संजीव कुमार : जन्‍मदिवस पर विशेष

समय जिन्हें मिटा न सका

- संदीप पाण्‍डे
ये वह समय था, जब हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में स्टारडम की शुरुआत हो चुकी थी। राजेश खन्ना पहले सुपर स्टार घोषित हो चुके थे। अमिताभ बच्चन ‘एंग्री यंग मै’ के रूप में आम आदमी के आक्रोश को व्यक्त कर रहे थे और इन दोनों से पहले देव आनंद हिन्दी सिनेमा के पहले स्टाइल गुरु बन चुके थे। ऐसे संक्रमण काल में संजीव कुमार इन सभी से अप्रभावित, चुपचाप अपना एक अलग मुकाम बना रहे थे। वे व्यावसायिक सिनेमा और ‘ऑफ द बीट’ सिनेमा का भेद तो मिटा ही रहे थे, साथ-ही-साथ उनका अपना अलग दर्शक वर्ग भी तैयार हो रहा था, जो उनके मंदिर तो नहीं बना रहा था, लेकिन हमेशा उनकी विविध, चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं का इंतजार करता था।



और भी पढ़ें :