उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव प्रचार में हावी रहे ये 10 चर्चित मुद्दे

Author विकास सिंह| Last Updated: शनिवार, 5 मार्च 2022 (18:03 IST)
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देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश विधानसभा में करीब दो महीने (54 दिन) चला आज समाप्त हो गया। सबसे बड़े राज्य को फतह करने के लिए सियासी दलों और उनके नेताओं ने चुनावी रैलियों, रोड शो और डोर-टू-डोर चुनाव प्रचार कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी। के चुनाव प्रचार में आखिरी वह कौन से चर्चित मुद्दे रहे जिसके सहारे सियासी दलों ने अपनी चुनावी नैय्या को पार लगाने की कोशिश की है। इस सप्ताह चर्चित मुद्दा
में उत्तर प्रदेश में चर्चित रहे मुद्दों की पूरी पड़ताल।

1-पाकिस्तान से लेकर जिन्ना तक की गूंज-देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में जिन्ना, पाकिस्तान और तालिबान जैसे शब्द चुनावी मंचों पर नेताओं के भाषण और बयानों में खूब सुनाई दिए। देश के सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले राज्य में जिन्ना सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए जिन्ना और पाकिस्तान से लेकर तालिबान तक का मुद्दा गूंजा। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के अपने बयान में पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का जिक्र करने पर भाजपा ने मुद्दे को हवा दे दिया और भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि
"जो जिन्ना से करे प्यार, वो पाकिस्तान से कैसे करे इनकार"।

2-जिन्ना से गन्ना पर आई लड़ाई-सात चरणों में हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में चुनाव प्रचार की शुरूआत पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हुई जहां पर पहले दो चरण में मतदान हुआ। किसान आंदोलन के प्रभाव के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटलैंड कहे जाने वाले इस इलाके में चुनाव प्रचार में किसान आंदोलन का खासा असर देखने को मिला और गन्ना किसानों का बकाया का मुद्दा चुनाव में खूब गूंजा। इसके साथ प्रदेश के तराई जिलों लखीमपुर बहराइच और गोंडा तक गन्ना किसानों की समस्याओं का मुद्दा खूब गूंजा।


3-चुनावी रण में हिजाब से लेकर लाल टोपी की गूंज-उत्तरप्रदेश विधानसभा के दौरान कर्नाटक से उठा हिजाब का मुद्दा उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में भी खूब गूंजा। सत्तारूढ़ पार्टी की ओर से खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दूसरे चरण के मतदान से पहले हिजाब के मुद्दे को धार देते हुए कहा कि ’गजवा-ए-हिन्द’ का सपना देखने वाले ‘तालिबानी सोच’ के ‘मजहबी उन्मादी’ यह बात गांठ बांध लें वो रहें या न रहें। भारत शरीयत के हिसाब से नहीं, संविधान के हिसाब से ही चलेगा’। वहीं मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पूरे चुनाव प्रचार के दौरान इस चर्चित मुद्दे पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।


इसके साथ चुनाव में लाल टोपी भी खूब सुर्खियों छाई रही। गोरखपुर में चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाल टोपी की तुलना रेड सिग्नल बताने से यह मुद्दा खूब गूंजा।

4-गर्मी से लेकर चर्बी की चुनावी गूंज- उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में इस बार जमीनी मुद्दे की जगह गर्मी और चर्बी जैसे बयान भी खूब चर्चा में रहे। इसे चुनाव में नेताओं के पास मुद्दे की कमी कहा जाएगा या चुनाव में ध्रुवीकरण की कोशिश कि नेता चुनाव के दौरान भड़काऊ बयान देते नजर आए। उत्तर प्रदेश का 2022 का चुनाव राजनीति की गिरती हुई भाषा को लेकर भी याद रखा जाएगा।


पश्चिमी उत्तर प्रदेश की वोटिंग से पहले हापुड़ में अपनी चुनावी सभा में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कैराना और मुजफ्फरनगर में अभी जो गर्मी दिख रही है वह 10 मार्च के बाद समाप्त हो जाएगी। मई-जून की गर्मी में शिमला जैसा ठंडा माहौल बना दिया जाएगा। वहीं योगी ने कैराना के मुद्दे को धार देते हुए योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि कैराना में तंमचावादी पार्टी का प्रत्याशी धमकी दे रहा है, यानि गर्मी शांत नहीं हुई है। 10 मार्च के बाद गर्मी शांत हो जाएगी। योगी के इस बयान पर राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी ने पलटवार करते हुए अपनी चुनावी सभा में कहा ईवीएम का बटन ऐसा दबाओ की भाजपा नेताओं की चर्बी उतर जाए।

5-छुट्टा जानवर भी चुनावी मुद्दा- उत्तर प्रदेश चुनाव प्रचार में इस बार छुट्टा जानवर एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन गया। चुनाव जैसे-जैसे आगे बढ़ता गया छुट्टा जानवर का मुद्दा गर्माता गया। अवारा पशुओं का मुद्दा चुनाव में कितना हावी रहा इसको इस बात से समझा जा सकता है कि कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने चुनावी भाषण में इस मुद्दे का जिक्र करते हुए लोगों को भरोसा दिलाना पड़ा कि 10 मार्च के बाद इसको लेकर नई व्यवस्था बनाई जाएगी।

6-महंगाई और बेरोजगारी का मुद्दा-उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रचार के शोर में भले ही महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे की गूंज चुनावी मंचों पर बहुत अधिक नहीं सुनाई दी है लेकिन महंगाई और बेरोजगारी वह दो मुख्य मुद्दे ऐसे है जो उत्तर प्रदेश चुनाव में गेमचेंजर साबित हो सकते है। राजनीति विश्लेषक कहते हैं कि मंहगाई और बेरोजगारी के मुद्दा महिलाओं और युवाओं को सीधे प्रभावित किया और चुनाव परिणाम पर इसका असर भी देखा जा सकता है।

7-पुरानी पेंशन की बहाली बना चुनावी मुद्दा-उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार जैसे-जैसे आगे बढ़ता गया चुनावी मुद्दे भी बढ़ते गए। चुनाव के बीच में राजस्थान में कांग्रेस सरकार की ओर से राज्य कर्मचारियों की पेंशन बहाली के निर्णय के बाद पेंशन का मुद्दा उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के बीच मुख्य मुद्दा बन गया। समाजवादी की ओर से सरकार आने पर पुरानी पेंशन बहाली का फैसला करने का वादा करने का खासा चुनावी असर देखा गया।

8-सुशासन बना कुशासन का मुद्दा-उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में सुशासन बनाम कुशासन का मुद्दा भी खूब छाया रहा। सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के हर नेता अपनी चुनावी रैलियों में दावा करता नजर आया कि बीते पांच साल में भाजपा सरकार ने राज्य सुशासन की स्थापना कर विकास की नई इबारत लिख दी है वहीं समाजवादी पार्टी सरकार के समय प्रदेश में कुशासन का राज था। कानून व्यवस्था से लेकर दंगा तक का मुद्दा चुनाव में खूब गूंजा।

9-अयोध्या,काशी और मथुरा की गूंज- प्रदेश में करीब दो महीने चले चुनाव प्रचार में अयोध्या से लेकर काशी और मथुरा तक के मुद्दे चुनावी फिंजा में खूब गूंजे। अयोध्या में भव्य राम मंदिर से लेकर काशी में भव्य विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण तक का मुद्दा खूब गूंजा। चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में काशी में पीएम मोदी का रोड शो और काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा अर्चना के सहारे भाजपा ने एक बड़ा मैसेज देने की कोशिश की।


10-जातिगत मुद्दों की गूंज-जातिगत राजनीति के लिए पहचाने जाने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में इस बार जाति के सहारे वोटरों को साधने के लिए सियासी दलों ने पूरी ताकत झोंकी। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने जातिगत वोटरों को साधते हुए एक ऐसा चक्रव्यूह रचा जिसको भेदना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।




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