देशभक्ति की भावना से लबरेज है बॉलीवुड, दिए हैं कई सुपरहिट गाने

स्‍वतंत्रता दिवस हर साल 15 अगस्‍त को पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन पूरे देश में अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। यह केवल कोई खास दिन नहीं बल्कि भारतीयों के लिए एक राष्‍ट्रीय त्‍योहार है। बॉलीवुड ने भी इस आजादी के मायने समझाने के लिए कई देशभक्ति पर आधारित फिल्‍में और गाने पेश किए हैं।

देशभक्ति पर आधारित ऐसे कई गाने हैं जिसे सुनने के बाद हर किसी के मन में देशभक्ति की भावना जाग जाती है। हिन्दी फिल्मों में देशभक्ति फिल्म के निर्माण और उनसे जुडे़ गीतो की शुरूआत 1940 के दशक से मानी जाती है। निर्देशक ज्ञान मुखर्जी की 1940 में रिलीज फिल्म 'बंधन' संभवतः पहली फिल्म थी जिसमें देश प्रेम की भावना को रूपहले पर्दे पर दिखाया गया था।

यूं तो फिल्म बंधन मे कवि प्रदीप के लिखे सभी गीत लोकप्रिय हुए लेकिन 'चल चल रे नौजवान' के बोल वाले गीत ने आजादी के दीवानों में एक नया जोश भरने का काम किया।
साल 1943 में देश प्रेम की भावना से ओत प्रोत फिल्म 'किस्मत' रिलीज हुई। इस फिल्म में प्रदीप के लिखे गीत 'आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है, दूर हटो ए दुनियां वालो हिंदुस्तान हमारा है' जैसे गीतों ने स्वतंत्रता सेनानियों को आजादी की राह पर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

भारतीय सिनेमा जगत में वीरो को श्रद्धांजलि देने के लिए अब तक न जाने कितने गीतों की रचना हुई है लेकिन 'ऐ मेरे वतन के लोगो जरा आंखो मे भर लो पानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी' जैसे देश प्रेम की अद्भुत भावना से ओत प्रोत रामचंद्र द्विवेदी उर्फ कवि प्रदीप के इस गीत की बात ही कुछ और है। एक कार्यक्रम के दौरान देश भक्ति की भावना से परिपूर्ण इस गीत को सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की आंखो मे आंसू छलक आए थे।
साल 1952 में रिलीज फिल्म आनंद मठ का गीताबाली पर लता मंगेशकर की आवाज में फिल्माया गीत 'वंदे मातरम' आज भी दर्शकों और श्रोताओं को अभिभूत कर देता है। इसी तरह जागृति मे हेमंत कुमार के संगीत निर्देशन में मोहम्मद रफी की आवाज में रचा बसा यह गीत 'हम लाये है तूफान से कश्ती निकाल के' श्रोताओं मे देशभक्ति की भावना को जागृत किए रहता है।

कवि प्रदीप की तरह ही प्रेम धवन भी ऐसे गीतकार के तौर पर याद किए जाते हैं जिनके ऐ मेरे प्यारे वतन, मेरा रंग दे बसंती चोला, ऐ वतन ऐ वतन तुझको मेरी कसम जैसे देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत गीत आज भी लोगो के दिलो दिमाग मे देश भक्ति के जज्बे को बुलंद करते है।

फिल्म काबुली वाला में मन्ना डे की आवाज में प्रेम धवन का रचित यह गीत 'ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े चमन' आज भी श्रोताओं की आंखो को नम कर देता है। इन सबके साथ साल 1961 में प्रेम धवन की एक और सुपरहिट फिल्म हम हिंदुस्तानी रिलीज हुई जिसका गीत छोड़ो कल की बाते कल की बात पुरानी सुपरहिट हुआ।

साल 1965 में निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार के कहने पर प्रेम धवन ने फिल्म शहीद के लिए संगीत निर्देशन किया। यूं तो फिल्म शहीद के सभी गीत सुपरहिट हुए लेकिन 'ऐ वतन ऐ वतन' और 'मेरा रंग दे बंसती चोला' आज भी श्रोताओं के बीच शिद्धत के साथ सुने जाते है।
देशभक्ति से परिपूर्ण फिल्में बनाने में मनोज कुमार का नाम विशेष तौर पर उल्लेखनीय है। शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम, क्रांति, जय हिंद द प्राइड जैसी फिल्मों में देश भक्ति की भावना से ओत-प्रोत के गीत सुन आज भी श्रोताओं की आंखे नम हो जाती है। जे.पी.दत्ता और अनिल शर्मा ने भी देशभक्ति के जज्बे से परिपूर्ण कई फिल्मों का निर्माण किया है।

इसी तरह गीतकारो ने कई फिल्मों में देशभक्ति से परिपूर्ण गीत की रचना की है। इनमें जहां डाल डाल पर सोने की चिडि़या करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा, नन्हा मुन्ना राही हूं देश का सिपाही हूं, है प्रीत जहां की रीत सदा मैं गीत वहां के गाता हूं, मेरे देश की धरती सोना उगले, दिल दिया है जां भी देगे ऐ वतन तेरे लिये, भारत हमको जा से प्यारा है आदि।

 

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