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Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा पर क्या करते हैं?

Updated: मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 (15:16 IST)
buddha purnima
बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बुद्ध पूर्णिमा सबसे बड़ा त्योहार का दिन होता है। इस दिन अनेक प्रकार के समारोह आयोजित किए गए हैं। अलग-अलग देशों में वहां के रीति-रिवाजों और संस्कृति के अनुसार समारोह आयोजित होते हैं। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर किए जाने वाले कार्यों और परंपराओं को जानिए।
 

1. धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान

प्रार्थना और तीर्थ: दुनियाभर के बौद्ध अनुयायी बोधगया में एकत्रित होते हैं और विशेष प्रार्थनाएँ आयोजित करते हैं।
अस्थि दर्शन: दिल्ली संग्रहालय इस दिन भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों को दर्शन हेतु बाहर निकालता है, ताकि श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर सकें।
धर्मग्रंथों का पाठ: इस दिन बौद्ध धर्मग्रंथों का निरंतर पाठ किया जाता है, जिससे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा बनी रहे।
 

2. बोधिवृक्ष एवं मंदिर पूजा विधान

बोधिवृक्ष की पूजा: उस वृक्ष की पूजा की जाती है जिसके नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसकी शाखाओं को हार और रंगीन पताकाओं से सजाया जाता है।
जलाभिषेक: बोधिवृक्ष की जड़ों में दूध और सुगंधित पानी डाला जाता है और उसके आसपास दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं।
अर्चना: मंदिरों और घरों में भगवान बुद्ध की मूर्ति पर फल-फूल चढ़ाए जाते हैं और अगरबत्ती जलाकर धूप-दीप किया जाता है।
 

3. सजावट और उत्सव की शैली

दीपोत्सव: बौद्ध घरों में दीपक जलाए जाते हैं और फूलों से विशेष सजावट की जाती है।
वेसाक उत्सव: श्रीलंका में इस दिन को 'वेसाक' (वैशाख का अपभ्रंश) के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
 

4. दान, पुण्य एवं जीव दया

मांसाहार का त्याग: बुद्ध पशु हिंसा के सख्त खिलाफ थे, इसलिए इस दिन मांसाहार का पूर्ण परहेज किया जाता है।
जीवों की मुक्ति: इस दिन पक्षियों को पिंजरों से मुक्त कर खुले आसमान में छोड़ा जाता है, जो स्वतंत्रता और करुणा का प्रतीक है।
परोपकार: गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन व वस्त्र दान किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे कार्यों से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

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