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ब्यूटी बढ़ाता है शीतली प्राणायाम

Updated: बुधवार, 20 मई 2026 (13:06 IST)
प्राणवायु के लिए शीतली प्राणायाम काफी महत्वपूर्ण हैं। यह शरीर को शीतलता प्रदान करता है।
 

विधि

पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। दोनों हाथों की अंगुलियों को ज्ञान मुद्रा में दोनों घुटनों पर रखें, आंखें बन्द करें। उसके बाद अपनी जिह्वा (जीभ) को नली के समान बना लें अर्थात गोल बना लें और मुंह से लम्बी गहरी श्वास आवाज के साथ भरें। जितनी देर श्वास को आसानी से रोक सकते हैं, उतनी देर श्वास रोकें, फिर धीरे-धीरे नाक से श्वास को बाहर निकाल दें। यह इस प्राणायाम का एक चक्र पूरा हुआ, कम से कम 10 चक्रों का अभ्यास करें।
 

लाभ व प्रभाव

इस प्राणायाम के अभ्यास से बल एवं सौन्दर्य बढ़ाता है। रक्त शुद्घ होता है। भूख, प्यास, ज्वर (बुखार) और तपेदिक पर विजय प्राप्त होती है। यह अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, हृदयरोग और अल्सर में रामबाण का काम करता है। चिड़चिड़ापन, बात-बात में क्रोध आना, तनाव तथा गर्म स्वभाव के लोगों के लिए विशेष लाभप्रद है।
 

सावधानी

निम्न रक्तचाप वाले, दमा की अंतिम अवस्था वाले और ज्यादा कफ वाले रोगी इस प्राणायाम का अभ्यास बिल्कुल न करें। शीतकाल में इसके अभ्यास की मनाही है।
 

विशेष

शीतकारी प्राणायाम के सारे लाभ भ्रामरी प्राणायाम में भी प्राप्त किए जा सकते हैं। शीतकारी प्राणायाम में मुंह बंद कर दंत पंक्तियों को मिलाकर मुंह से श्वास लेते हैं और नाक से ही श्वास छोड़ते हैं। प्रदूषित जगह में इस प्राणायाम का अभ्यास न करें।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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