मैं चाहता हूँ...

जनकसिंह झाला|
मैं चाहता हूँ कि,
तुम्हें ढेर सारा मिले।
मनचाही खुशियों भरा एक नया संसार मिले।
बेवफाई की इस अंधेरी दुनिया से कोसों दूर,
वफा के उजालों से भरा एक नया द्वार मिले..

मैं चाहता हूँ कि,
तुम्हारे कोमल हाथों से हमारे हाथ मिलेतुम्हारे कदमों को भी एक नया साथ मिले।।
आईना बनकर हमारे सामने खड़ी रहो तुम,
ताकि दोनों रुहों को भी प्यार भरे जज्बात मिले..॥


मैं चाहता हूँ कि,
तुम्हारी झोली में हो इन्द्रधनुष के सातों रंग। तुम हमेशा मुस्कुराती रहो रंगबिरंगी तितलियों के संग।।
मेरे इन ख्वाबों को भी एक सही मुकाम मिले,
इन अफसानों को भी हकीकत का नया नाम मिले ।।



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