अल्लाह तआला के 99 नाम

संकलन : श्रीमती अनीसा बेगम

31. अल्‌-ल़तीफ़ (कृपा करने वाला)
जो व्यक्ति 133 बार या ल़तीफ़ पढ़ा करे, उसकी धन वृद्धि हो तथा समस्त इच्छाएँ पूरी हों। जो व्यक्ति गरीबी, दुःख, बीमारी, तन्हाई या किसी अन्य मुसीबत में पड़ा हो वह वज़ू करके दो रकत नमाज़ पढ़े और अपने मक़सद को दिल में रखकर 100 बार पढ़े इन्शा अल्लाह मक़सद पूरा हो।


और अल्लाह ही के लिए है सल्तनत आसमानों की और जमीन की और अल्लाह हर वस्तु पर पूरी कुदरत रखते हैं।

32. अल्‌-ख़बीर (जानकारी रखने वाला)
जो व्यक्ति सात दिन तक या ख़बीर अनगिनत पढ़े अल्लाह उस पर छिपे हुए रहस्य खोल देंगे। जो व्यक्ति कोई अप्रिय आदत रखता हो या किसी ज़ालिम के क़ब्ज़े में हो वह बेहिसाब पढ़े, छूट जाएगा।

33. अल्‌-ह़लीम (धैर्यवान)
इस नाम को काग़ज़ पर लिखकर पानी से धोकर जिस वस्तु पर पानी छिड़कें उसमें उन्नति हो तथा हानि से बचा रहे।

34. अल्‌-अज़ीम (अति महान)
जो व्यक्ति अधिक मात्रा में या अज़ीम पढ़े इन्शा अल्लाह आदर, उन्नति तथा हर रोग से मुक्त पाएगा।
35. अल्‌-ग़फ़ूर (मुक्ति देने वाला)
जो व्यक्ति अनगिनत या ग़फ़ूर पढ़े उसके समस्त कष्ट, दर्द, दुःख दूर हों तथा धन वृद्धि हो। जो व्यक्ति सजदे में या रब्बिग़ फ़िरली तीन बार कहे, अल्लाह त'आला उसके अगले-पिछले समस्त पाप क्षमा कर देगा।

36. अश्‌-शकूर (आदर करने वाला)
जो व्यक्ति दरिद्रता या अन्य किसी दुःख-दर्द से पीड़ित हो वह इकतालीस (41) बार या शकूर पढ़े उसका दूःख दूर होगा। जिस व्यक्ति को थकान हाती हो तथा शरीर टूटा रहता हो इस नाम को लिखकर पिए तथा शरीर पर फेरे फायदा होगा। यदि आँखों से कम दिखता हो तो लिखकर आँख पर फेरे फायदा होगा। इन्शा अल्लाह।
कह दो कि तुम (खुदा को) अल्लाह (के नाम से) पुकारो या रहमान के नाम से, जिस नाम से पुकारो, उसके सब नाम अच्छे हैं।

37. अल्‌-'अली (सबसे ऊँचा)
जो व्यक्ति हमेशा या 'अली पढ़ता रहे तथा लिखकर अपने पास रखे इन्शा अल्लाह उसकी तरक्की हो, वह खुशहाल हो और उसकी इच्छा पूरी हो। यदि मुसाफ़िर अपने पास रखे तो जल्द अपने संबंधियों के पास वापस आए।
38. अल्‌-कबीर (बहुत बड़ा)
जो व्यक्ति अपने पद से हटा दिया गया हो, वह सात रोजे (व्रत) रखे और रोजाना एक हजार बार या कबीर पढ़े अपना पद पुनः पाएगा तथा उन्नति व विजय मिलेगी। यदि खाने की चीज पर पढ़कर खिलाए तो पति-पत्नी में परस्पर प्रेम हो।

39. अल्‌-ह़फ़ीज़ (सबका रक्षक)
जो व्यक्ति अनगिनत या ह़फ़ीज़ पढ़े और लिखकर अपने पास रखे, वह हर प्रकार के भय व हानि से सुरक्षित रहेगा। यदि जंगली जानवरों के बीच सो जाए तो कोई हानि न पहुँचे।
40. अल्‌-मुक़ीत (सबको रोज़ी व शक्ति देने वाला)
जो व्यक्ति खाली बर्तन में सात बार या मुक़ीत पढ़कर फूँके और स्वयं उससे पानी पिए या दूसरे को पिलाए या सूँघे तो इन्शा अल्लाह इच्छा पूर्ति हो। यदि रोजेदार मिट्टी पर पढ़कर या लिखकर पानी से तर करके सूँघे तो शक्ति प्राप्त हो और यदि यात्री मिट्टी के बर्तन पर सात बार पढ़कर या लिखकर उससे पानी पिए तो यात्रा के दुख से बचा रहे। यदि किसी का बच्चा बुरे स्वभाव रखता हो, उसे पानी पिलाए तो स्वभाव अच्छा हो।
और जो लोग उसके नामों में टेढ़ (अपनाया) करते हैं, उनको छोड़ दो।

41. अल्‌-ह़सीब (सबकी पूर्ति करने वाला)
जिस व्यक्ति को किसी भी व्यक्ति या दुर्घटना का भय हो वह वृहस्पतिवार से आरंभ करके आठ दिन तक सुबह व शाम के समय सत्तर बार ह़स्बेयल्ला हुल्ह़सीब पढ़े। वह हर हानि से बचा रहे।
42. अल्‌-जलील (बड़े व ऊँचे प्रभुत्व वाला)
जो व्यक्ति कस्तूरी (मुश्क) व केसर (जाफरान) से अल्‌ जलील लिखकर अपने पास रखे तथा या जलील बहुधा पढ़ा करे आदर, सत्कार व उन्नति पाएगा।

43. अल्‌-करीम (बहुत कृपा करने वाला)
जो व्यक्ति रोजाना सोते समय या करीम पढ़ते-पढ़ते सो जाया करे अल्लाह उसे ज्ञानी-ध्यानी का आदर देंगे।
44. अर्‌-रक़ीब (बड़ी दृष्टिरखने वाला)
जो व्यक्ति रोज सात बार या रक़ीब पढ़कर अपने परिवार धन-सम्पत्ति पर फूँके इन्शा अल्लाह सब आपदाओं से सुरक्षित रहे।

45. अल्‌-मुजीब (दुआएँ स्वीकार करने वाला)
जो व्यक्ति या मुजीब अधिक मात्रा में पढ़ा करे इन्शा अल्लाह उसकी दुआएँ क़ुबूल होने लगेंगी।
46. अल्‌-वासे' (बहुत अधिक देने वाला)
जो अधिक मात्रा में या वासे' पढ़ा करे अल्लाह त'आला उसकी आय वृद्धि कर देंगे।

47. अल्‌-ह़कीम (बुद्धिमान)
जो व्यक्ति अधिक मात्रा में या ह़कीम पढ़ा करे अल्लाह त'आला उसकी बुद्धि का विकास कर देंगे। जिसका कोई कार्य पूरा न होता हो वह कार्य पूरा होगा।
48. अल्‌-वदूद (बड़ा प्रेम करने वाला)
जो व्यक्ति एक हजार बार या वदूद पढ़कर खाने पर फूँके और अपनी पत्नी के साथ खाना खाए, पति-पत्नी का झगड़ा समाप्त हो और परस्पर प्रेम उत्पन्न हो।

49. अल्‌-मजीद (बड़ा महान)
जो व्यक्ति किसी संक्रामक रोग जैसे आत्शिक, कोढ़ आदि से पीड़ित हो वह चन्द्रमास की 13, 14, 15 तारीख को रोजे (वृत) रखे और अफ़तार के बाद बे-गिनती या मजीद पढ़े और पानी पर फूँककर पिए तो इन्शा अल्लाह रोग मुक्त हो।
50. अल्‌-बाइस (मुर्दों को जीवित करने वाला)
जो व्यक्ति रोजाना सोते समय सीने पर हाथ रखकर 101 बार या बाइस पढ़े वह मन ज्ञान से भर जाएगा।

51. अश्‌-शहीद (हर जगह उपस्थित और देखने वाला)
जिस व्यक्ति की पत्नी या औलाद आज्ञाकारी न हो वह सुबह के समय उसके माथे पर हाथ रखकर 21 बार या शहीद पढ़कर फूँके, आज्ञाकारी होगी।
52. अल्‌-ह़क़्क़ (सत्य)
जो व्यक्ति वर्गाकार (चौकोर) कागज के कोनों पर अल्‌-ह़क़्क़ लिखकर प्रातःकाल हथेली पर रख आसमान की ओर ऊँचा करके दुआ करे, खोया हुआ व्यक्ति या सामान मिल जाए और हानि से बचा रहे।

53. अल्‌-वकील (कार्य सफल करने वाला)
जो व्यक्ति किसी भी आसमानी आफत या भय के समय बे-गिनती या वकील पढ़े वह हर हानि से बचा रहे। हर इच्छा की पूर्ति के लिए पढ़ना लाभकारी है।
54. अल्‌-क़वी (बड़ा शक्तिमान)
जो व्यक्ति वास्तव में शत्रु द्वारा पीड़ित हो तथा शत्रु शक्तिशाली हो तो अनगिनत या क़वी पढ़े तो शत्रु से सुरक्षित रहे। (असहनीय स्थिति के अतिरिक्त यह हरगिज़ न पढ़ें)

55. अल्‌-मतीन (मज़बूत)
जिस स्त्री के दूध न हो उसको अल्‌-मतीन काग़ज़ पर लिख, धोकर पिलाएँ, खूब दूध होगा। यदि कोई कमजोर व्यक्ति या मतीन पढ़े शक्तिशाली हो। यदि किसी कुकर्मी व्यक्ति पर पढ़ा जाए, वह कुकर्मों को छोड़ दें। इन्शा अल्लाह।
56. अल्‌-वली (मदद और हिमायत करने वाला)
जो व्यक्ति अपनी बीवी (पत्नी) की आदतों व व्यवहार से अप्रसन्न हो, जब उसके सामने जाए या वली पढ़ा करें, अच्छे व्यवहार की हो जाए। जब कोई कष्ट हो तो जुमे की रात (शुक्रवार की रात) में 1000 बार पढ़ें, कष्ट दूर हो।



और भी पढ़ें :