आज आपका दिन मंगलमय हो!
आइए जानें आज का दिन आपके लिए क्या लेकर आया है।
शनिवार, 27 जून 2026 का दैनिक पंचांग और शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज शुद्ध ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव और संकटमोचन हनुमान जी की आराधना के लिए परम फलदायी माना जाता है। आज के दिन कल रखे गए निर्जला एकादशी व्रत का पारण भी किया जाएगा। आज शनि प्रदोष व्रत, वट सावित्री व्रतारंभ (दक्षिण भाग), तथा बड़ा महादेव पूजन किया जाएगा।
आइए जानते हैं 27 जून 2026 का विस्तृत पंचांग, शुभ समय और राहुकाल की स्थिति:
आज का पंचांग: 27 जून 2026
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी)
शक संवत: 1948 (परावभ)
महीना: शुद्ध ज्येष्ठ मास (शुक्ल पक्ष)
तिथि: त्रयोदशी
नक्षत्र: विशाखा नक्षत्र- सुबह 05:01 (28 जून) तक (इसके बाद अनुराधा नक्षत्र प्रारंभ)
योग: साध्य योग- शाम 05:01 तक (इसके बाद शुभ योग)
करण: बव- दोपहर 01:21 तक (इसके बाद बालव करण रात 01:50 तक)
सूर्योदय: सुबह 05:26 एएम
सूर्यास्त: शाम 07:23 पीएम
चंद्रराशि: तुला राशि- रात 11:24 तक, इसके बाद वृश्चिक राशि में प्रवेश।
आज के शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
यदि आप आज कोई विशेष पूजा-अनुष्ठान, अदालती कार्य, प्रॉपर्टी से जुड़े मामले या कोई जरूरी काम करना चाहते हैं, तो इन शुभ समयों का ध्यान रखें:
अभिजित मुहूर्त (दिन का सबसे श्रेष्ठ समय): दोपहर 11:56 से दोपहर 12:52 तक।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:04 से सुबह 04:44 तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 से दोपहर 03:41 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:22 से शाम 07:43 तक।
अशुभ समय (राहुकाल और वर्जित समय)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस समय अवधि में किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए क्योंकि इसमें विघ्न आने की आशंका रहती है:
राहुकाल: सुबह 08:55 से सुबह 10:40 तक (शनिवार को सुबह के समय राहुकाल होता है, इस दौरान नया काम या बड़ा वित्तीय लेन-देन शुरू न करें)।
यमगंड काल: दोपहर 02:09 से शाम 03:54 तक।
गुलिक काल: सुबह 05:26 से सुबह 07:11 तक।
दिशाशूल: पूर्व दिशा (यदि आज इस दिशा में यात्रा करना बहुत आवश्यक हो, तो घर से अदरक खाकर या उड़द के दाने चबाकर ही निकलें)।
आज का विशेष शनिवार उपाय:
चूंकि आज शुद्ध ज्येष्ठ मास का शनिवार है, इसलिए आज शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसमें काले तिल डालें। इसके बाद वहीं बैठकर हनुमान चालीसा या शनि चालीसा का पाठ करें। इस उपाय को करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कुंडली के अन्य दोषों से मुक्ति मिलती है तथा कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
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