आभासी दुनिया और वास्तविक दुनिया!
अनिल त्रिवेदी (एडवोकेट) | मंगलवार,अप्रैल 28,2026
आभासी दुनिया ने हमारे देखने सुनने और प्रतिक्रिया करने के तौर तरीकों को बहुत ही गहरे से बदल दिया है। हम में से कई लोगों ...
भूतपूर्व होना या अभूतपूर्व बने रहना!
अनिल त्रिवेदी (एडवोकेट) | मंगलवार,अप्रैल 21,2026
भूतपूर्व होना यानी आकस्मिक रूप से या पदावधि समापन से जीवन में आई बीती यादों या बातों को अपने शेष बचे जीवन का अभिन्न अंग ...
जीवन एक उत्सव है, तो वन महोत्सव है!
अनिल त्रिवेदी (एडवोकेट) | सोमवार,अप्रैल 20,2026
वन और जीवन हमारी धरती का कभी न खत्म होने वाला या अंतहीन प्राकृतिक गति विधियों का जीवंत सिलसिला है। यदि धरती पर हम जीवन ...
सृष्टि का आनंद बनाम आनंद की सृष्टि!
अनिल त्रिवेदी (एडवोकेट) | शनिवार,मार्च 21,2026
सृष्टि मूलतः विराट नैसर्गिक ऊर्जा के अनन्त अद्भुत आनंद की प्रत्यक्ष अनुभूति हैं। आनंद का विस्तार सूक्ष्म रूप से समूची ...
मानवीय सवालों की सुनामी में बढ़ती समाधान शून्यता!
अनिल त्रिवेदी (एडवोकेट) | मंगलवार,मार्च 10,2026
बहुआयामी लोकतांत्रिक व्यवस्था हो या सैनिक शासन सहित चाहे राजशाही भी क्यों न हो किसी भी तरह की शासन व्यवस्था नित नये ...
गांधी महज सिद्धांत नहीं, सरल व्यवहार है
अनिल त्रिवेदी (एडवोकेट) | शुक्रवार,जनवरी 30,2026
गांधीजी को बचपन में अंधेरे से भय लगता था। उस उम्र में प्राय: सभी के मन में अंधेरे का भय होता है। पर गांधीजी ने सबके मन ...
तीस जनवरी, हे राम, साकार गांधी निराकार गांधी!
अनिल त्रिवेदी (एडवोकेट) | बुधवार,जनवरी 28,2026
बिड़ला भवन दिल्ली में तीस जनवरी 1948 की शाम संध्याकालीन प्रार्थना पर निकले साकार गांधी अपने अंतिम शब्द 'हे राम' के साथ ...
स्त्री और पुरुष दोनों ही संपूर्ण मनुष्य हैं!
अनिल त्रिवेदी (एडवोकेट) | गुरुवार,सितम्बर 11,2025
Man and woman are complete human beings: जीवन के प्रारंभ से ही स्त्री-पुरुष साथ साथ रहते आए हैं। मानव इतिहास के सारे ...
भूतपूर्व सवाल और भूतपूर्व जवाब!
अनिल त्रिवेदी (एडवोकेट) | शनिवार,अगस्त 23,2025
Why questions are necessary: मनुष्य और दिमाग की जुगलबंदी सवाल और जवाब के बगैर नहीं हो सकती। यदि मनुष्य के मस्तिष्क में ...
विचार बीज है और प्रचार बीजों का अप्राकृतिक विस्तार!
अनिल त्रिवेदी (एडवोकेट) | शनिवार,मार्च 8,2025
विचार और प्रचार दोनों के बीच अंतर्संबंधों पर जब हम सोचते-विचारते हैं तो यह सूत्र मिलता है कि विचार ही प्रचार का ...

