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Last Updated : सोमवार, 15 जून 2026 (10:17 IST)

Somvati Amavasya Remedies: सोमवती अमावस्या पर करें पिंडदान, श्राद्ध या तर्पण, पितृदोष से मिलेगी मुक्ति

Devotees performing Pind Daan, Shradh, and Tarpan to appease their ancestors on Somvati Amavasya, as shown in the picture
Pitru Dosh Upay: हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव की उपासना के साथ-साथ पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्मों के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है।ALSO READ: सोमवती अमावस्या क्यों हैं इस बार खास, जानें महासंयोग, पूजा मुहूर्त और विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है तथा पितृदोष के प्रभाव में कमी आती है। इस दिन किए गए दान, तर्पण और श्राद्ध से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इस बार 15 जून को सोमवती अमावस्या मनाई जा रही है।
 
यदि आपकी कुंडली में पितृदोष है या जीवन में बिना वजह परेशानियां- जैसे तरक्की रुकना, गृहक्लेश, या संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हैं, तो सोमवती अमावस्या के दिन आपको नीचे दिए गए कार्य जरूर करने चाहिए:
 

1. पिंडदान और श्राद्ध

अगर आप लंबे समय से पितरों का श्राद्ध या पिंडदान नहीं कर पाए हैं, तो सोमवती अमावस्या इसके लिए सर्वोत्तम दिन है।
 
आप किसी पवित्र नदी के तट पर (जैसे गया, हरिद्वार, प्रयागराज) या घर पर ही योग्य पुरोहित के माध्यम से पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न करा सकते हैं।
 
इस दिन चावल या जौ के आटे के पिंड बनाकर पितरों को अर्पित किए जाते हैं।
 

2. तर्पण (पितरों को जल देना)

सोमवती अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद पितरों के निमित्त तर्पण करना चाहिए।
 
विधि: एक तांबे या पीतल के पात्र में स्वच्छ जल लें। उसमें गंगाजल, कच्चा दूध, जौ, काले तिल और सफेद चंदन मिलाएं।
 
दिशा: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
 
अर्पण: हाथ की अंजलि में जल लेकर, अंगूठे की ओर से (पितृ तीर्थ से) जल को बर्तन या भूमि पर छोड़ें। अपने पूर्वजों का ध्यान करते हुए उनसे भूल-चूक की माफी मांगें।
 

3. पंचबलि भोग (विशेष भोजन)

इस दिन बिना लहसुन-प्याज का सात्विक भोजन बनाएं और भोजन का कुछ हिस्सा अग्नि में आहुति देने के बाद इन पांच अंशों में निकालें:
 
गौ बलि: गाय के लिए।
 
श्वान बलि: कुत्ते के लिए।
 
काक बलि: कौवे के लिए (कौवे को पितरों का रूप माना जाता है)।
 
देवादि बलि: देवताओं के लिए।
 
पिपीलिकादि बलि: चींटियों के लिए।
 

पितृदोष मुक्ति के कुछ अन्य अचूक उपाय

 
पीपल वृक्ष की पूजा: सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ में साक्षात भगवान विष्णु और पितरों का वास माना जाता है। इस दिन पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करें, 108 बार परिक्रमा करें और शाम के समय पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
 
तिल और कंबल का दान: इस दिन किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को काले तिल, ऊनी वस्त्र या कंबल, अन्न और जूते-चप्पल का दान करने से राहु-केतु और पितृदोष शांत होते हैं।
 
गीता का पाठ: यदि संभव हो तो इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें या ग्यारहवें अध्याय का पाठ करें और इसका पुण्य अपने पितरों को समर्पित करें।
 
विशेष नोट: सोमवती अमावस्या के दिन पूरी तरह से सात्विकता का पालन करें। घर में कलह या विवाद न करें और बड़ों व बुजुर्गों का आशीर्वाद अवश्य लें। पितर श्रद्धा के भूखे होते हैं; सच्चे मन से किया गया एक अंजलि जल भी उन्हें तृप्त कर सकता है।
 
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