बाघों को ग्रामीणों से खतरा, सुरक्षा बढ़ाए उड़ीसा: रमेश

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित गुरुवार, 30 जून 2011 (17:14 IST)
सिमलिपाल संरक्षित क्षेत्र के बाघों पर आस-पास के ग्रामीणों से मंडराते खतरे के मद्देनजर ने प्रदेश सरकार से कहा है कि वह इस क्षेत्र से सटे इलाकों में प्रदेश के सशस्त्र बलों के दस्ते तैनात करे।

उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को लिखे पत्र में रमेश ने मयूरभंज जिले में स्थित 2,750 वर्ग किमी के इस संरक्षित क्षेत्र का ‘बाघ दर्जा’ मजबूत करने के लिए पटनायक से ‘व्यक्तिगत तौर पर हस्तक्षेप’ की मांग की है ।

इस क्षेत्र में प्रदेश में बाघों की कुल 50 फीसदी आबादी बसती है।

सिमलिपाल से लौटे नेशनल टाइगर कंजरवेशन ऑथोरिटी (एनटीसीए) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में रमेश को जानकारी दी थी, जिसके बाद रमेश ने पत्र में कहा है कि मुख्य क्षेत्र के आसपास बसे कुछ गांवों में प्रदेश सशस्त्र बलों के दस्ते तैनात करने की जरूरत है।
मंत्री ने कल लिखे अपने इस पत्र में कहा है कि यह उन गांवों में खास तौर पर जरूरी है, जहां ‘अखंड शिकार’ (सामूहिक शिकार) की परंपरा है। इस इलाके के लोगों के बीच ‘अखंड शिकार’ की परंपरा बहुत अहम मानी जाती है। इस संरक्षित क्षेत्र के आस-पास के क्षेत्र में लगभग चार लाख लोग रहते हैं।

रमेश ने कहा है कि संरक्षित क्षेत्र की ओर जाने वाले रास्तों, प्रवेश और निर्गमन बिंदुओं पर सशस्त्र कर्मचारियों को तैनात किया जाना चाहिए। पर्यावरण मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया है कि पार्क के भीतर स्थानीय कर्मचारियों और प्रदेश सशस्त्र बलों द्वारा संयुक्त तौर पर गश्त की जानी चाहिए।
रमेश के मुताबिक, संरक्षित क्षेत्र में तैनात मैदानी कर्मचारियों का ‘दक्षता संवर्धन’ भी किया जाना चाहिए और ‘खाली पद भरने की भी’ जरूरत है। (भाषा)



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