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सिर्फ 300 भारतीय परिवारों के पास है देश की जीडीपी के 40 प्रतिशत से भी ज्यादा संपत्ति, जानिए अंबानी-अडानी की हिस्सेदारी

Written By Feature Desk
Updated: शनिवार, 16 अगस्त 2025 (15:56 IST)
hurun india rich list 2025: भारत, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, एक अनोखी आर्थिक विरोधाभास का सामना कर रहा है। एक तरफ, यह विकास और प्रगति की नई उंचाइयों को छू रहा है, वहीं दूसरी तरफ, देश की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा परिवारों के हाथों में केंद्रित हो रहा है। हाल ही में जारी हुई हुरुन इंडिया और बार्कलेज प्राइवेट की रिपोर्ट "मोस्ट वैल्यूएबल फैमिली बिजनेसेज लिस्ट" ने इस वास्तविकता को एक बार फिर से सामने ला दिया है।

300 परिवारों की कहानी, हर दिन कमाए 7,100 करोड़ रुपये:
इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सिर्फ 300 सबसे अमीर परिवारों के पास 140 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा की संपत्ति है। यह राशि भारत की कुल जीडीपी के 40% से भी अधिक है। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, क्योंकि यह दर्शाता है कि देश की आधी संपत्ति कुछ सौ परिवारों के पास सिमट गई है, जबकि करोड़ों लोग अभी भी अपनी रोज़ी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन परिवारों ने पिछले एक साल में हर दिन 7,100 करोड़ रुपये से अधिक कमाए हैं। यह रफ्तार अभूतपूर्व है और तेजी से बढ़ती आर्थिक असमानता की ओर इशारा करती है।

अंबानी बनाम अडानी:
जब भारत के सबसे धनी परिवारों की बात होती है, तो मुकेश अंबानी और गौतम अडानी का नाम सबसे पहले आता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुकेश अंबानी के परिवार की कुल संपत्ति 28 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है, जो उन्हें इस सूची में सबसे ऊपर रखती है। वहीं, अडानी परिवार की कुल संपत्ति 14 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। इन दोनों दिग्गजों की संपत्ति में लगभग दोगुने का अंतर है। अंबानी परिवार की संपत्ति अकेले भारत की जीडीपी का 12% है, जो उनके आर्थिक दबदबे को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

रिपोर्ट में एक और दिलचस्प तथ्य सामने आया है: एक साल में 1 अरब डॉलर (लगभग 8,700 करोड़ रुपये) से ज्यादा की संपत्ति वाले परिवारों की संख्या में चार गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जो 37 से बढ़कर 161 हो गई है। यह आंकड़ा सिर्फ धन के केंद्रीकरण को ही नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में हो रही तीव्र गति से वृद्धि को भी दर्शाता है।

यह रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करती है। यह सफलता की कहानियों को उजागर करती है, लेकिन साथ ही समाज में बढ़ती खाई पर भी सवाल उठाती है। यह चुनौती सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर समाज के हर वर्ग पर पड़ता है। इन चुनिंदा परिवारों का उदय भारत की आर्थिक शक्ति का प्रतीक है, लेकिन इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है कि विकास का लाभ सभी तक पहुंचे और यह एक समावेशी विकास हो।

 

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