सिंहासन बत्तीसी : आठवीं पुतली पुष्पवती की कथा

FILE

राजा ने गुस्से से कहा, 'दो लाख रुपए दो।'


दीवान चुप रह गया। रुपए दे दिए। रुपए लेकर बढ़ई चलता बना, पर चलते चलते कह गया कि इस घोड़े में ऐड़ लगाना कोड़ा मत मारना।

एक दिन राजा ने उस पर सवारी की। पर वह बढ़ई की बात भूल गए और घोड़े पर कोड़ा जमा दिया। कोड़ा लगना था कि घोड़ा हवा से बातें करने लगा और समुद्र पार ले जाकर उसे जंगल में एक पेड़ पर गिरा दिया। लुढ़कते हुए राजा नीचे गिरे।

WD|
संभलने पर उठे और चलते-चलते एक ऐसे बीहड़ वन में पहुंचे कि निकलना मुश्किल हो गया। जैसे-तैसे वह वहां से निकले। दस दिन में सात कोस चलकर वह ऐसे घने जंगल में पहुंचे, जहां हाथ तक नहीं सूझता था। चारों तरफ शेर-चीते दहाड़ते थे। राजा घबराए। रास्ता नहीं सूझता था।



और भी पढ़ें :