सहारा पर sc का शिकंजा कसा, सेबी को दें दस्तावेज

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित सोमवार, 28 अक्टूबर 2013 (21:55 IST)
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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि सहारा समूह निवेशकों को धन लौटाने के चर्चित मामले में ‘लुकाछिपी’ खेल रहा है और उस पर अब और अधिक भरोसा नहीं किया जा सकता है। न्यायालय ने इसके साथ ही सहारा समूह को निर्देश दिया कि वह अपनी 20 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिकाना हक संबंधी दस्तावेज सेबी को सौंपे

न्यायालय ने साथ ही चेतावनी दी कि यदि तीन सप्ताह के भीतर इस आदेश पर अमल नहीं हुआ तो समूह के मुखिया सुब्रत राय को देश से बाहर जाने से रोक दिया जाएगा।

न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि निवेशकों को लौटाए जाने वाला धन बाजार नियामक को सौंपने से ‘बचने का’ कोई रास्ता नहीं बचा है। न्यायाधीशों ने समूह को यह निर्देश भी दिया कि संपत्तियों के मूल्यांकन की रिपोर्ट भी सेबी को सौंपी जाए जो संपत्ति की कीमत की पुष्टि करेगा।
इससे पहले राय के वकील ने कहा था कि उनकी प्रतिष्ठा और कारोबार को नुकसान पहुंच सकता है। राय के वकील सीए सुन्दरम ने कहा कि उनके मुवक्किल के व्यवहार ने कभी भी संदेह नहीं पैदा किया है। इस पर न्यायाधीशों ने कहा, आपने सभी को चारों तरफ नचाया है। पहले दिन से हम संयम बरत रहे हैं। आप जरूरत से ज्यादा लुकाछिपी करते हैं। हम आप पर और अधिक भरोसा नहीं कर सकते। आपके लिए अब बचाव का कोई और रास्ता नहीं है और धन तो देना ही होगा।
न्यायालय ने इसके साथ ही सहारा समूह को भरोसा दिलाया कि यदि निवेशकों का धन लौटा दिया गया तो उसके हितों की रक्षा की जाएगी। न्यायालय ने इसके साथ ही इस मामले की सुनवाई 20 नवंबर के लिए स्थगित कर दी। न्यायालय उस दिन उन संपत्तियों के बारे में विचार करेगा जिनके मालिकाना हक के दस्तावेज सेबी को सौंपे जाएंगे।

इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही सहारा समूह के वकील सुंदरम ने कहा कि 20 हजार करोड़ रुपए का नकद भुगतान करना संभव नहीं है और यदि उसे नकद भुगतान करने का निर्देश दिया गया तो कंपनी दिवालिया हो जाएगी। सुन्दरम ने कहा, यदि मुझे 19 हजार करोड़ रुपए नकद भुगतान करने पड़े तो मैं खत्म हो जाऊंगा। मेरी कंपनी दिवालिया हो जाएगी।’
उन्होंने कहा कि बैंक भी उन्हें कर्ज देने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वह उसे सुरक्षित नहीं मान रहे हैं। उन्होंने एंबी वैली सहित तमाम संपत्तियों का विवरण दिया और कहा कि 30 हजार मालिकाना हक के विलेखों के दस्तावेज हजारों पन्ने के हैं। सेबी ने इन संपत्तियों के मालिकाना हल विलेखों पर आपत्ति व्यक्त की और कहा कि सहारा समूह को इन संपत्तियों को बेचकर उसे नकद राशि देनी चाहिए, लेकिन न्यायालय ने सेबी से कहा कि वह सहारा द्वारा उसे सौंपे जाने वाली संपत्तियों के संपत्तियों विलेखों और मूल्यांकन के रिकॉर्ड का अवलोकन करे।
न्यायालय ने कहा कि इन विलेखों की छानबीन करके इसकी कीमत का अनुमान लगाया जाए। इस पर सेबी के वकील अरविन्द दातार ने कहा कि संपत्तियों के मूल्यांकन से दूसरे सवाल खड़े हो सकते हैं। न्यायाधीशों ने दातार से कहा, सब कुछ किया जाएगा। आप उच्चतम न्यायालय को कमतर आंक रहे हैं। न्यायालय राय, सहारा इंडिया रियल इस्टेट कार्प. लि. और सहारा इंडिया हाउसिंग इंवेस्टमेन्ट कार्प लि और उनके निदेशकों के खिलाफ सेबी की अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।
न्यायालय ने पिछले साल 31 अगस्त को सहारा समूह को निर्देश दिया था कि नवंबर के अंत तक निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपए लौटाएं जाएं। यह समय सीमा आगे बढ़ाई गई थी और कंपनियों को 5120 करोड़ रुपए तत्काल जमा करने तथा दस हजार करोड़ रुपए जनवरी के पहले सप्ताह में तथा शेष रकम फरवरी के प्रथम सप्ताह के जमा करानी थी। समूह ने पांच दिसंबर को 5120 करोड़ रुपए का ड्राफ्ट जमा कराया था लेकिन शेष रकम का भुगतान करने में वह असफल रहा था। (भाषा)

 

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