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सोमवती अमावस्या क्यों हैं इस बार खास, जानें महासंयोग, पूजा मुहूर्त और विधि

The image depicts the worship of Lord Shiva and the performance of Pitru Tarpan on the riverbank of a pilgrimage site on Jyeshtha Adhik Amavasya
Somvati amavasya date n timing: हिन्दू धर्मशास्त्रों में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है, लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि सोमवार भगवान शिव को समर्पित है और अमावस्या पितरों की पूजा एवं तर्पण के लिए श्रेष्ठ तिथि मानी जाती है। इस बार की सोमवती अमावस्या श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी मानी जा रही है। मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, दान, जप, तप और पूजा-पाठ से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है।ALSO READ: IPL 2026 में वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन क्यों रहा शानदार, जानिए क्‍या कहता है अंक शास्त्र?
 
  • इस बार क्यों है यह महासंयोग बेहद खास?
  • सोमवती अमावस्या के शुभ मुहूर्त (15 जून 2026)
  • सोमवती अमावस्या पूजा विधि
    ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 2026 (FAQ)
 

आइए जानते हैं कि इस बार यह तिथि इतनी खास क्यों है और इसकी पूजा विधि क्या हैं?

 

इस बार क्यों है यह महासंयोग बेहद खास?

इस बार की सोमवती अमावस्या के पीछे कई ऐसे बड़े धार्मिक और ज्योतिषीय कारण हैं, जो इसे साधारण अमावस्या से कहीं अधिक फलदायी बनाते हैं:
 
3 साल बाद आया अधिकमास का योग: यह अमावस्या ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ रही है। अधिकमास हर तीन साल में एक बार आता है। इस महीने में किए गए दान और पूजा का फल सामान्य दिनों से अनंत गुना ज्यादा मिलता है।
 
मिथुन संक्रांति (त्रिगुणी संयोग): इसी दिन सूर्य देव भी राशि परिवर्तन करके मिथुन राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिसे मिथुन संक्रांति कहा जाता है। खासकर इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और असहायों को दान करने का विशेष महत्व है। 
 
शुभ योगों का महासंयोग: 15 जून को एक साथ 'सर्वार्थ सिद्धि योग' और 'अमृत सिद्धि योग' बन रहे हैं। इन योगों में की गई पूजा, व्रत या उपाय सीधे तौर पर सिद्ध होते हैं और मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी होती हैं।
 

सोमवती अमावस्या के शुभ मुहूर्त (15 जून 2026)

अमावस्या तिथि की शुरुआत: 14 जून 2026 को दोपहर 12:19 बजे से
अमावस्या तिथि की समाप्ति: 15 जून 2026 को सुबह 08:23 बजे तक
स्नान और दान का श्रेष्ठ समय (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 03:33 बजे से सुबह 04:55 बजे तक

 

सोमवती अमावस्या पूजा विधि

सोमवती अमावस्या के दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव-माता पार्वती और पितरों (पूर्वजों) की पूजा का विधान है।
 

1. पवित्र स्नान और संकल्प

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, सरोवर में स्नान करें। अगर बाहर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद व्रत या दान का संकल्प लें।
 

2. सूर्य देव को अर्घ्य और तर्पण

तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद हाथ में काले तिल और जल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का ध्यान करते हुए तर्पण या जल अर्पण करें।
 

3. देवताओं का अभिषेक

घर के मंदिर में या शिवालय जाकर भगवान शिव का दूध और गंगाजल से अभिषेक करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री चढ़ाएं। साथ ही इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना शुभ होता है।
 

4. पीपल के वृक्ष का पूजन और परिक्रमा

सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा का सबसे ज्यादा महत्व है। पीपल की जड़ में कच्चा दूध और जल चढ़ाएं। वहां घी का दीपक जलाएं। इसके बाद सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करें। परिक्रमा के दौरान पेड़ पर सूत का धागा लपेटा जाता है।
 

5. अन्न-वस्त्र का दान

पूजा समाप्त होने के बाद किसी गरीब, जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को अनाज- जैसे गेहूं, चावल, तिल, वस्त्र या सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा दान करें।

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 2026 (FAQ)

 
1. ज्येष्ठ अधिक अमावस्या क्या है?
ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को ज्येष्ठ अमावस्या कहा जाता है। जब अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के दौरान यह तिथि आती है, तो इसे ज्येष्ठ अधिक अमावस्या कहा जाता है। यह दिन पितरों के तर्पण, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है।
 
2. ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 15 जून 2026 में पड़ रही है। तिथि और मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना उचित रहता है।
 
3. ज्येष्ठ अधिक अमावस्या का धार्मिक महत्व क्या है?
यह तिथि पितृ तर्पण, स्नान-दान, भगवान विष्णु और शिव की पूजा तथा पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन किए गए सत्कर्मों का कई गुना फल प्राप्त होता है।
 
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