इस्लाम में मुस्लिमों के लिए शब-ए-बरात का क्या है महत्व?
Shab-e-Barat: शब-ए-बरात (Shab-e-Barat) इस्लामिक कैलेंडर के आठवें महीने शाबान (Sha'ban) की 15वीं तारीख की रात को मनाई जाती है। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इसे बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण रात माना गया है। साल 2026 में, शब-ए-बरात 2 फरवरी 2026 की शाम से शुरू होकर 3 फरवरी 2026 की सुबह तक मनाई जा रही है।
शब-ए-बरात का अर्थ
शब: फारसी में इसका अर्थ है 'रात'।
बरात: इसका अर्थ है 'बरी होना' या 'मुक्ति/क्षमा'।
इसे 'नजात की रात' (छुटकारे की रात) भी कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों को गुनाहों से माफी देता है।
इस रात का धार्मिक महत्व
तकदीर का फैसला: ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस रात अल्लाह आने वाले एक साल के लिए सभी इंसानों का 'भाग्य' (मुकद्दर) तय करता है। इसमें जीवन, मृत्यु और जीविका (रिज्क) का लेखा-जोखा तैयार होता है।
क्षमा की रात: मुस्लिम समुदाय के लोग इस रात अल्लाह की इबादत करते हैं, नफ़्ल नमाज़ें पढ़ते हैं और अपने गुनाहों के लिए तौबा (क्षमा याचना) करते हैं।
बुजुर्गों की याद: इस रात लोग कब्रिस्तान जाकर अपने उन परिजनों और बुजुर्गों की मगफिरत (शांति) के लिए दुआ करते हैं जो इस दुनिया से जा चुके हैं।
प्रमुख परंपराएं
इबादत और दुआ: लोग पूरी रात जागकर कुरान की तिलावत करते हैं और अल्लाह से अपने और पूरी इंसानियत के लिए दुआ मांगते हैं।
रोजा: शब-ए-बरात के अगले दिन (यानी 15 शाबान को) रोजा रखने की भी परंपरा है।
मिठाई और हलवा: इस मौके पर घरों में सूजी या चने की दाल का हलवा और अन्य पकवान बनाए जाते हैं, जिन्हें पड़ोसियों और गरीबों में बांटा जाता है।
रोशनी: मस्जिदों और घरों को रोशनी से सजाया जाता है।
विशेष संयोग
आज पूरी दुनिया में मुस्लिम समुदाय इस रात की इबादत में लगा होगा।
एक जरूरी बात: विद्वानों के अनुसार यह इबादत की रात है, इसलिए शांति और दुआओं पर ध्यान देना अधिक बेहतर माना जाता है।