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Panchak Dates 2026: 06 जून से लगेगा मृत्यु पंचक, जानें क्यों हैं खास, क्या करें और क्या न करें?

Published: शुक्रवार, 5 जून 2026 (17:13 IST)
June Mrityu Panchak 2026: सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में 'पंचक' को बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय माना गया है। इस बार जून के महीने में 06 जून से पंचक काल की शुरुआत होने जा रही है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में गोचर करता है, तो उस पांच दिनों की अवधि को 'पंचक' कहा जाता है।ALSO READ: गुरु का कर्क राशि में महागोचर, 2 राशियों के लिए अशुभ, 3 पर मिलाजुला प्रभाव, करें 5 उपाय
 
अक्सर लोग पंचक का नाम सुनते ही डर जाते हैं कि यह अशुभ समय है, लेकिन ऐसा नहीं है। 06 जून से शुरू होने वाला पंचक काल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह समय पूजा-पाठ, जप, ध्यान और दान-पुण्य के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। वहीं कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार निर्माण कार्य, लकड़ी संग्रह और कुछ अन्य कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। पंचक को भय का नहीं, बल्कि सावधानी और आध्यात्मिक साधना के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
 

आइए जानते हैं कि इस बार का पंचक क्यों खास है और इसमें किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

 

क्यों खास है इस बार का पंचक? (मृत्यु पंचक)

ज्योतिष शास्त्र में पंचक जिस वार या दिन से शुरू होता है, उसके अनुसार उसका नाम और प्रभाव तय होता है।
 
मृत्यु पंचक का योग: इस बार 06 जून को शनिवार का दिन है। शनिवार से शुरू होने वाले पंचक को 'मृत्यु पंचक' कहा जाता है।
 
प्रभाव: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह पंचक बेहद कष्टकारी और जोखिम भरा माना जाता है। इस अवधि में दुर्घटना, चोट लगने, बीमारी या किसी भी तरह के बड़े विवाद की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए इस पांच दिनों की अवधि में अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
 

जून 2026 में कब पड़ेगा पंचक, जानें समय 

 
इस बार पंचक का आरम्भ 06 जून, 2026, शनिवार को 07:03 पी एम से हो रहा है। 
और पंचक का अंत 11 जून, 2026, बृहस्पतिवार को 08:16 ए एम पर होगा। 
 

पंचक में भूलकर भी न करें ये 5 काम/ वर्जित कार्य

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है, क्योंकि इस दौरान किए गए गलत काम का प्रभाव पांच गुना बढ़ सकता है।
 
लकड़ी या ईंधन इकट्ठा करना: पंचक के दौरान घर की छत के लिए लकड़ी, घास या कोई भी ज्वलनशील सामग्री (जैसे कंडे, कोयला) इकट्ठा नहीं करना चाहिए। इससे अग्नि का भय रहता है।
 
घर की छत डालना (लेंटर डालना): यदि आप घर बनवा रहे हैं, तो इन पांच दिनों में घर की छत या लेंटर डलवाने का काम रोक दें। ऐसा करना धन और सुख की हानि कराता है।
 
चारपाई या बेड बुनना: पंचक काल में नई चारपाई बनाना, बेड खरीदना या गद्दे आदि तैयार करवाना अशुभ माना जाता है।
 
दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों की दिशा माना गया है। पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए।
 
शव दाह (अंतिम संस्कार) में नियम: यदि पंचक के दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है, तो बिना पंचक शांति के शव का दाह संस्कार नहीं किया जाता। ऐसा न करने पर परिवार पर संकट आ सकता है।ALSO READ: 12 साल बाद बना हंस महापुरुष राजयोग, अगले कुछ महीने इन 5 राशियों पर होगी पैसों की बारिश
 

पंचक काल में क्या करें? (क्या करने की है छूट)

सभी पंचक बुरे नहीं होते और कुछ जरूरी काम इस दौरान किए जा सकते हैं:
 
सरकारी और व्यावसायिक कार्य: यदि कोई जरूरी सरकारी काम या बिजनेस डील है, तो उसे किया जा सकता है।
 
रक्षा और कानून से जुड़े काम: शनिवार से शुरू होने वाले मृत्यु पंचक में कानूनी विवादों को सुलझाने, कोर्ट-कचहरी के काम या सुरक्षा से जुड़े फैसले लेने में सफलता मिल सकती है।
 
जरूरी काम के लिए उपाय: यदि कोई वर्जित काम करना बेहद जरूरी हो (जैसे दक्षिण दिशा की यात्रा या शवदाह), तो ज्योतिषीय उपाय या आटे के पांच पुतले बनाकर पंचक दोष का निवारण करने के बाद ही आगे बढ़ें।
 
विशेष टिप: चूंकि यह 'मृत्यु पंचक' है, इसलिए वाहन चलाते समय गति पर नियंत्रण रखें और किसी भी तरह के वाद-विवाद से खुद को दूर रखें। इन पांच दिनों में भगवान शिव या हनुमान जी की आराधना करना संकटों से रक्षा करता है।
 
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