राजस्थान में शांति के लिए चौतरफा कोशिशें

नई दिल्ली (वार्ता)| वार्ता| पुनः संशोधित शनिवार, 2 जून 2007 (23:47 IST)
राजस्थान में गुर्जरों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की माँग को लेकर भड़की हिंसा के पाँचवें दिन शनिवार को केन्द्र सरकार, राज्य सरकार एवं विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से विभिन्न स्तरों पर हिंसा को समाप्त करने तथा अमन-चैन बहाल करने की कोशिशें तेज हो गईं हैं।

केन्द्र सरकार ने शनिवार को राजस्थान सरकार को संघर्षरत मीणा तथा गुर्जर समुदाय के बीच बातचीन शुरू करवाने के लिए पहल करने का सुझाव दिया साथ ही उत्तरप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली तथा मध्यप्रदेश राज्य सरकारों को भी कानून तथा व्यवस्था बनाए रखने के लिए समुचित कदम उठाने के निर्देश दिए ताकि यह आंदोलन राजस्थान से आसपास के राज्यों में नहीं फैले।
सोनिया की चिंता : कांग्रेस तथा संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी इस हिंसा को लेकर चिंता व्यक्त की है। माकपा ने गुर्जरों के आंदोलन के जाति युद्ध मे बदल जाने पर गहरी चिंता जताई और राज्य तथा केन्द्र सरकार से स्थिति पर नियंत्रण तथा इसे दूसरे राज्यों में नहीं फैलने देने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की माँग की है।

इस बीच राजस्थान सरकार ने माहौल सुधरने तथा हिंसा कोई बड़ी घटना नहीं होने का भी दावा किया लेकिन आंदोलन की लपटें उत्तरप्रदेश में खासतौर पर पश्चिमी उत्तरप्रदेश में बड़े पैमाने पर फैलने की खबर है। प्रदेश में आज अनेक स्थानों पर गुर्जर आंदोलनकारियों के प्रदर्शन, सड़क जाम करने, रेल रोकने और पुलिस पर पथराव करने जैसी घटनाओं की खबरें मिली हैं।
राष्ट्रपति शासन की माँग : गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने शनिवार को गुर्जर समुदाय के नेताओं को बताया कि राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लागू करने के माँग पर रविवार को विचार विमर्श किया जाएगा।

अखिल भारतीय गुर्जर विकास संगठन के अध्यक्ष और कांग्रेसी सांसद अवतारसिंह भडाणा के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल से पाटिल ने कहा कि राज्य में कानून और व्यवस्था बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर अनुच्छेद 356 लागू करने के मुद्दे पर कल विचार होगा।



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