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मायावती ने बजट को बताया निराशाजनक, कहा- मुट्ठीभर पूंजीपति तथा धन्ना सेठ ही खुश होंगे

Updated: शनिवार, 1 फ़रवरी 2020 (17:34 IST)
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने केंद्र सरकार द्वारा शनिवार को संसद में पेश बजट को 130 करोड़ जनता को मायूस करने वाला बताते हुए कहा कि मुट्ठीभर पूंजीपतियों तथा धन्ना सेठों को छोड़कर देश की गरीब, ईमानदार व मेहनतकश जनता की बढ़ती हुई समस्यों का समाधान इससे संभव नहीं है।
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मायावती ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि महंगाई, गरीबी व बेरोजगारी आदि देश की सबसे बड़ी समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि पेश बजट से मुट्ठीभर पूंजीपति तथा धन्ना सेठ खुश हो सकते हैं। देश की गरीब, ईमानदार व मेहनतकश जनता की दिन-प्रतिदिन की लगातार बढ़ती हुई समस्या का समाधान इसमें संभव नहीं है।
 
उन्होंने कहा कि देश की परेशान 130 करोड़ जनता खाने के लिए रोटी-दाल मांग रही है। सरकार उसकी भी सही से व्यवस्था नहीं कर पा रही है। लोगों के पास न तो काम है और न ही किसान व मजदूर जैसे मेहनतकश लोगों को उनकी मेहनत का सही मेहनताना ही मिल पा रहा है।
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लोगों के हाथों में अपनी दैनिक की जरूरतें पूरी करने के लिए न तो उनके हाथ में पैसा है और न ही बाजार में मांग जिससे देश की पूरी अर्थव्यव्स्था ही चरमरा गई है। इसका सही समाधान इस बजट में ढूंढ पाना बहुत मुश्किल है।
 
मायावती ने कहा कि इस बजट में अधिकतम रोजगार सृजन का अभाव है। यह शनिवार को देश की पहली आवश्यकता है। यह बजट इस जनचिंता से मुक्त लगता है। कुल मिलाकर इस बजट में देश की 130 करोड़ जनता के लिए रोजगार के माध्यम से आटे-दाल की उचित चिंता नहीं की गई है।
 
उन्होंने कहा कि बजट जन को खोखला व जनचिंतामुक्त बनाता है और यह अतिचिंता की बात है। इससे आने वाले समय में जनसमस्याएं कम होने के बजाए और ज्यादा बढ़ेंगी तथा देश का माहौल और अधिक खराब होने की आशंका है। इनकम टैक्स में थोड़ी राहत दी गई है लेकिन जटिल शर्तों के साथ। यह छूट सरल व बिना शर्त होती तो बेहतर होता।
 
मायावती ने कहा कि बैंकों में केवल 5 लाख तक का जमा पूरी तरह सुरक्षित होने का आश्वासन संसद में दिया गया है। बैंकों में जनता की बाकी जमा पूंजी असुरक्षित क्यों? इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों में निजीकरण का हस्तक्षेप जनता के दु:ख-दर्द को दूर करेगा, यह संभव नहीं लगता है। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी संपत्तियों के बेचते रहने से देश व जनता का भला कैसे हो सकता है, यह सोचने की बात है।

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