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यूरोप में 'कयामत की गर्मी', क्या हैं कारण

Written By BBC Hindi
Updated: बुधवार, 20 जुलाई 2022 (08:03 IST)
मालू करसिनो, बीबीसी न्यूज़
पश्चिमी यूरोप इन दिनों झुलसाने वाली गर्मी का सामना कर रहा है। ज़बरदस्त गर्म हवाओं के उत्तर की ओर बढ़ने के साथ ही मंगलवार को पश्चिमी यूरोप में पारा चढ़ता जा रहा है।
 
फ्रांस और यूके में सोमवार को बेहद गर्मी की चेतावनी जारी की गई। वहीं स्पेन में सोमवार को 43 डिग्री तापमान रहा। फ्रांस, पुर्तगाल, स्पेन और ग्रीस में जंगल की आग के कारण हज़ारों लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों की तरफ जाना पड़ा है।
 
विशेषज्ञ कहते हैं कि ब्रिटेन जल्द ही अपने सबसे गर्म दिन का सामना करेगा और फ्रांस के कुछ हिस्सों में "कयामत की गर्मी बरस" रही है।
 
फ्रांस के मौसम विभाग के अधिकारी के मुताबिक़ देश के कई शहरों में अब तक का सबसे गर्म दिन आ चुका है। पश्चिमी शहर नॉट में पारा 42 डिग्री तक रिकॉर्ड किया गया है।
 
हाल के दिनों में यूरोप के कई देशों में जंगल की आग के कारण 30 हज़ार से अधिक लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। एक ज़ू पर भी आग के ख़तरा था जिसके कारण वहां के एक हज़ार से अधिक जानवरों को वहां से निकाला गया है।
 
फ्रांस के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक लोकप्रिय पर्यटन क्षेत्र जेरोंद पर इसका बहुत ज़्यादा असर पड़ा है। यहां पिछले मंगलवार से आग के कारण 17 हज़ार हेक्टेयर ज़मीन बर्बाद हो चुकी है। अब भी आग बुझाने की कोशिश की जा रही है।
 
स्पेन के उत्तर पश्चिमी ज़मोरा इलाक़े में आग के कारण दो लोगों की मौत हो गई है और ट्रेन की पटरी के पास आग लगने के कारण इस रास्ते से गुज़रने वाले ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई है। पूर्वी पुर्तगाल में आग से बचकर भागने की कोशिश में एक बुज़ुर्ग दंपती की मौत हो गई है।
 
'काबू से बाहर राक्षसी आग'
रोंद प्रांत के अध्यक्ष ख़ुआन-लुक ग्लेयेज़ ने कहा है कि ये आग किसी राक्षस की तरह है। उन्होंने कहा, "ये ऑक्टोपस की तरह दिखने वाला एक राक्षस है और ये हर तरफ़ से आगे बढ़ता जा रहा है। तापमान के कारण, हवाओं के कारण, हवा में पानी की कमी के कारण।।। ये आगे बढ़ता राक्षस है और इससे लड़ना बहुत मुश्किल है।"
 
जेरोंद से जुड़ी अपनी रिपोर्ट पर बीबीसी संवाददाता लूसी विलियमसन कहती हैं कि सोमवार को जहां 40 डिग्री तापमान था, उसके मंगलवार को कुछ कम होने की संभावना है। लेकिन, जब तक मौसम में सूखापन है और हवा अपनी दिशा बदल रही है, इससे तुरंत राहत नहीं मिलेगी।
 
ब्रिटेन में सोमवार का दिन सबसे ज़्यादा गर्म दिनों में से एक था। सोमवार को पूर्वी इंग्लैंड में सफॉल्क में 38।1 डिग्री तापमान दर्ज किया गया था।
 
मौसम विभाग का कहना है कि मंगलवार को तापमान और बढ़ सकता है। मध्य, उत्तरी और दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड में लू चलने की चेतावनी दी गई है।
 
गर्मी से राहत के लिए नदी या झीलों का सहारा लेने वाले कम से कम चार लोग यहां डूब गए हैं। गर्मी के कारण ट्रेन रद्द हुई हैं और लंदन के लटन एयरपोर्ट पर फ्लाइट निलंबित हुई हैं।
 
सोमवार को नीदरलैंड में सालभर में अब तक का सबसे गर्म दिन रहा। दक्षिण-पश्चिमी शहर वेस्टडोर्प में 33।6 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।
 
मंगलवार को और ज़्यादा तापमान होने की आशंका है जो नीदरलैंड के दक्षिणी और मध्य हिस्से में बढ़कर 39 डिग्री तक जा सकता है।
 
मौसम विभाग का कहना है कि गर्म हवाएं उत्तर की तरफ़ बढ़ रही हैं। बेल्जियम और जर्मनी में आने वाले दिनों में तापमान 40 डिग्री तक जा सकता है।
 
स्पेन और पुर्तगाल में मौतें
स्पेन और पुर्तगाल में हाल के दिनों में भयानक गर्मी के कारण हज़ार से ज़्यादा मौतें हुई हैं। पुर्तगाल में पिछले गुरुवार को तापमान 47 डिग्री तक पहुंच गया था जो जुलाई महीने के लिए रिकॉर्ड था। मौसम कार्यालय आईपीएमए ने देश के अधिकतर हिस्से में आग लगने का ख़तरा बताया था।
 
स्थानीय मीडिया के मुताबिक़ उत्तरी मुहसा नगर निगम में 300 लोगों को आग के ख़तरे के कारण उनके घरों से बाहर निकाला गया है। प्रशासन 2017 जैसी स्थिति से बचना चाहता है जब जंगल की आग लगने के कारण 66 लोग मारे गए थे।
 
स्पेन में कम से कम 20 जगहों पर आग काबू से बाहर है। पुर्तगाल के साथ लगी उत्तरी सीमा पर आग के कारण एक ट्रेन को रोका गया था। उसमें बैठे एक शख़्स ने आग की भयावहता का वीडियो भी बनाया है जिसमें दिख रहा है कि कैसे ट्रेन के डिब्बे के दोनों तरफ़ से आग दिख रही है।
 
जानकार कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्म हवाएं पहले से ज़्यादा चल रही हैं, वो लंबे समय तक बनी रहती हैं और पहले ज़्यादा गर्म होने लगी हैं।
 
उद्योगिकरण के दौर की शुरुआत से दुनिया के तापमान में पहले ही 1।1 डिग्री की बढ़ोतरी हो चुकी है। अगर दुनियाभर की सरकारों ने उत्सर्जन में कमी नहीं की तो तापमान और बढ़ता रहेगा।
 
वहीं विश्व मौसम संगठन ने देशों को चेतावनी दी है कि बढ़ता तामपान पहले से बीमार लोगों और बुज़ुर्गों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
 
संगठन का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में अधिक गर्मी पड़ने के मामले बढ़ेंगे। साथ ही संगठन ने कहा है कि इस तरह के मौसम का असर यूरोप में होने वाली खेती पर पड़ेगा और फसलें बर्बाद होंगी।
 
रूस-यूक्रेन संकट के कारण पहले ही वैश्विक खाद्य आपूर्ति प्रभावित हुई है और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में सूखे के कारण अनाज का संकट पैदा हुआ है, जलवायु परिवर्तन इस संकट को और बढ़ा सकता है।

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