अस्पताल एवं संस्थानों में हो ऐसी व्यवस्था भी की गई है, ताकि अस्पतालों में भर्ती मराजों को सुलभता से इंजेक्शन उपलब्ध हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में ऑक्सीजन सप्लाई की कोई कमी नही है। प्रदेश में वर्तमान में लगभग 244 मेट्रिक टन ऑक्सीजन प्रतिदिन की उपलब्धता है। ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए इसके निर्माताओं एवं डिस्ट्रीब्यूटर्स से सतत संपर्क किया जा रहा है। प्रदेश में ऑक्सीजन के परिवहन हेतु टेंकरों की संख्या बढ़ाई जा रही है एवं अन्य राज्यों से भी ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने हेतु चर्चा कर अनुरोध किया गया है।‌ ऑक्सीजन ‌के के इंण्डस्ट्रीयल उपयोग को भी सीमित करके सर्वप्रथम चिकित्सकीय सेवाओं हेतु ऑक्सीजन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है।



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