कोटेश्वर महादेव मंदिर

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से भरपूर मध्यप्रदेश का प्रसिद्घ 'कोटेश्वर महादेव मंदिर' महू-नीमच मार्ग पर कानवन फाटे से 12 किमी दूर पश्चिम में ग्राम कोद (धार) के निकट पहाड़ियों के मध्य अत्यंत मनोरम स्थल है। यहाँ एक गुफा में शिवलिंग स्थित है। इसकी विशेषता यह है कि यह पश्चिम मुखी है। यहाँ झरने के रूप में प्रवाहित जलधाराएँ महादेवजी का प्राकृतिक अभिषेक करतीं कुंडों में समा जाती हैं।

श्रद्घालु कुंडों में स्नान व महादेव के दर्शन-पूजन कर धन्य हो जाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा को यहाँ स्नान करने वालों का ताँता लगा रहता है। महिलाएँ अपने मनोरथ की पूर्ति के लिए लताओं के पत्तों पर आटे के दीप प्रज्वलित कर कुंडों में प्रवाहित करती हैं।

माँ गंगा आई : किंवदंती है कि यहाँ संत सुकाल भारती ने समाधि ली थी। सुकाल भारती प्रति रात्रि गंगा नदी में स्नान के लिए जाते थे। वृद्घावस्था में उनकी प्रार्थना पर माँ भागीरथी अपनी छः सहेलियों के साथ उनके पीछे सात सिंदूरी रेखाएँ के साथ चलीं आईं। इस प्रकार यह तीर्थ गंगा सहित सात सरिताओं के संयोग से बना है।
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8 वर्षों से रामधुन : यहाँ 8 वर्षों से रामधुन का अखंड कीर्तन चल रहा है। इसमें 31 गाँवो के श्रद्घालु बारी-बारी से 24 घंटे की अवधि के लिए कीर्तन करते हैं। कार्यक्रम संचालन समिति द्वारा यहाँ धर्मशाला, भोजनशाला, कीर्तन भवन आदि निर्माण किए गए हैं। मेले का आयोजन जनपद पंचायत द्वारा किया जाता है। केले एवं सिंघाड़े की ब्रिकी के लिए यह मेला प्रसिद्ध है। यह मंदिर पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है।
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर इस मंदिर के परिसर में मेले का आयोजन किया जाता है। इसमें बड़ी संख्या में कोद सहित क्षेत्र श्रद्घालु भाग लेते हैं। मेले में मनोरंजन के साधन, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ, खिलौने, रेडिमेड वस्त्र, बर्तन की दुकानें, होटलें आदि आकर्षण के केंद्र होते हैं।

 

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