मेरी ग़ज़ल

WD| पुनः संशोधित शनिवार, 31 अगस्त 2013 (17:41 IST)
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मेरी नज़र से न हो दूर एक पल के लिए,
तेरा वुजूद है लाज़िम मेरी ग़ज़ल के लिए।

-क़तील शिफ़ाई



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