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Vat Savitri Purnima Puja Samagri: अखंड सौभाग्य के लिए बरगद पूजा में बेहद जरूरी हैं ये चीजें, देखें फुल चेकलिस्ट

Images related to the materials required for Vat Savitri Purnima and the worship of the banyan tree by married women
Vat Savitri Purnima 2026: ज्येष्ठ पूर्णिमा का दिन शादीशुदा महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इस दिन वट पूर्णिमा (वट सावित्री) का व्रत रखकर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांग लिए थे।ALSO READ: Vat Savitri Vrat 2026: ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा का क्या है महत्व, पढ़िए पौराणिक कथा
 
इस महापर्व की पूजा तभी पूरी मानी जाती है, जब आपकी थाली में हर जरूरी चीज मौजूद हो। पूजा के दिन ऐन वक्त पर कोई हड़बड़ी न हो, इसलिए हम आपके लिए लेकर आए हैं जरूरी पूजन सामग्रियों की पूरी चेकलिस्ट।
 

वट सावित्री पूर्णिमा: पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट

अपनी थाली सजाने से पहले इन चीजों को एक बार जरूर चेक कर लें:
 

मुख्य तस्वीरें और पात्र:

1. सावित्री-सत्यवान की मूर्ति या सुंदर तस्वीर
2. दो बांस की टोकरी
3. स्टील या कांसे की साफ थाली
 

सुहाग और वस्त्र:

4. सुहाग का पूरा सामान (चूड़ी, बिंदी, आदि)
5. लाल कलावा (रक्षासूत्र)
6. लाल कपड़ा और 1.25 मीटर का अलग से वस्त्र
7. सिंदूर और रोली (कुमकुम)
 

पेड़ की परिक्रमा और विशेष सामग्री:

8. बांस का पंखा (सत्यवान को हवा झलने के प्रतीक के रूप में)
9. कच्चा सूत (बरगद के पेड़ पर लपेटने के लिए)
10. जल से भरा एक सुंदर कलश
11. भीगा हुआ चना (व्रत खोलने और पूजा के लिए बेहद जरूरी)
 

फल, फूल और नैवेद्य (प्रसाद):

12. बरगद का फल
13. ताजे फल (विशेषकर आम, लीची और मौसमी फल)
14. घर में बना पकवान और शुद्ध घी की पूड़ियाँ
15. मिठाई और बताशे
16. ताजा फूल और दूर्वा घास
17. पान के पत्ते और साबुत सुपारी
18. पानी वाला नारियल
 

पूजा-आरती का सामान:

19. मिट्टी का दीपक और शुद्ध घी
20. धूपबत्ती और इत्र (खुशबू के लिए)
21. अक्षत (बिना टूटे हुए चावल)
22. नकद रुपए (दक्षिणा के लिए)
 
खास टिप: पूजा से एक दिन पहले ही इन सभी सामग्रियों को एक जगह इकट्ठा करके रख लें। बांस के पंखे और भीगे चने का इस पूजा में सबसे विशेष महत्व होता है, इसलिए इन्हें भूलना बिल्कुल न भूलें। आपकी पूजा मंगलमय हो!
 
वट सावित्री पूर्णिमा की पूजा केवल एक परंपरा नहीं बल्कि श्रद्धा और सुहाग के अटूट बंधन का प्रतीक है। सही सामग्री के साथ की गई पूजा अधिक फलदायी मानी जाती है और इससे वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
 
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