मनमोहन चीनी राष्ट्रप‍ति से मिले

सप्पोरो (जापान)| भाषा|
भारत ने विश्वास जताया कि अमेरिका के साथ परमाणु करार को प्रभावी बनाने की प्रक्रिया के तहत परमाणु कारोबार की छूट के लिए जब भारत का मामला एनएसजी के समक्ष जाएगा तो चीन की तरफ से कोई परेशानी नहीं खड़ी होगी।

जी-8 शिखर सम्मेलन से इतर यहाँ मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह और चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ के बीच हुई बैठक के बाद भारतीय पक्ष की यह धारणा बनी।

बैठक के बारे में विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने बताया कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ भारत के असैनिक परमाणु सहयोग समझौते का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया जैसा कि प्रधानमंत्री ने कल उल्लेख करते हुए अनुमान व्यक्त किया था कि इस मुद्दे पर हमारे बीच कोई परेशानी नहीं होगी। चीनी पक्ष ने परमाणु ऊर्जा के असैन्य इस्तेमाल के मामले में भारत के साथ सहयोग की इच्छा जताई।

इस मुद्दे पर एक बार फिर सवाल पूछे जाने पर मेनन ने कहा कि उनकी धारणा है कि यह कठिन मुद्दा नहीं होगा। चीनी पक्ष ने परमाणु ऊर्जा के असैन्य इस्तेमाल के मामले में भारत के साथ सहयोग में दिलचस्पी जताई है।
यह पूछे जाने पर कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से निर्बाध छूट हासिल करना कितना आसान होगा तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एनएसजी सदस्यों से बातचीत कर रहे हैं और हमारी धारणा है कि सदस्य हमसे सहयोग करने के मामले में काफी सकारात्मक हैं। हमारे लिए यह मानने का कोई कारण नहीं है कि एनएसजी क्यों नहीं हमें निर्बाध और बिना किसी शर्त के छूट देगा। (भाषा)



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