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इबादत, इनाम और दुआओं की रात 'शबे कद्र', जानिए 10 खास बातें

सोमवार,मई 10, 2021
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हजरत अली का जन्म मक्का शहर में हुआ था। वे शिया मुस्लिम समुदाय के पहले इमाम थे। वहीं हजरत मोहम्मद पैगंबर के बाद सुन्नी मुसलमानों के चौथे खलीफा भी थे।
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इस्लामिक कैलेंडर को हिजरी साल के नाम से जाना जाता है। हिजरी सन की शुरुआत मोहर्रम माह के पहले दिन से होती है। इसकी शुरुआत 622 ईस्वी में हुई थी। हजरत मोहम्मद ने जब मक्का से निकलकर मदीना में बस गए तो इसे हिजरत कहा गया। इसी से हिज्र बना और जिस दिन वो ...
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होली के बाद से त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है। विभिन्न तरह के त्योहार एक के बाद एक आने लगते हैं। हालांकि अधिक गर्मी होने पर भी त्योहार का सिलसिला जारी रहता है।
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रमजान-उल-मुबारक इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है। इस माह को अरबी में माह-ए-सियाम भी कहते हैं। यह रहमतों वाला, बरकतों वाला महीना है,
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सोमवार को चांद नहीं दिखा अत: 14 अप्रैल से रमजान (Ramadan 2021) का पाक महीना शुरू होगा। कोरोना संकट के इस दौर में रमजान की रौनक बाजारों में दिखाई नहीं देगी।
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मुस्लिम कैलेंडर के अनुसार शाबान महीने की 14 वीं तारीख और 15वीं तारीख के मध्य रात को शब-ए-बारात का त्योहार मनाया जाता है।
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हजरत अली का जन्म मक्का शहर में हुआ था। वे शिया मुस्लिम समुदाय के पहले इमाम थे। वहीं हजरत मोहम्मद पैगंबर के बाद सुन्नी मुसलमानों के चौथे खलीफा भी थे।
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कुरान, इस्लाम और मुसलमान

मंगलवार,दिसंबर 1, 2020
इस्लाम मजहब की उत्पत्ति पांचवीं सदी के उत्तरार्ध में हुई। इसके संस्थापक हजरत मुहम्मद स.व. हैं। कुरआन या कुरान ए पाक इस मजहब का पवित्र ग्रंथ है। इस्लाम को मानने वालों को मुसलमान व मुस्लिम कहा जाता है। पूरी दुनिया में 1.5 अरब से अधिक मुसलमान हैं। आओ ...
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यजीद जानता था कि खिलाफत पर इमाम हुसैन का हक है क्योंकि लोगों ने ही इमाम हुसैन के पक्ष में राय दी थी। यजीद के आतंक की वजह से लोग चुप थे। इमाम हुसैन चूंकि इंसाफ के पैरोकार और इंसानियत के तरफदार थे, इसलिए उन्होंने यजीद की बैअत नहीं की।
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यह समझ लेना जरूरी होगा कि इमाम हुसैन कौन थे और उन्हें क्यों शहीद किया गया। मजहबे इस्लाम (इस्लाम धर्म) के प्रवर्तक और पैगंबर हजरत मोहम्मद (सल्लाहलाहु अलैहि व सल्लम) के नवासे थे इमाम हुसैन।
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चांद दिखने पर 10 दिवसीय मुहर्रम (मोहर्रम) की शुरुआत 21 अगस्त या 22 अगस्त से हो सकती है। इसी आधार पर यह 29 या 31 अगस्त तक मनाया जाएगा।
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इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, वर्ष का पहला माह मुहर्रम मास होता है। इसे गम का महीना भी कहते हैं। इस बार यौमे-ए-आशुरा 29 या 30 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा। यहां पढ़ें इमाम हुसैन की दिलेरी की दास्तान
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मुहर्रम के दिन पैगंबर हज़रत मोहम्मद के नाती हज़रत इमाम हुसैन एक धर्मयुद्ध में शहीद हुए थे।
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इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत के गम में मनाया जाने वाला मुहर्रम पर्व चांद नजर आने के साथ ही 21 या 22 अगस्त 2020 से शुरू होगा।
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ईद-उल-जुहा अर्थात् बकरीद मुसलमानों का प्रमुख त्योहार है। इस दिन मुस्लिम बहुल क्षेत्र के बाजारों की रौनक बढ़ जाती है। बकरीद पर खरीददार बकरे, नए कपड़े, खजूर और सेवईयां आदि खरीदते हैं...
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ईद-उल-अजहा को कई नामों से जाना जाता है। ईदे-अजहा को नमकीन ईद भी कहा जाता है। यह मुस्लिम भाइयों का महत्वपूर्ण त्योहार है।
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ईद-उल-अजहा के इस्लामी माह को कुर्बानी का महीना भी कहते हैं। यह उस माह की 10 तारीख को मनाया जाता है, जो 3 दिनों तक जारी रहता है। इसमें इस्लाम धर्म के अनुयायी जानवरों की कुर्बानी देते हैं।
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इब्रा‍हीम अलैय सलाम एक पैगंबर गुजरे हैं, जिन्हें ख्वाब में अल्लाह का हुक्म हुआ कि वे अपने प्यारे बेटे इस्माईल (जो बाद में पैगंबर हुए) को अल्लाह की राह में कुर्बान कर दें।
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दुनिया भर में 31 जुलाई या फिर 1 अगस्त को बकरीद ईद मनाई जाएगी। हालांकि भारत में ईद पर चांद के दीदार होने के बाद 1 अगस्त को मनाए जाने की उम्मीद है।
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