आने वाला कल एनिमेशन फिल्मों का

Hanuman
समय ताम्रकर|
IFM
कुछ वर्ष पूर्व तक भारत में एनिमेशन फिल्मों की कमर्शियल वैल्यू जीरो थी। इसलिए बॉलीवुड के निर्माताओं की कभी भी इन फिल्मों में रूचि नहीं रहीं। भारतीय दर्शक भी एनिमेशन फिल्म देखना पसंद नहीं करते थे। वे इसे बच्चों के लिए ही उचित मानते थे। पैसे देकर कोई भी इन फिल्मों को देखना पसंद नहीं करता था।

लेकिन ‘हनुमान’ के सफल होने के बाद बॉलीवुड के निर्माताओं का ध्यान भी इस ओर गया। अब दर्शकों में बच्चों की संख्या बहुत बढ़ गई है। निर्माता फिल्म बनाते समय बच्चों का ध्यान रखने लगे हैं। एनिमेशन फिल्में बच्चों को बेहद लुभाती है। इस कारण इस क्षेत्र का भविष्य उज्ज्वल देखा जा रहा है।

फिल्म निर्माता और निर्देशक आदित्य चोपड़ा की भारतीय दर्शकों पर गहरी पकड़ है। उनमें भारतीय फिल्म उद्योग के भविष्य को देखने की भी दृष्टि है। उनके प्रोडक्शन हाउस ने एनिमेटेड फिल्म बनाने वाली विश्व की नंबर एक कंपनी वाल्ट डिज़नी स्टुडियो से हाथ मिलाए हैं। दोनों मिलकर भारत में एनिमेटेड फिल्म का निर्माण करेंगे। ‘रोडसाइड रोमियो’ इनके द्वारा निर्मित पहली फिल्म होगी जिसे 2008 में प्रदर्शित किया जाएगा। इस फिल्म का निर्देशन अभिनेता के रूप में फ्‍लॉप हो चुके जुगल हंसराज करेंगे।
आदित्य चोपड़ा के पहले से कई निर्माता एनिमेटेड फिल्म बना चुके हैं लेकिन लगभग सबके अनुभव खराब रहें। जी टेलीफिल्म्स वालों का ‘भागमती-द क्वीन ऑफ फार्च्यून्स’ में अनुभव बेहद खराब रहा। ढाई घंटे की इस फिल्म में एक घंटा एनिमेटेड था। लेकिन उचित प्रचार के अभाव में यह फिल्म बुरी तरह पिटी।

1992 में जापानी फिल्मकार युगो साको ने ‘रामायण’ नामक एनिमेटेड फिल्म बनाई थीं। भारत को छोड़कर यह फिल्म हर जगह चर्चित रहीं। ‘सिंदबाद’ और ‘अलीबाबा’ जैसी फिल्म भी कोई खास कमाल नहीं दिखा सकीं। कुछ दिनों पूर्व प्रदर्शित ‘कृष्णा’ भी बॉक्स ऑफिस पर नाकामयाब रहीं क्योंकि उसमें एनिमेशन बहुत ही खराब था।
हाल ही में शेमारू एंटरटेनमेंट कम्पनी द्वारा निर्मित एनिमेटेड फिल्म ‘घटोत्कच’ ने धूम मचा रखी है। इसमें घटोत्कच का बचपन, लालन-पोषण से लेकर बड़े होने की कहानी कई दिलचस्प घटनाओं के साथ चित्रित की गई है। गोविन्द निहलानी जैसे गंभीर फिल्मकार भी इस विधा की ओर मुड़े हैं। वे ‘कमलू’ नामक 3-डी एनिमेटेड फिल्म पर कार्य कर रहे हैं। यह एक ऊँट के बच्चे की कहानी है।



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