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Parshuram Jayanti Mantra : इन 3 परशुराम गायत्री मंत्र पढ़ने से मिलेगा अक्षय तृतीया का 3 गुना लाभ

Updated: गुरुवार, 2 मई 2019 (13:14 IST)
भगवान विष्णु के दशावतार में छठे अवतार भगवान परशुराम माने जाते हैं। क्रोध और दानशीलता में उनका कोई सानी नहीं है। शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता सिर्फ और सिर्फ भगवान परशुराम ही माने जाते हैं। भगवान शिव ने उन्हें मृत्युलोक के कल्याशार्थ परशु अस्त्र प्रदा‍न किया जिससे वे परशुराम कहलाए। वे परम शिवभक्त थे।
 
सहस्रार्जुन की इहलीला समाप्त कर दी। प्रायश्चित के लिए सभी तीर्थों में तपस्या की। गणेशजी को एकदंत करने वाले भी परशुराम थे। 17 बार क्षत्रियों से विहीन भूलोक को करने वाले भगवान परशुराम ही थे। दानशीलता उनकी ऐसी थी कि समस्त पृथ्‍वी ही ऋषि कश्यप को दान कर दी। उनके शिष्यत्व का लाभ दानवीर कर्ण ही ले पाए जिसे उन्होंने ब्रह्मास्त्र की दीक्षा दी।
 
भगवान परशुराम की सेवा-साधना करने वाले भक्त भूमि, धन, ज्ञान, अभीष्ट सिद्धि तथा दारिद्रय से मुक्ति, शत्रु नाश, संतान प्राप्ति, विवाह, वर्षा, वाक् सिद्धि इत्यादि पाते हैं। बालक, मनुष्य, देश-प्रदेश की रक्षा तथा महामारी इत्यादि से रक्षा कर सकते हैं।
 
परशुराम गायत्री मंत्र इस प्रकार हैं-
 
1. 'ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो राम: प्रचोदयात्।।'
 
2. 'ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्न: परशुराम: प्रचोदयात्।।'
 
3. 'ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नम:।।' इत्यादि।
 
जप-ध्यान कर दशांस हवन पायस-घृत से करें तथा जीवन की समस्त समस्याएं दूर करें।

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