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यूपी ने मिटाया ‘बीमारू राज्य’ का दाग, तस्वीर के साथ तकदीर भी बदली

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी ने दुनिया को दिखाया विकास का नया मॉडल, कानून-व्यवस्था से बदला माहौल, माफिया और दंगों पर सख्ती ने लौटाया भरोसा, निवेश के लिए आकर्षण बना प्रदेश, डिफेंस कॉर

Updated: गुरुवार, 22 जनवरी 2026 (07:55 IST)
Chief Minister Yogi Adityanath: हर वर्ष 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल प्रदेश के गठन की स्मृति मात्र नहीं है, वरन यह आत्ममंथन का भी अवसर है कि उत्तर प्रदेश आज कहां खड़ा है और किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। एक समय था जब उत्तर प्रदेश को देश के बीमारू राज्यों की श्रेणी में रखा जाता था। बदहाल कानून-व्यवस्था, कमजोर बुनियादी ढांचा, पलायन करती आबादी और निवेशकों की उदासीनता इस पहचान का सबसे बड़ा कारण थी।
 
वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश की तस्वीर और तकदीर, दोनों में उल्लेखनीय ठोस बदलाव परिलक्षित होने लगे। जब योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता संभाली तब उन्हें मात्र 12.88 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था वाला प्रदेश मिला था, जिसे उनकी सरकार ने अपने पौने नौ वर्षों के कार्यकाल में लगभग 31 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचा दिया है। अब उन्होंने 2029-30 तक उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है।   
 

कानून-व्यवस्था से शुरुआत बदले विश्वास की बुनियाद

सत्ता में आने के बाद योगी सरकार ने सबसे पहले अपना खास ध्यान कानून-व्यवस्था पर केंद्रित किया। संगठित अपराध, माफिया राज और दंगों की राजनीति ने उत्तर प्रदेश की छवि को लंबे समय तक हानि पहुंचाने का काम किया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट संदेश दिया कि अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी, पुलिस सुधार अभियानों, संगठित अपराधियों पर कार्रवाई और माफिया की संपत्तियों की जब्ती ने अपराधियों का मनोबल तोड़ने के साथ-साथ आम नागरिकों और निवेशकों में सुरक्षा का भरोसा भी लौटाया।
 
योगी सरकार में बड़े दंगों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया और आपराधिक घटनाओं में लगातार गिरावट दर्ज की गई। यह बदलाव सामाजिक वातावरण में भी दिखाई देने लगा है। जहां लोग देर रात तक काम और यात्रा करने में पहले से अधिक सुरक्षित महसूस करने लगे हैं, महिलाओं के लिए तो उत्तर प्रदेश अब पूर्ण सुरक्षित हो गया है।
 

बुनियादी ढांचे में निवेश से विकास को मिली गति

दरअसल, कभी उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य का तमगा मिलने के पीछे कमजोर बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) भी एक बड़ा कारण था। सड़कों की खस्ता हालत, अधूरी परियोजनाएं और कनेक्टिविटी की कमी ने औद्योगिक विकास की राह में रोड़ा अटकने का काम किया था। योगी सरकार ने इस मोर्चे पर आक्रामक रणनीति अपनाई, एक्सप्रेस-वे का जाल बिछाने का जो काम शुरू किया गया, उसने प्रदेश का नक्शा ही बदल दिया। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाओं ने न केवल आवागमन को सुगम बनाया, वरन औद्योगिक क्लस्टरों के विकास का मार्ग भी प्रशस्त किया। हवाई अड्डों के विस्तार और नए एयरपोर्ट की योजनाओं ने प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने का काम किया है।

निवेश और औद्योगीकरण से नई पहचान की ओर उत्तर प्रदेश

कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार का सीधा असर निवेश पर पड़ा। योगी सरकार द्वारा आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित किया। रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, डेटा सेंटर, फार्मा और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश प्रस्ताव आए। डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना ने प्रदेश को सामरिक और औद्योगिक दोनों दृष्टि से नई पहचान दी। लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा और अलीगढ़ जैसे शहर रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में उभरने लगे हैं, इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़े और तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिल रहा है। 
 

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विशेष ध्यान

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है, पुरानी बीमारू छवि का एक कारण ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाली भी थी। योगी सरकार ने कृषि को लाभकारी बनाने के लिए सिंचाई परियोजनाओं, फसल बीमा योजनाओं और गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर विशेष ध्यान दिया। गन्ना भुगतान में तेजी और किसानों को समय पर पैसा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ा, इसके साथ ही डेयरी, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने से कृषि आधारित रोजगार के नए अवसर पैदा हुए।
 

सामाजिक योजनाएं और शासन की नई शैली से आया बदलाव

योगी सरकार के नेतृत्व में केंद्र और प्रदेश की कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने पर जोर दिया गया। आवास योजना, उज्ज्वला योजना, शौचालय निर्माण और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचा। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा और लाभार्थियों को सीधे सहायता मिलने लगी। शासन की यह पारदर्शी शैली उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक संस्कृति में अभूतपूर्व बदलाव का वाहक बनी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
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