भारत होगा छोटी कारों का प्रमुख केंद्र

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दुनियाभर की कंपनियाँ लागत कम करने और किफायती ईंधन वाली कारों के लिए भारत में आ रही हैं। विश्व की लगभग सभी बड़ी कंपनियाँ यहाँ आ चुकी हैं और अपना संयंत्र स्थापित कर लगभग उत्पादन भी कर रही हैं।

वाहन उद्योग के प्रमुख संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स सियाम के महानिदेशक दिलीप चिनाय ने कहा है कि भारत छोटी कारों के निर्माण के प्रमुख केन्द्र के रूप में स्वयं को बड़ी तेजी से स्थापित कर रहा है और निर्यात में वृद्धि की अपार संभावनाएँ हैं।

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने तो वर्ष 2012 तक पूर्ण रूप से देश में निर्मित कार सड़कों पर उतारने की घोषणा की है। कंपनी ने हाल ही में हरियाणा के रोहतक में 1500 करोड़ रुपए की लागत से दो चरणों में सात सौ एकड़ में विकास एवं शोध केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है, जहाँ छोटी कारों के लिए विभिन्न प्रकार के परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

मारुति सुजुकी की स्वामित्व वाली कंपनी जापान की सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन भी भारत को अपनी छोटी कारों के विकास एवं शोध के साथ निर्माण के लिए प्रमुख केंद्र बनाने जा रही है।

नई दिल्ली (वार्ता)| वार्ता|
कार बनाने वाली दुनियाभर की दिग्गज कंपनियाँ अपनी छोटी और कॉम्पेक्ट कारों के निर्माण एवं विकास के लिए भारत का रुख कर रही हैं। इससे वर्ष 2012 तक भारत इस श्रेणी की कार के लिए वैश्विक स्तर पर प्रमुख केन्द्र बन जाएगा।
लक्जरी कार बनाने वाली कंपनी होंडा सिएल कार्स इंडिया के भी वर्ष 2012 तक छोटी कार लाने की संभावना है। कंपनी के उपाध्यक्ष (विपणन) जिनेश्वर सेन ने कहा कि हैचबैक कार जैज से भी छोटी कार लाने की योजना है और इस पर अभी काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि यह कार वर्ष 2011 के अंत तक या वर्ष 2012 में आ सकती है।



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