रहमान को जन्मदिन की बधाई

Rahman
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ह जनवरी 1966 को जन्मे अल्लाह रक्खा आज अपनी उम्र के 43 वर्ष पूरे कर रहे हैं। इस समय जहाँ फिल्म बुरे दौर से गुजर रहा है, बेसुरे गायक और कानफोड़ू संगीत देने वाले संगीतकार चारों ओर शोर मचा रहे हैं, ए.आर. रहमान अपने मधुरतम संगीत से कानों को सुकून दे रहे हैं।

वर्ष 2008 में संगीत के मामले में बॉलीवुड खाली हाथ रहा, लेकिन जिन फिल्मों को रहमान ने अपने संगीत से सजाया उनके सारे गानों को लोगों ने हाथोहाथ लिया। ‘जोधा अकबर’ में रहमान ने गुजरे समय का मंत्र-मुग्ध कर देने वाला संगीत रचा। ‘ख्वाजा मेरे ख्वाजा’ उनकी बेहतरीन रचना कही जा सकती है।

‘जाने तू या जाने ना’ में रहमान ने युवा वर्ग को ध्यान में रखकर धुनें बनाईं, लेकिन युवा वर्ग के नाम पर उन्होंने सिर्फ शोर पैदा नहीं किया। पार्टी साँग भी मधुर बनाए जा सकते हैं ये ‘पप्पू कांट डांस साला’ से रहमान ने साबित किया।

इसी फिल्म के ‘अदिति’ गाने ने भी लोकप्रियता ‍हासिल की। ‘युवराज’ भले ही फ्लॉप हो गई, लेकिन रहमान द्वारा संगीतबद्ध किए गए गाने हिट हुए। ‘गजनी’ के गाने भी इस समय धूम मचाए हुए हैं।

रहमान के लिए संगीत व्यवसाय नहीं वरन कला है। वे जब तक संतुष्ट नहीं होते अपनी धुन निर्माता को नहीं देते। समय की बेड़ियों में वे अपने काम को कैद नहीं करते। कई बार उन्हें एक धुन बनाने में महीनों लग जाते हैं, इसलिए वे उसी निर्माता के साथ काम करना पसंद करते हैं, जो उन्हें पर्याप्त समय दे।

रहमान को रात की खामोशी में काम करना पसंद है इसलिए निर्माता को यह शर्त भी माननी होती है। रहमान ने ज्यादातर माधुर्य सुबह होने के पहले रचा है। दिन का शोर-शराबा उन्हें बेचैन कर देता है।

समय ताम्रकर|
इस पर बधाई देते हुए हम कामना करें कि वे वर्षों तक बेहतरीन संगीत देते हुए संगीत का माधुर्य कायम रखेंगे।



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