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कौन थे बाबा साहेब अंबेडकर के गुरु?

Written By WD Feature Desk
Updated: सोमवार, 13 अप्रैल 2026 (09:22 IST)
ambedakar ke guru: भारतीय संविधान की नींव रखने वाले डॉ. अंबेडकर या बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की आज जयंती मनाई जा रही है। उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को इंदौर (मध्यप्रदेश) के महू में रामजी मालोजी सकपाल तथा भीमाबाई, जो एक घरेलू महिला थीं के यहां चौदहवीं संतान के रूप में हुआ था। वे संविधान निर्माता और भारत के पहले कानून मंत्री थे। डॉ. अंबेडकर के पास करीब 32 डिग्रियां थीं और वे भारत के सबसे महान विद्वानों में से एक हैं।ALSO READ: Ambedkar quotes: बाबासाहेब अंबेडकर के 10 अमूल्य विचार, जो आज भी दुनिया बदल सकते हैं
 
आइए अब जानते हैं बाबा साहेब अंबेडकर के गुरु कौन थे: आपको बता दें कि डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म के भिक्षु प्रज्ञानंद, कृष्ण केशव अंबेडकर तथा महात्मा ज्योतिबा फुले को अपना गुरु माना था। 
 
कृष्ण केशव अंबेडकर : मान्यतानुसार बाबा साहेब अंबेडकर के बचपन के गुरु कृष्ण केशव अंबेडकर थे, जो मराठी, संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं के ज्ञाता और एक महान विद्वान थे तथा उन्होंने ही अंबेडकर को इन भाषाओं का अध्ययन कराया था। वे अंबेडकर के बचपन के शिक्षक थे और उन्होंने ही अंबेडकर की प्रतिभा को पहचान कर उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया था।
 
ज्योतिबा फुले : बाबा साहेब अंबेडकर ने ज्योतिबा फुले को अपना गुरु माना था, क्योंकि ज्योतिबा फुले एक समाज सुधारक थे और दलितों और महिलाओं के अधिकारों के लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी थी। ज्योतिबा फुले ने जाति प्रथा के खिलाफ भी आंदोलन चलाया था। अत: अंबेडकर उनके विचारों से बेहद प्रभावित थे और ज्योतिबा फुले को अपना आदर्श और बौद्धिक गुरु माना था। स्वयं अंबेडकर ने भी उनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सामाजिक सुधार के लिए कार्य किए थे। 
 
भिक्षु प्रज्ञानंद : अंबेडकर ने गौतम बुद्ध से प्रेरित होकर बौद्ध धर्म को अपनाया और बुद्ध को अपना आध्यात्मिक गुरु माना, क्योंकि बुद्ध के करुणा, समानता और तर्क के सिद्धांतों ने अंबेडकर की सोच और आंदोलन को नई दिशा दी थीं। इस तरह श्रीलंका में जन्मे तथा 1942 में भारत आए बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद भी डॉ. अंबेडकर के गुरु थे, क्योंकि 14 अप्रैल, 1956 में उन्हें बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद ने नागपुर में 7 भिक्षुओं के साथ बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी। अत: अंबेडकर आजीवन बौद्ध धर्म के अनुयायी भी रहे। माना जाता है कि वह बुद्ध और उनके धम्म की अंतिम पांडुलिपि को पूर्ण करने के बाद 6 दिसंबर, 1956 को नींद में ही उनकी मृत्यु हो गई थी।
 
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