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जानिए ईदुज्जुहा का महत्व, कोरोना काल में ऐसे मनाएं बकरीद, रहें सुरक्षित

शुक्रवार,जुलाई 31, 2020
Bakrid 2020
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ईद-उल-अजहा को कई नामों से जाना जाता है। ईदे-अजहा को नमकीन ईद भी कहा जाता है। यह मुस्लिम भाइयों का महत्वपूर्ण त्योहार है।
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ईद-उल-अजहा के इस्लामी माह को कुर्बानी का महीना भी कहते हैं। यह उस माह की 10 तारीख को मनाया जाता है, जो 3 दिनों तक जारी रहता है। इसमें इस्लाम धर्म के अनुयायी जानवरों की कुर्बानी देते हैं।
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इब्रा‍हीम अलैय सलाम एक पैगंबर गुजरे हैं, जिन्हें ख्वाब में अल्लाह का हुक्म हुआ कि वे अपने प्यारे बेटे इस्माईल (जो बाद में पैगंबर हुए) को अल्लाह की राह में कुर्बान कर दें।
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दुनिया भर में 31 जुलाई या फिर 1 अगस्त को बकरीद ईद मनाई जाएगी। हालांकि भारत में ईद पर चांद के दीदार होने के बाद 1 अगस्त को मनाए जाने की उम्मीद है।
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हजरत अली अ. की शहादत 21 रमजान (माहे रमजान) सन् 40 हिजरी को इराक के कूफा शहर में हुई थी। उन्हें सुबह की नमाज में अब्दुर्रहमान इब्ने मुलजिम ने तब शहीद किया जब मौला नमाज की पहली रकअत का सजदा कर रहे थे।
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इस्लाम धर्म के अंतिम पैगम्बर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने 1400 साल पहले ही लोगों को महामारी से बचने के तरीके बता दिए थे।
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हजरत मोहम्मद साहब को अल्लाह ने एक अवतार के रूप में पृथ्वी पर भेजा था, क्योंकि उस समय अरब के लोगों के हालात बहुत खराब हो गए थे।
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पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्ल. को बचपन में ही देखकर लोग कहते, यह बच्चा एक महान आदमी बनेगा
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पैगम्बरे- इस्लाम हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक और सौहार्द के संदेशवाहक थे। इं
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हजरत मोहम्मद साहब का जन्म मक्का (सऊदी अरब) में हुआ था। उनके वालिद साहब का नाम अबदुल्ला बिन अब्दुल मुतलिब था और वालेदा का नाम आमेना था।
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ईद-ए-मिलादुन्नबी : पैगम्बर साहब हजरत मुहम्मद सल्ल. का जन्म मक्का शहर में 571 ईसवी को हुआ था। इसी की याद में ईद मिलादुन्नबी का पर्व मनाया जाता है।
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10 सितंबर 2019, मंगलवार को मोहर्रम (मुहर्रम) मनाया जा रहा है।इसके लिए जगह-जगह खूबसूरत ताजिए बनकर तैयार हैं। लेकिन क्या आप इसका इतिहास जानते हैं कि कब से शुरू हुई ताजिए की परंपरा, आइए जानें-
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इमाम हुसैन (रअ) दरअसल इंसानियत के तरफदार और इंसाफ के पैरोकार थे। मोहर्रम माह की दसवीं तारीख जिसे यौमे आशुरा कहा जाता है, इमाम हुसैन की (रअ) शहादत का दिवस है। य
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कर्बला कहां है, क्या है इसकी कहानी- इराक की राजधानी बगदाद से 100 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में एक छोटा-सा कस्बा है- कर्बला।
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10 सितंबर 2019, मंगलवार को मुहर्रम मनाया जा रहा है। आइए जानें इन 10 बातों से यौमे आशुरा की अहमियत
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पैगंबर मुहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन एवं उनके साथियों की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है।
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पैगंबर मुहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन एवं उनके साथियों की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है। वर्ष 2019 में मुहर्रम का महीना 31 अगस्त से शुरू होगा और 'अशुरा' यानी मुहर्रम का मुख्य दिन 10 सितंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा।
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बकरीद या ईद उल अजहा पर कुर्बानी दी जाती है। यह एक जरिया है जिससे बंदा अल्लाह की रजा हासिल करता है। बेशक अल्लाह को कुर्बानी का गोश्त नहीं पहुंचता है
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इस्लामी साल में दो ईदों में से एक है बकरीद। ईद-उल-जुहा और ई-उल-फितर। ईद-उल-फिरत को मीठी ईद भी कहा जाता है। इसे रमजान को समाप्त करते हुए मनाया जाता है।
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