न किसी की आँख का नूर हूँ, न किसी के दिल का क़रार हूँजो किसी के काम न आ सके मैं वो एक मुश्त-ए-ग़ुबार हूँ मेरा रंग-रूप बिगड़ गया, मेरा यार मुझसे बिछड़ गयाजो चमन खिज़ाँ से उजड़ गया, मैं उसी की फ़स्ल-ए-बहार हूँ Aziz AnsariWD न तो मैं किसी...