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काश... ऐसा नहीं होता...

Updated: शनिवार, 30 दिसंबर 2017 (14:41 IST)
वर्ष 2017 अपने पिटारे में यादों का खजाना समेटकर विदा हो रहा है। कुछ यादें ऐसी भी हैं, जिन्हें भूलना ही बेहतर है। ऐसे में अच्छा तो यही होगा कि यादों का यह पिटारा हमेशा के लिए बंद रहे। लेकिन, हम इन घटनाओं से सबक तो ले ही सकते हैं, ताकि भविष्य में इन्हें दोहराया न जाए। आइए नजर डालते हैं इसी तरह की कुछ खास घटनाओं पर...
 
1. आठ अगस्त, 2017 को मुंबई के लोखंडवाला इलाके में एक वृद्धा का कंकाल मिला था। इस समाचार ने सबके रौंगटे खड़े कर दिए। घटना की जानकारी भी तब सामने आई जब बुजुर्ग आशा साहनी का इंजीनियर बेटा ऋतुराज विदेश से मां को देखने पहुंचा। बेटे ने एक साल पहले अपनी बूढ़ी मां से बात की थी। इस बीच, आशा की मौत कब और कैसे हो गई किसी को खबर भी नहीं लगी। अपने बुजुर्गों की उपेक्षा का सबसे बड़ा उदाहरण है यह घटना। 
 
2. हरियाणा के गुरुग्राम (गुड़गांव) में 8 सितंबर को रेयान स्कूल के 7 साल के छात्र प्रद्मुम्न की सनसनीखेज हत्या स्कूल परिसर में ही हो गई। सीबीआई जांच में जब हत्या का कारण सामने आया तो सब हिल गए। दअरसल, आरोप के मुताबिक 11वीं में पढ़ने वाले एक छात्र ने परीक्षा रुकवाने के लिए प्रद्युम्न की हत्या कर दी थी। ब्लू व्हेल गेम के चलते भी देशभर में कई विद्यार्थियों ने मौत को गले लगा लिया। ये घटनाएं उन मां-बाप के लिए चेतावनी है बच्चों के लिए सुविधाएं जुटाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।   
 
3. अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में लोगों का भरोसा एक बार फिर धर्मगुरुओं से उठा, जब सीबीआई अदालत ने स्वयंभू धर्मगुरु गुरमीत राम रहीम सिंह को यौन शोषण के दो मामले में 20 साल की सजा सुनाई। फैसले से नाराज बाबा के अंधभक्तों ने हिंसा का ऐसा तांडव रचा कि करीब तीन दर्जन लोगों की अकाल मौत हो गई। इसके बाद बाबा का जो घिनौना चेहरा सामने आया, उससे लोगों का संतों से ही विश्वास उठ गया। आध्यात्मिक विश्वविद्यालय चलाने वाले अय्याश बाबा वीरेन्द्र दीक्षित का काला चेहरा भी इसी साल उजागर हुआ। 
 
4. अगस्त माह के आसपास ही चोटी कटवा का आतंक देश के कई राज्यों में देखने को मिला। राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश होता हुआ अंधविश्वास का यह खौफ जम्मू कश्मीर तक भी पहुंच गया। चोटी कटवा की अफवाह के चलते कई लोगों से मारपीट भी हुई, जिनमें से कुछ की मौत भी हो गई। कहीं कहीं तो महिलाओं द्वारा खुद भी चोटी काटने के मामले सामने आए। हालांकि आज तक इस घटना की हकीकत से पर्दा नहीं उठ पाया। 
 
5. कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं तो बीते सालों में भी सामने आती रही हैं, लेकिन इस साल पत्थरबाज खुले तौर पर आतंकवादियों के समर्थन में आ गए। जहां कहीं भी सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ की घटनाएं होतीं, पत्थरबाज पथराव कर आतंकियों को भागने में मदद करते। इस तरह कई घटनाएं कश्मीर घाटी में हुईं। लेकिन, इस सबके बावजूद सुरक्षाबलों ने इस साल आतंकियों के कई बड़े सरगनाओं को ‍ढेर कर दिया। 
 
6. इस साल भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद भी सामने आया। विवाद के दौरान कई बार ऐसे पल भी आए जब ऐसा लगा कि दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ सकता है। लेकिन, बाद में आपसी सहमति से दोनों देशों ने अपनी सेनाएं पीछे हटा लीं। हालांकि अभी यह विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। 
 
7. हिमस्खलन की दो बड़ी घटनाओं में हमने अपने सैनिकों को खोया। पहली घटना जनवरी में हुई जब गुरेज में हिमस्खलन के कारण छह जवानों की मौत हो हुई, जबकि दिसंबर में नियंत्रण रेखा पर बर्फबारी के बाद हुई हिमस्खलन की घटना में पांच जवान लापता हो गए। 
 
8. फिल्मकार संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्‍मावती' ने इस साल नए विवाद को जन्म दिया। ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की बात पर राजस्थान समेत देश के अन्य भागों में भी राजपूत समुदाय आंदोलित हुआ। इससे फिल्म का प्रदर्शन भी लंबे समय तक के लिए टल गया। सलमान खान की फिल्म 'टाइगर जिंदा है' भी विवाद में घिरी, जब उन्होंने बाल्मिकी समुदाय को लेकर अभद्र टिप्पणी कर दी। इसके चलते कई स्थानों पर सलमान का पुतला भी फूंका गया। 
 
9. दार्जिलिंग में अलग गोरखालैंड की मांग को जून में शुरू हुए गोरखा आंदोलन ने पश्चिम बंगाल सरकार की नाक में दम कर दिया। करीब 100 दिन चले इस आंदोलन के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हुई झड़प में एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई। स्थानीय लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।  
 
10. अगस्त माह में उत्तरप्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इलाके गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 60 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई। यह जानकारी सामने आई थी कि उधारी के चलते ठेकेदार ने अस्पताल को ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं की थी। इस इलाके में दिमागी बुखार का प्रकोप ज्यादा है। दिल्ली के मैक्स अस्पताल ने जिंदा बच्चे को मृत बता दिया, वहीं फोर्टिस अस्पताल ने डेंगू पीड़ित बच्ची के इलाज के लिए 18 लाख का बिल थमा दिया। इन घटनाओं से चिकित्सा सेवाएं भी संदेह के घेरे में आईं।  
 
इन घटनाओं के अलावा तमिलनाडु, केरल एवं अन्य तटीय इलाकों में ओखी तूफान ने नुकसान पहुंचाया। कंप्यूटर वायरस रेनसमवेयर ने भी लोगों की मुसीबत बढ़ाई। आरुषि मर्डर केस में राजेश और नूपुर तलवार बरी हो गए, वहीं 2जी घोटाले में भी पूर्व केन्द्रीय मंत्री ए. राजा, कनिमोझी समेत सभी 19 आरोपियों को भी क्लीन चिट मिली। ये दोनों ही मामले अपने पीछे सवाल जरूर छोड़ गए। आखिर आरुषि का हत्यारा कौन था? और क्या 2जी घोटाला हुआ ही नहीं?
 
पाकिस्तान इस साल भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। उसने कई बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया। इन घटनाओं में हमारे कई सैनिक शहीद हुए। पाकिस्तान ने साल के अंत में वहां कैद कुलभूषण जाधव के परिजनों को मिलने की अनुमति तो दी, लेकिन उनका अपमान कर उसने बता दिया कि उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। 
 
इन दुखद घटनाओं पर तो यही कहा जा सकता है कि बीती ताहिर बिसार दे, लेकिन आगे की सुधि लेना भी उतना ही जरूरी है ताकि इस तरह की घटनाएं हों ही नहीं।

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