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बुद्ध जयंती कब है, जानिए कौन थे महात्मा बुद्ध

रविवार,मई 9, 2021
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बुद्ध भगवान ने अनेक प्रकार से प्राणी हिंसा की निंदा और उसके त्याग की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा है कि कोई भी चर्म नहीं धारण करना चाहिए। मनुष्य को क्रोध नहीं करना चाहिए।
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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा भगवान गौतम बुद्ध को 'भारतीय महापुरुष' कहे जाने पर ऐतराज जताया और फिर से अयोध्या को नेपाल के बीरगंज के पास होने का दावा करते हुए वहां पर राम मंदिर बनाए जाने की घोषणा की है। ...
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आज विश्वभर में कोविड-19 कोरोनावायरस फैला हुआ है। सभी जानते हैं कि चीन ने इस महामारी के संबंध में दुनिया से बहुत कुछ छुपाकर रखा और और वह दुनिया की मदद नहीं कर रहा है। खैर, आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की प्राचीनकाल में भारत के एक भिक्षु ने चीन को एक ...
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एक बार भगवान बुद्ध अपने अनुयायियों के साथ किसी गांव में उपदेश देने जा रहे थे। उस गांव से पूर्व ही मार्ग में उन लोगों को जगह-जगह बहुत सारे गड्ढे़ खुदे हुए मिले।
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हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए बुद्ध विष्णु के नौवें अवतार हैं। अतः हिन्दुओं के लिए भी बुद्ध पूर्णिमा का दिन पवित्र माना जाता है।
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बांग्लादेश, पाकिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर और अफगानिस्तान में बौद्धों पर हुए अत्याचार के चलते वहां इनकी संख्या कम हो चली है। आओ जानते हैं गौतम बुद्ध के बारे में 25 खास जानकारियां।
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बिहार में एक जिला है जिसका नाम वैशाली है। विश्‍व को सर्वप्रथम गणतंत्र का पाठ पढ़ने वाला स्‍थान वैशाली ही है। यहां की नगरवधू आम्रपाली और यहां के राजाओं के किस्से इतिहास में भरे पड़े हैं। एक खूबसूरत लड़की से नगरवधु बनने और उसके बाद भिक्षुणी बन जाने की ...
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बौद्ध धर्म का यह चमत्कारी मंत्र सभी प्रकार के खतरों से सुरक्षा के लिए जपा जाता है। यह निम्न षडाक्षरीय मंत्र आने वाले हर संकटों से सुरक्षित रखता है। इस षडाक्षरीय मंत्र का उल्लेख अवलोकितेश्वरा में किया गया है। पढ़ें मंत्र-
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अंगुत्तर निकाय धम्मपद अठ्ठकथा के अनुसार वैशाली राज्य में तीव्र महामारी फैली हुए थी। मृत्यु का तांडव नृत्य चल रहा था। लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि इससे कैसे बचा जाए। हर तरफ मौत थी। लिच्छवी राजा भी चिंतित था। कोई उस नगर में कदम नहीं रखना चाहता ...
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एक व्यक्ति भगवान बुद्ध के पास आकर बोला- भगवन, मैं लगातार आपके प्रवचन सुन रहा हूं। आप बड़ी अच्छी-अच्छी बातें कहते हैं, लेकिन मेरे ऊपर इनका कोई असर नहीं होता। मैं गुस्सा खूब करता हूं और लालच में रात-दिन फंसा रहता हूं। आपकी बातों से रत्तीभर भी अंतर नहीं ...
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कहते हैं कि लव-कुश की पीढ़ी में शाक्य, शाक्य से शुद्धोधन और शुद्धोधन से सिद्धार्थ का जन्म हुआ। यह सिद्धार्थ ही आगे चलकर गौतम बुद्ध ने नाम से प्रसिद्ध हुए। गौतम बुद्ध के दर्शन में अनीश्वरवाद, अनात्मवाद और क्षणिकवाद को महत्व दिया जाता है। उनका मानना ...
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भगवान बुद्ध का धर्म पूर्व के कई राष्ट्रों का धर्म है। जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, चीन, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, कंबोडिया, हांगकांग, मंगोलिया, तिब्बत, भूटान, मकाऊ, बर्मा, लागोस और श्रीलंका तो बौद्ध राष्ट्र है ही साथ ही भारत, नेपाल, ...
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कपिलवस्तु के महाराजा शुद्धोदन की धर्मपत्नी महारानी महामाया देवी की कोख से नेपाल की तराई के लुम्बिनी वन में जन्मे सिद्धार्थ ही आगे चलकर बुद्ध कहलाए।
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बुद्ध को महात्मा या स्वामी कहने वाले उन्हें कतई नहीं जानते। बुद्ध सिर्फ बुद्ध जैसे हैं। अवतारों की कड़ी में बुद्ध अंतिम हैं।
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स्वयं के होने को जाने बगैर आत्मवान नहीं हुआ जा सकता। निर्वाण की अवस्था में ही स्वयं को जाना जा सकता है। मरने के बाद आत्मा महा सुसुप्ति में खो जाती है।
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गौतम बुद्ध ने जितने हृदयों की वीणा को बजाया है उतना किसी और ने नहीं। गौतम बुद्ध के माध्यम से जितने लोग जागे
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किसी के प्रति मन में बुरी भावना लाना आदि। इसे सामान्यतः बहुत ही मामूली बात समझा जाता है। परंतु वास्तव में यह मूल्यांकन गलत है।
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भारत में अधिकतर हिन्दू महावीर स्वामी की मूर्ति देखते हैं तो वे उसे बुद्ध की मूर्ति मान बैठते हैं। हिन्दुओं को तो ज्यादा शिक्षा की जरूरी है क्योंकि वे खुद के ही धर्म और समाज को ही अच्छी तरह नहीं जानते हैं। तभी उनकी बुद्धि में ज्यादा विरोधाभास और भ्रम ...
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गौतम बुद्ध का जन्म ईसा से 563 साल पहले नेपाल के लुम्बिनी वन में हुआ। उनकी माता कपिलवस्तु की महारानी महामाया देवी जब अपने नैहर देवदह जा रही थीं, तो उन्होंने रास्ते में लुम्बिनी वन में बुद्ध को जन्म दिया। कपिलवस्तु और देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से 8 ...
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