विकास के एजेंडे पर चुनाव लड़ रहे हैं : सत्यपाल सिंह

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित गुरुवार, 27 मार्च 2014 (19:56 IST)
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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में के बागपत से एवं मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त ने कहा कि वे रालोद के नेता अजित सिंह के गढ़ में विकास के एजेंडे पर चुनाव लड़ रहे हैं और भाजपा के कुछ नेताओं पर लगे दंगों के आरोप से उनकी संभावनाओं पर असर नहीं पड़ेगा।


मुजफ्फरनगर दंगों के बाद मुसलमानों और जाटों में कड़वाहट आने और इस क्षेत्र में भाजपा की चुनावी संभावना के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, भाजपा कभी भी जाति, बिरादरी, मजहब के आधार पर काम नहीं करती बल्कि राष्ट्रहित में काम करती है। हम विकास के लिए लोगों के पास जा रहे है।

सिंह ने कहा कि यह सीट पिछले कई दशकों में एक ही परिवार के पास रहने के बावजूद पिछड़ा हुआ इलाका है। लोग इससे काफी परेशान हैं। किसान खासतौर पर गन्ना किसान काफी परेशान है, युवा परेशान हैं क्योंकि रोजगार का अभाव है। सड़कें नहीं हैं। शिक्षा आधारभूत संरचना का अभाव है।

दंगों के बाद की स्थिति में मुस्लिमों समेत सभी वर्गों की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, मुझे उनकी (मुस्लिमों) प्रतिक्रिया मिल रही है। हर कोई विकास चाहता है। मुझे नहीं पता कि किसी के दिमाग में क्या है। यदि बिजली, सड़कें और उद्योग धंधे हैं तो इससे सभी को लाभ होगा। हम विकास के एजेंडे पर सभी वर्गों का समर्थन मांग रहे हैं।

बागपत से वर्तमान सांसद और केंद्रीय मंत्री अजीत सिंह की पार्टी की ओर से उन्हें ‘बाहरी’ बताए जाने पर सत्यपाल सिंह ने कहा, मैं बाहरी नहीं हूं। बागपत के एक गांव में ही मेरा जन्म हुआ। पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में मैं बाहर गया। मुम्बई का पुलिस आयुक्त बना। इससे यह बात हो गई कि बागपत का एक बच्चा मुम्बई का पुलिस आयुक्त बना। अब मैं फिर से अपने जन्मभूमि की सेवा करना चाहता हूं।
फरवरी में अपने पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने वाले सिंह ने दंगों में भाजपा की संलिप्तता के आरोपों को राजनीतिक दुष्प्रचार कहकर खारिज करने के साथ ही कहा, मैं यहां किसी और की बात करने नहीं आया हूं। हर किसी को न्याय मिलना चाहिए। सिंह ने कहा कि मोदी लहर से उन्हें इलाके में जाटों पर अजित सिंह की पकड़ को तोड़ने में मदद मिलेगी।
रालोद प्रमुख पर हमला बोलते हुए सिंह ने कहा, उन्होंने (अजित सिंह) क्या किया है। बागपत सर्वाधिक अविकसित हिस्सा बन गया है। सड़कें इतनी खराब हैं। यहां कोई उद्योग नहीं हैं और रोजगार के अवसरों की तो बात ही मत कीजिए। यह इलाका इतना असुरक्षित हो गया....।

उन्होंने कहा, मैं एक सिपाही हूं। मुझे चुनौतियां पसंद हैं। यह इतनी खराब हालत में है। अव्यवस्था में से व्यवस्था बनाना एक सिपाही का कर्तव्य है। मैं इसके साथ ही आगे बढ़ रहा हूं और मैं जीतूंगा। (भाषा)



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