अल्लाह तआला के 99 नाम

संकलन : श्रीमती अनीसा बेगम

अल्लाह के पवित्र नि‍न्यानवें ना

1. अल्लाह

यह अल्लाह का जाती नाम है, जो कि अल्लाह के नामों में सर्वप्रथम आया है। बाकी सारे नाम सिफ़ाती (गुणात्मक) हैं।

जो व्यक्ति 1000 बार 'या अल्लाह' पढ़ेगा मन की सारी शंकाएँ दूर हो जाएँगी और विश्वास की शक्ति पाएगा। जो ला-इलाज रोगी बिला गिनती 'या अल्लाह' पढ़े और दुआ करे तो इन्शाअल्लाह ठीक होगा। जो व्यक्ति जुमे के दिन नमाज़ से पहले पाक होकर एकांत में दो सौ बार पढ़े उस की कठिनाई दूर हो।

2. अर्‌-ऱहमान (बहुत दया करने वाला)
जो व्यक्ति रोजाना हर के बाद 100 बार 'या ऱहमान' पढ़ेगा, उसके दिल से हर प्रकार की सख़्ती और सुस्ती दूर हो जाएगी, इन्शाअल्लाह।

3. अर्‌-ऱहीम (बहुत कृपाकरने वाला)जो व्यक्ति रोजाना हर नमाज के बाद 100 बार 'या ऱहीम' पढ़ेगा, तमाम सांसारिक कष्टों से बचा रहेगा और सारी मख़लूक़ (सृष्टि) उस पर मेहरबान होगी इन्शाअल्लाह।

4. अल्‌-मलिक (सबका स्वामी)
जो व्यक्ति रोज़ाना फ़ज्र (सुबह की) नमाज के बाद या मलिक बे-गिनती मात्रा में पढ़ेगा अल्लाह ताला उसे ग़नी (धनी) बना देंगे।
5. अल्‌-क़ुद्दूस (बहुत पवित्र)
जो व्यक्ति रोज़ाना दोपहर से पहले या क़ुद्दूस बेहिसाब पढ़ेगा, उसका दिल विकारों से पाक हो जाएगा।

6. अस्‌-सलाम (निष्कलंक/बे-ऐब)
जो व्यक्ति बेहिसाब या सलाम पढ़ता रहेगा तमाम आफतों (कष्टों) से बचा रहेगा। जो व्यक्ति 115 बार पढ़कर बीमार पर फूँकेगा अल्लाह त'आला उसे ठीक कर देंगे। अगर मरीज के सरहाने बैठकर दोनों हाथ उठाकर 39 बार तेज आवाज से पढ़े कि मरीज सुन ले, इन्शा अल्लाह वह मरीज ठीक होगा।
और अल्लाह तुम्हारे छिपे हुए और सामने दिखते हुए सब हाल जानते हैं।

7. अल-मु मिन (ईमान देने वाला)
जो व्यक्ति किसी भय के समय 630 बार या मु मिन पढ़े, वह हर प्रकार के भय व हानि से बचा रहेगा। जो व्यक्ति इस नाम को लिखकर अपने पास रखे या बेहिसाब पढ़े वह पूर्णतः अल्लाह की शरण में रहेगा।
8. अल्‌-मुहैमिन (चौकसी करने वाला)
जो व्यक्ति स्नान करके दो रकत नमाज़ पढ़े और शुद्ध मन से 100 बार या मुहैमिन पढ़ेगा, अल्लाह त'आला उसको आंतरिक और बाहरी रूप से पाक कर देंगे। जो व्यक्ति 115 बार पढ़े इन्शा अल्लाह उस पर छिपी हुई चीजें खुल जाएँगी।

9. अल्‌-'अज़ीज़ (अविजयी)
जो व्यक्ति 40 दिन तक 40 बार या अज़ीज़ पढ़ेगा अल्लाह त'आला उसको इज्जतदार बना देंगे। जो व्यक्ति फ़ज्र की नमाज़ के बाद 41 बार पढ़ता रहे वह इन्शा अल्लाह किसी का आश्रित न हो और अनादर के बाद आदर पाए।
10. अल्‌-जब्बार (सबसे शक्तिमान)
जो व्यक्ति रोजाना सुबह-शाम 226 बार या जब्बार पढ़ेगा इन्शा अल्लाह ज़ालिमों के ज़ुल्म से बचा रहेगा और जो व्यक्ति चाँदी की अँगूठी पर यह नाम खुदवा कर पहने उसका भय व सम्मान लोगों के दिलों में पैदा होगा।

और वे ही अल्लाह त'आला अपने बन्दों के ऊपर शक्तिमान और महान हैं और वे ही बड़े बुद्धिमान हैं तथा पूरी जानकारी रखते हैं।
11. अल्‌-मु-त-कब्बिर (बड़ाई और बुज़ुर्गी वाला)
जो व्यक्ति बिला हिसाब या मु-त कब्बिर पढ़ेगा अल्लाह त'आला उसे इज्जत व बड़ाई देंगे और यदि हर काम के शुरू में यह नाम बेहिसाब पढ़े तो इन्शा अल्लाह उसमें कामयाब होगा।

12. अल्‌-ख़ालिक (पैदा करने वाला)
जो व्यक्ति सात रोज तक बराबर 100 बार या ख़ालिक पढ़ेगा इन्शा अल्लाह तमाम आफतों (आपदाओं) से बचा रहेगा। जो व्यक्ति हमेशा पढ़ता रहे तो अल्लाह पाक एक फ़रिश्ता पैदा कर देते हैं, जो उसकी ओर से इबादत करता है और उसका मुख प्रकाशमान रहता है।
13. अल्‌-बारी (जान डालने वाला)
अगर बाँझ औरत सात रोजे रखे और पानी से अफ़्तार करने के बाद 21 बार अल्‌-बारि-उल-मु़सव्विर पढ़े तो इन्शा अल्लाह उसे पुत्र नसीब हो।

14. अल्‌-मु़सव्विर (आकार देने वाला)
देखें अल्‌-बारी।

15. अल्‌-ग़फ़्फ़ार (क्षमा करने वाला)जो व्यक्ति जुमे की नमाज के बाद 100 बार या ़ग़फ़्फ़ार पढ़ा करेगा उस पर मग़फ़िरत (मोक्ष) के निशान ज़ाहिर होने लगेंगे। जो व्यक्ति अस्र की नमाज़ के बाद रोज़ाना या ग़फ़्फ़ारो इग़फ़िरली पढ़ेगा अल्लाह त'आला उसे बख़्शे हुए (मोक्ष प्रदान किए हुए) लोगों में दाख़िल करेंगे।

16. अल्‌-क़ह्‌हार (सबको अपने वश में रखने वाला)
जो व्यक्ति संसार के मोह में जकड़ा हो बेहिसाब या क़ह्‌हार पढ़े तो संसार का मोह उसके दिल से जाता रहे और अल्लाह की मुहब्बद पैदा हो जाए। शत्रुओं पर विजय पाए। अगर चीनी के बरतन पर लिखकर ऐसे व्यक्ति को पिलाया जाए, जो कि जादू के कारण औरत के अयोग्य हो तो जादू दूर हो जाए। इन्शा अल्लाह।
और अल्लाह को लोगों के सब कामों का पूरा ज्ञान हैं।

17. अल्‌-वह्‌हाब (सब-कुछ देने वाला)
जो व्यक्ति गरीबी का शिकार हो वह बेहिसाब या वह्‌हाब पढ़ा करे या लिखकर अपने पास रखे या चाश्त की नमाज़ के आख़िरी सजदे में 40 बार पढ़ा करे तो अल्लाह त'आला उसकी गरीबी को अजूबे के तौर से दूर कर देंगे। यदि कोई विशेष इच्छा हो तो घर या के सहन में तीन बार सज्दा करके हाथ उठाए और 100 बार पढ़े, इन्शा अल्लाह इच्छा पूरी हो तथा शत्रु के डर से सुखी हो।
18. अर्‌-रज़्ज़ाक़ (रोज़ी देने वाला)
जो व्यक्ति सुबह की नमाज़ (फ़ज्र) से पहले अपने मकान के चारों कोनों से दस-दस बार या रज़्ज़ाक़ पढ़कर फूँकेगा अल्लाह त'आला उस पर रिज़्क़ के दरवाजे खोल देंगे और बीमारी व गरीबी उसके घर में हरगिज न आएगी। दाहिने कोने से शुरू करें और मुँह क़िबले की तरफ रखें।

19. अल्‌-फ़त्ता़ह (कठिनाई दूर करने वाला)जो व्यक्ति फ़ज्र की नमाज़ के बाद दोनों हाथ सीने पर रखकर 71 बार या फ़त्ता़ह पढ़ा करेगा इन्शा अल्लाह उसका दिल नूरे-ईमान से जगमगा जाएगा। सारे काम व अन्न प्राप्ति आसान हो जाए।

20. अल्‌-'अलीम (बहुत ज्ञानी)
जो व्यक्ति बेहिसाब या 'अलीम पढ़ा करे अल्लाह त'आला उस पर इल्मो मग़फ़िरत (ज्ञान व मोक्ष) के दरवाजे खोल देंगे।
21. अल्‌-क़ाबिध (रोज़ी बन्द करने वाला)
जो व्यक्ति रोटी के चार लुक्मों पर अल्‌-काबिध लिखकर 40 दिन तक खाएगा, भूख, प्यास, घाव व दर्द आदि की तकलीफ से इन्शा अल्लाह बचा रहेगा।

22. अल्‌-बासि़त (रोज़ी खोलने वाला)
जो व्यक्ति चाश्त की नमाज़ के बाद आसमान की तरफ हाथ उठाकर दस बार या बासि़त पढ़ेगा और मुँह पर हाथ फेरेगा अल्लाह त'आला उसे गनी (धनी) बना देंगे और कभी किसी का मोहताज न होगा।
23. अल्‌-ख़ाफ़िध (छोटा करने वाला)
जो व्यक्ति रोजाना 500 बार या ख़ाफ़िध पढ़ा करे अल्लाह त'आला उसकी इच्छाएँ पूरी और कठिनाइयाँ दूर कर देंगे। जो व्यक्ति तीन रोज़े रखे और चौथे रोज़ एक जगह बैठकर 70 बार पढ़े तो इन्शा अल्लाह दुश्मन पर विजयी हो।

24. अर्‌-राफ़े' (ऊँचा करने वाला)
जो व्यक्ति हर महीने की चौदहवीं रात को आधी रात में 100 बार या राफ़े' पढ़े तो अल्लाह त'आला उसे मख़्लूक़ (सृष्टि) से बेनियाज़ (अनाश्रित) और धनी कर देंगे। यदि 70 बार रोज पढ़े तो जालिमों से सुरक्षा पाए। इन्शा अल्लाह।
25. अल्‌-मोइज़्ज़ (इज़्ज़त देने वाला)
जो व्यक्ति पीर या जुमे के दिन मग़रिब के बाद 40 बार या मोइज़्ज़ पढ़ा करे अल्लाह त'आला उसको इन्शा अल्लाह लोगों में इज़्ज़तदार बना देंगे।

26. अल्‌-मुज़िल्ल (अपमानित करने वाला)
जो व्यक्ति 75 बार या मुज़िल्ल पढ़कर सजदे में सर रखकर दुआ करेगा अल्लाह त'आला उसको हासिदों, ज़ालिमों और दुश्मनों की शरारत से बचाए रखेंगे। यदि कोई खास दुश्मन हो तो सजदे में उसका नाम लेकर कि 'ऐ अल्लाह तू उस ज़ालिम या दुश्मन से बचा' दुआ करें तो दुआ इन्शा अल्लाह क़बूल होगी। जिस का हक़ दूसरे के ज़िम्मे आता हो और वह उसमें टालमटोल करता हो, बेतादाद पढ़ा करे तो वह उस का हक़ अदा कर दे। इन्शा अल्लाह।
निःसंदेह आपका रब बड़ा बनाने वाला और बड़ा ज्ञानी है।

27. अस्‌-समी' (सब-कुछ सुनने वाला)
जो व्यक्ति जुमेरात के दिन चाश्त की नमाज़ के बाद 500 बार या 50 बार या समी' पढ़ेगा इन्शा अल्लाह उसकी दुआएँ़ल क़ुबूल होंगी। बीच में किसी से बात न करें। जो व्यक्ति जुमेरात के दिन फ़ज्र की सुन्नतों और फ़रज़ों के बीच 100 बार पढ़ेगा अल्लाह त'आला उसे विशेष स्थान देंगे।
अल्लाह से छिपी नहीं है कोई वस्तु जमीन में और न आकाश में।

28. अल्‌-ब़सीर (सब-कुछ देखने वाला)
जो व्यक्ति जुमे की नमाज़ के बाद 100 बार या ब़सीर पढ़ा करेगा अल्लाह त'आला उसकी निगाह और दिल में नूर पैदा कर देंगे और नेक कामों की तौफ़ीक़ होगी।

29. अल्‌-ह़कम (निर्णय करने वाला)जो व्यक्ति आखिर रात में 99 बार बा वज़ू या ह़कम पढ़ा करेगा अल्लाह त'आला उसके दिल में गुप्त रहस्य व नूर-भर देंगे और जो व्यक्ति जुमे की रात में या ह़कम इतना पढ़े कि बेहाल हो जाए तो अल्लाह त'आला उसके दिल को कश्फ़ो-इल्हाम (ख़ुदा के छिपे राज़ को जान लेने) से नवाज़ेंगे।

उसके अतिरिक्त किसी अन्य की इबादत (भक्ति) नहीं वह अतिमहान है अति बुद्धिमान।
30. अल्‌-'अद्ल (इंसाफ करने वाला)
जो व्यक्ति जुमे के दिन या रात में रोटी के बीस या तीस टुकड़ों पर अल्‌-'अद्ल लिखकर खाएगा अल्लाह त'आला सृष्टि (मख़्लूक़) को उसके आधीन कर देंगे।



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