योगिता बाली : परवाने अमिताभ को जलाने वाली

समय ताम्रकर|
योगिता बाली जब अपनी भरी पूरी पंजाबी बाला की देह लेकर फिल्मों में आईं, तो लगा कि उन्होंने किंग साइज के गिलास से लस्सी पी है और पंजाब का असली घी खाया है। रिश्ते में वह गीताबाली की भानजी हैं, लेकिन फिल्मों में वैसा कमाल नहीं दिखा पाईं, जो गीता ने हासिल किया था। योगिता बाली को उन फिल्मों में ज्यादा देखा गया, जिन्हें प्रथम श्रेणी की तारिकाएँ रिजेक्ट कर देती थीं। अपने करियर के शुरुआती दौर में फिल्म निर्देशकों ने योगिता को सेक्स सिम्बल के रूप में प्रस्तुत किया था। उनसे शारीरिक प्रदर्शन करवाए गए। गाने गवाकर रोमांस कराया गया। एक नजर से यह सही भी था क्योंकि उनकी बड़ी-बड़ी आँखों से भोलापन, मासूमियत और शरारती आकर्षण एक साथ झलकता था। 
 
की तीसरी पत्नी
वैसे तो गायक-अभिनेता किशोर कुमार अपनी अनेक विशेषताओं के कारण फिल्मी दुनिया में चर्चित रहे हैं। मगर उनकी एक निजी विशेषता कई बार शादी करने की भी रही है। उनकी पहली पत्नी सजातीय बंगालन रूमा देवी ठाकुरता रही है, जो महान फिल्मकार सत्यजीत राय के दूर के रिश्ते में थी। यही वजह रही है कि सत्यजीत राय ने अपनी पसंद की सर्वोत्तम फिल्म चारूलता (1964) में किशोर कुमार से एक गाने का पार्श्व गायन भी कराया था। रूमा देवी बांग्ला फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री रही हैं। बम्बई और कलकत्ता की भौगोलिक दूरियों ने धीरे-धीरे किशोर-रूमा देवी के दाम्पत्य में भी दूरी बना दी। उन दोनों के विवाह बंधन के परिणाम में हम पुत्र अमित कुमार को हमारे बीच पाते हैं। आपसी मतभेद के चलते किशोर-रूमा में आगे चलकर बाकायदा तलाक हो गया था। 
 
पाँच रुप्य्या बारा आना
किशोर कुमार निजी जीवन में भले ही गंभीर किस्म के व्यक्ति थे, लेकिन परदे पर हमेशा धमाचौक्रडी करते रहना उनका शगल था। अपनी फिल्मों की शूटिंग के समय साथी हीरोइन के साथ चुहलबाजी कर उसका मन बहलाना उन्हें अच्छा लगता था। रूमा देवी से फुरसत पाने के बाद किशोर फिर से बेचलर हो गए थे। फिल्म चलती का नाम गाड़ी की शूटिंग के दौरान वे मधुबाला के काफी नजदीक आ गए थे। मधुबाला भी दिलीप कुमार से ब्रेकअप के बाद प्रेमनाथ अथवा उन जैसे लार टपकाने वाले आशिकों से परेशान हो गई थीं। चलती का नाम गाड़ी के दो गीतों की शूटिंग के समय किशोर कुमार चुहलबाजियाँ, शरारतें तथा उनके रोमांटिक अंदाज ने मधुबाला को बेहद प्रभावित किया था। यह बात उन्होंने अपने इंटरव्यू में स्वीकार की है। ये दो गाने थे- एक लड़की भीगी भागी सी और दे दे मेरे पाँच रुपय्या बारा आना। पहले गाने के समय मधुबाला तेज बारिश में भीगते हुए किशोर के गैरेज में मोटरकार सुधरवाने आती हैं। वहाँ किशोर जिस ढंग से मधुबाला से छेड़छाड़ करते हैं, वह अदा उसे भा गईं। दूसरे गाने के समय भी रात को मधुबाला के घर की खिड़की से उसके बेडरूम में प्रवेश करते हैं और अपनी मजदूरी के पैसे नाचकर-उछलकर माँगते हैं। इसके बाद फिल्म हाफ टिकट ने दोनों की शादी का फुल टिकट काट दिया। इस शादी का अफसोस भरा पहलू यह रहा कि मधुबाला के दिल में छेद होने का पता चला। उस समय इसका इलाज सिर्फ लंदन में संभव था और वो भी महँगा। मधुबाला नौ साल तक बिस्तर पर लेटी रहीं और किशोर उसके सिरहाने बैठ सेवा करते रहे मगर दाम्पत्य सुख उन्हें नहीं मिल सका। 
 
दिल के बंगले में योगिता का प्रवेश
मधुबाला के जीवन-दीप को तिल-तिल बुझते देखने के बाद वे एकदम अकेले से हो गए। उन्हीं दिनों नई तारिका योगिता बाली के साथ उन्हें फिल्म 'जमुना के तीर' में साथ काम करने का मौका मिला। फिल्म तो आधी-अधूरी रह गई। किशोर के रसिया स्वभाव पर फिदा योगिता ने चट मंगनी पट ब्याह रचा लिया। लेकिन 1976 में हुई यह शादी 1978 में टूट गई। कहा जाता है कि इसकी वजह योगिता की माँ का रोजाना की जिंदगी में जरूरत से ज्यादा दखल था। यह दखल किशोर कुमार जैसे अक्खड़ और हरफनमौला कलाकार को जरा भी रास नहीं आया और दोनों ने अलग होने का मन बना लिया। योगिता के साथ उनके निर्देशन में बनी फिल्म शाबाश डैडी याद रखने लायक है। 
 
सेकण्ड अमिताभ यानी मिठुन
योगिता की पति किशोर की रोजाना खटपट से गृहस्थी की गाड़ी ठीक से स्टार्ट भी नहीं हो पाई थी कि पंक्चर हो गई। उसी दौरान मिठुन चक्रवर्ती में धूमकेतु की तरह उभरे। उन्हें लंबूजी और अमिताभ जैसी कदकाठी के होने से सेकण्ड अमिताभ मान लिया गया था। मिठुन के साथ योगिता की फिल्म ख्वाब (1980) की शूटिंग चल रही थी। मिठुन अपनी पहली पत्नी हेलेना ल्यूक को तलाक दे चुके थे। उन्हें भी एक अदद बीवी की सख्त जरूरत महसूस हो रही थी। दोनों ने अपने भावी जीवन के ख्वाब साथ-साथ देखे और शादी करने का मन बना लिया। फिल्मकार शक्ति सामंत इस रोमांस के गवाह रहे हैं। योगिता ने किशोर से तलाक ले लिया। बदले में किशोर ने फिल्म ख्वाब में पार्श्वगायन करने से इंकार कर दिया। बाद में किशोर ने मिथुन चक्रवर्ती के लिए कई फिल्मों में नहीं गाया। इसकी वजह से संगीतकार बप्पी लाहिरी, मिथुन के लिए गाने लगे। किशोर ने योगिता से छुट्टी पाई और योगिता ने सेकण्ड हेंड पति मिथुन को अपना सेकंड हैसबैंड बनाना स्वीकार कर लिया। आज योगिता-मिथुन का बेटा मिमोह फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर प्रारंभ कर चुका है। कहा जाता है कि मिथुन और योगिता में भी आपस में नहीं बनती, लेकिन बच्चों की खातिर वे एक ही छत के नीचे रहते हैं। 
 
बड़े हीरो, फ्लॉप करियर
योगिता ने अभिनेत्री के रूप में कोई ऐसी छाप नहीं छोड़ी है कि उन्हें गीता बाली, नरगिस, मीना कुमारी या श्रीदेवी की तरह याद रखा जा सके। उनके शुरुआती दौर की फिल्म 'परवाना' (1971) आज इसलिए याद की जाती है कि उसमें अमिताभ बच्चन ने नकारात्मक रोल किया था। उसमें योगिता के हीरो थे नवीन निश्चल तथा उन पर फिल्माया गया एक गीत 'पिया की गली लागे भली' काफी हिट हुआ था। गुरुदत्त के भाई आत्माराम की 'मेमसाब' (1971) एक सस्पेंस थ्रिलर थी, जिसमें योगिता के हीरो थे विनोद खन्ना। 'समझौता' (1973) में उनके हीरो उभरते कलाकार अनिल धवन थे, तो उसी साल 'बनारसी बाबू' में वे सदाबहार देव आनंद की हीरोइन के रूप में आईं। इसमें देव साहब का डबल रोल था और दूसरी हीरोइन थीं राखी। इसके बावजूद योगिता के करियर को कोई खास लाभ नहीं हुआ। वे अधिकतर फिल्मों में दूसरी हीरोइन या चरित्र भूमिका में ही नजर आने लगीं। 'नागिन' (1976) में कलाकारों की भीड़ में वे भी थीं, तो 'चरित्रहीन' (संजीव कुमार-शर्मिला), 'अजनबी' (राजेश खन्ना-जीनत अमान) आदि में उन्होंने छोटी भूमिकाएं निभाईं। 'चाचा भतीजा' (1977) में वे रणधीर कपूर के साथ थीं। मेहमूद द्वारा निर्देशित 'जनता हवलदार' (1979) में योगिता को राजेश खन्ना के साथ काम करने का मौका मिला, लेकिन तब तक राजेश खन्ना का दौर समाप्त हो चुका था। आरके बैनर की 'बीवी ओ बीवी' (1981) में योगिता को संजीव कुमार के साथ कॉमेडी करने का मौका मिला, लेकिन मुख्य हीरो रणधीर कपूर, हीरोइन पूनम ढिल्लन तथा डबल रोल में संजीव कुमार के होते हुए योगिता पर किसी का ध्यान नहीं आया। 'लैला' (1984) में योगिता सुनील दत्त की पत्नी और अनिल कपूर की मां के रोल में आईं।  
 
प्रमुख फिल्में : 
परवाना (1971), मेमसाब (1972), समझौता (1973), झील के उस पार (1973), धमकी (1973), अजनबी (1974), नागिन (1976), चाचा भतीजा (1977), कर्मयोगी (1978), शाबाश डैडी (1979), जनता हवलदार (1979), जानी दुश्मन (1979), नौकर (1979), प्यारा दुश्मन (1980), बीवी ओ बीवी (1981), जमाने को दिखाना है (1982) 



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