sawan somwar

कुछ पता तो चले

Written By WD
Updated: सोमवार, 9 मार्च 2009 (17:24 IST)
- क़ैफ़ी आज़मी

Aziz AnsariWD
खारो-ख़ स1 तो उठें, रास्ता तो चले
मैं अगर थक गया, क़ा‍फ़िला तो चले

चाँद-सूरज बुजुर्गों के नक़्शे-क़द म2
ख़ैर बुझने दो इनको, हवा तो चले

हाकिमे-शहर, ये भी कोई शहर है
मस्जिदें बंद हैं, मयकद ा3 तो चले

इसको मज़हब कहो या सियास त4 तो चले
खुदकुशी का हुनर तुम सिखा तो चले

इतनी लाशें मैं कैसे उठा पाऊँगा
आज ईंटों की हुरम त5 बचा तो चले

बेलचे लाओ, खोलो ज़मीं की तहें
मैं कहाँ दफ़्न हूँ, कुछ पता तो चले।

1. झाड़ झंखाड़, 2.पद चिह्न 3. मदिरालय 4. राजनीति 5. मर्यादा

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