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कब है शनि जयंती: शनिदेव को समझने में ही छुपा है समाधान

Updated: बुधवार, 9 जून 2021 (07:11 IST)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनिदेवजी का जन्म हुआ था। अंग्रेजी माह के अनुसार इस बार शनि जयंती 10 जून 2021 गुरुवार को मनाई जाएगी। यह दान-पुण्य, श्राद्ध-तर्पण पिंडदान की अमावस्या भी है। इसी दिन सावित्री व्रत भी रखा जाएगा। आओ जानते हैं कि शनिदेव से डरना नहीं बल्कि उन्हें समझने में ही भलाई है। समझना ही बचना माना जाता है।
 
 
शनि जयंती 2021 जेष्ठ अमावस्या मुहूर्त :
अमावस्या तिथी आरंभ: 14:00:25 (9 जून 2021)
अमावस्या तिथी समाप्ती: 16:24:10 (10 जून 2021)
 

शनिदेव न्यायाधीश : शनिदेव न्याय के देवता हैं उन्हें दण्डाधिकारी और कलियुग का न्यायाधीश कहा गया है। वे कर्मफल प्रदान करने वाले देवता हैं। शनिदेव बुरे कर्म करने वालों के शत्रु और अच्छे कर्म करने वालों के मित्र हैं। मान्यता है कि कुंडली में सूर्य है राजा, बुध है मंत्री, मंगल है सेनापति, शनि है न्यायाधीश, राहु-केतु है प्रशासक, गुरु है अच्छे मार्ग का प्रदर्शक, चंद्र है माता और मन का प्रदर्शक, शुक्र है- पति के लिए पत्नी और पत्नी के लिए पति तथा वीर्य बल।
 
 
जब समाज में कोई व्यक्ति अपराध करता है तो शनि के आदेश के तहत राहु और केतु उसे दंड देने के लिए सक्रिय हो जाते हैं। शनि की कोर्ट में दंड पहले दिया जाता है, बाद में मुकदमा इस बात के लिए चलता है कि आगे यदि इस व्यक्ति के चाल-चलन ठीक रहे तो दंड की अवधि बीतने के बाद इसे फिर से खुशहाल कर दिया जाए या नहीं।

 
शनि ग्रह की शक्ति : इस ग्रह के देवता लाल किताब के अनुसार भैरवजी और परंपरागत ज्योतिष के अनुसार शनिदेव हैं। शनि ग्रह मकर और कुम्भ राशी के स्वामी है। तुला में उच्च का और मेष में नीच का माना गया है। ग्यारहवां भाव पक्का घर। दसवें और अष्टम पर भी आधिपत्य। इनका प्रभाव गीद्ध, भैंसा, कौवा, दिशा वायव, तेल, लोहा, फौलाद, पोशाक जुराब, जूता, वृक्ष कीकर, आक और खजूर का वृक्ष पर रहता है।

 
शरीर के अंगों में दृष्टि, बाल, भवें, कनपटी, पेशा लुहार, तरखान और मोची, सिफत: मूर्ख, अक्खड़, कारिगर, गुण देखना, भालना, चालाकी, मौत और बीमारी, शक्ति जादूमंत्र देखने दिखाने की शक्ति पर असर देता है। शनि ग्रह का भ्रमण काल एक राशि में अढ़ाई वर्ष रहता है। बुध, शुक्र और राहु के मित्र, सूर्य, चंद्र और मंगल के शत्रु और बृहस्पति एवं केतु के साथ समभाव से रहते हैं। मंगल के साथ होतो सर्वाधिक बलशाली। नक्षत्र पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद है।
 
 
कर्म होता संचालित : शनि से ही हमारा कर्म जीवन संचालित होता है। दशम भाव को कर्म, पिता तथा राज्य का भाव माना गया है। एकादश भाव को आय का भाव माना गया है। अतः कर्म, सत्ता तथा आय का प्रतिनिधि ग्रह होने के कारण कुंडली में शनि का स्थान महत्वपूर्ण माना गया है। अत: शनि से बचने का एक मात्र तरीका अपने कर्म को शुद्ध रखना।

 
शनिदेव को यह पसंद नहीं : भगवान शनि को पसंद नहीं है जुआ-सट्टा खेलना, शराब पीना, ब्याजखोरी करना, परस्त्री गमन करना, अप्राकृतिक रूप से संभोग करना, झूठी गवाही देना, निर्दोष लोगों को सताना, किसी के पीठ पीछे उसके खिलाफ कोई कार्य करना, चाचा-चाची, माता-पिता, सेवकों और गुरु का अपमान करना, ईश्वर के खिलाफ होना, दांतों को गंदा रखना, तहखाने की कैद हवा को मुक्त करना, भैंस या भैसों को मारना, सांप, कुत्ते और कौवों को सताना। सफाईकर्मी और अपंगों का अपमान करना आदि। यदि आपने इस बात को समझकर अपने आचरण सही रखे तो शनिदेव से डरने की जरूरत नहीं।

 
शनिदेव के प्रकोप से बचने के उपाय : 
1. प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़े। 
2. भगवान भैरव को कच्चा दूध या शराब चढ़ाएं।
3. छाया दान करें।
4. कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलावें।
5. अंधे-अपंगों, सेवकों और सफाईकर्मियों की सेवा करें।
6. तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, काला वस्त्र, काली गौ, और जूता दान देना चाहिए।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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