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कौन हैं Imam Hussain जिन्होंने Karbala में दी थी कुर्बानी

गुरुवार,अक्टूबर 15, 2020
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यह समझ लेना जरूरी होगा कि इमाम हुसैन कौन थे और उन्हें क्यों शहीद किया गया। मजहबे इस्लाम (इस्लाम धर्म) के प्रवर्तक और पैगंबर हजरत मोहम्मद (सल्लाहलाहु अलैहि व सल्लम) के नवासे थे इमाम हुसैन।
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चांद दिखने पर 10 दिवसीय मुहर्रम (मोहर्रम) की शुरुआत 21 अगस्त या 22 अगस्त से हो सकती है। इसी आधार पर यह 29 या 31 अगस्त तक मनाया जाएगा।
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इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, वर्ष का पहला माह मुहर्रम मास होता है। इसे गम का महीना भी कहते हैं। इस बार यौमे-ए-आशुरा 29 या 30 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा। यहां पढ़ें इमाम हुसैन की दिलेरी की दास्तान
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मुहर्रम के दिन पैगंबर हज़रत मोहम्मद के नाती हज़रत इमाम हुसैन एक धर्मयुद्ध में शहीद हुए थे।
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इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत के गम में मनाया जाने वाला मुहर्रम पर्व चांद नजर आने के साथ ही 21 या 22 अगस्त 2020 से शुरू होगा।
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ईद-उल-जुहा अर्थात् बकरीद मुसलमानों का प्रमुख त्योहार है। इस दिन मुस्लिम बहुल क्षेत्र के बाजारों की रौनक बढ़ जाती है। बकरीद पर खरीददार बकरे, नए कपड़े, खजूर और सेवईयां आदि खरीदते हैं...
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ईद-उल-अजहा को कई नामों से जाना जाता है। ईदे-अजहा को नमकीन ईद भी कहा जाता है। यह मुस्लिम भाइयों का महत्वपूर्ण त्योहार है।
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ईद-उल-अजहा के इस्लामी माह को कुर्बानी का महीना भी कहते हैं। यह उस माह की 10 तारीख को मनाया जाता है, जो 3 दिनों तक जारी रहता है। इसमें इस्लाम धर्म के अनुयायी जानवरों की कुर्बानी देते हैं।
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इब्रा‍हीम अलैय सलाम एक पैगंबर गुजरे हैं, जिन्हें ख्वाब में अल्लाह का हुक्म हुआ कि वे अपने प्यारे बेटे इस्माईल (जो बाद में पैगंबर हुए) को अल्लाह की राह में कुर्बान कर दें।
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दुनिया भर में 31 जुलाई या फिर 1 अगस्त को बकरीद ईद मनाई जाएगी। हालांकि भारत में ईद पर चांद के दीदार होने के बाद 1 अगस्त को मनाए जाने की उम्मीद है।
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हजरत अली अ. की शहादत 21 रमजान (माहे रमजान) सन् 40 हिजरी को इराक के कूफा शहर में हुई थी। उन्हें सुबह की नमाज में अब्दुर्रहमान इब्ने मुलजिम ने तब शहीद किया जब मौला नमाज की पहली रकअत का सजदा कर रहे थे।
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इस्लाम धर्म के अंतिम पैगम्बर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने 1400 साल पहले ही लोगों को महामारी से बचने के तरीके बता दिए थे।
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हजरत मोहम्मद साहब को अल्लाह ने एक अवतार के रूप में पृथ्वी पर भेजा था, क्योंकि उस समय अरब के लोगों के हालात बहुत खराब हो गए थे।
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पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्ल. को बचपन में ही देखकर लोग कहते, यह बच्चा एक महान आदमी बनेगा
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पैगम्बरे- इस्लाम हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक और सौहार्द के संदेशवाहक थे। इं
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हजरत मोहम्मद साहब का जन्म मक्का (सऊदी अरब) में हुआ था। उनके वालिद साहब का नाम अबदुल्ला बिन अब्दुल मुतलिब था और वालेदा का नाम आमेना था।
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ईद-ए-मिलादुन्नबी : पैगम्बर साहब हजरत मुहम्मद सल्ल. का जन्म मक्का शहर में 571 ईसवी को हुआ था। इसी की याद में ईद मिलादुन्नबी का पर्व मनाया जाता है।
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10 सितंबर 2019, मंगलवार को मोहर्रम (मुहर्रम) मनाया जा रहा है।इसके लिए जगह-जगह खूबसूरत ताजिए बनकर तैयार हैं। लेकिन क्या आप इसका इतिहास जानते हैं कि कब से शुरू हुई ताजिए की परंपरा, आइए जानें-
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इमाम हुसैन (रअ) दरअसल इंसानियत के तरफदार और इंसाफ के पैरोकार थे। मोहर्रम माह की दसवीं तारीख जिसे यौमे आशुरा कहा जाता है, इमाम हुसैन की (रअ) शहादत का दिवस है। य
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