'न बोलने' का जमाना

- एमके सांघी

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प्रश्न : दद्दू, पहले समाज की नजर जन साधारण की गलतियों पर होती थी और समाज के वरिष्ठजनों की टोका-टोकी से गलत बातों पर लगाम भी कसी जाती थी। अब ऐसा क्यों नहीं होता?

उत्तर : क्योंकि आजकल बड़े-बुजुर्ग जैसे ही घर के बाहर निकलते हैं, वैसे ही घर के सभी युवा उन्हें ताकीद कर देते हैं कि बाऊजी (या कोई अन्य संबोधन) बात चाहे कितनी ही सही-गलत क्यों न हो पर किसी दूसरे के पचड़े में मत पड़ना क्योंकि आजकल किसी को कुछ बोलने का जमाना नहीं रहा।

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