अटलांटा ओलंपिक 1996: पेस ने खत्म किया 16 सालों का सूखा, लॉन टेनिस में जीता कांस्य पदक

Last Updated: शुक्रवार, 16 जुलाई 2021 (15:10 IST)

वर्ष 1980 के मास्को ओलिम्पिक में हॉकी का स्वर्ण जीतने के बाद भारत अगले तीन ओलिम्पिक 1984 लॉस एंजेलिस, 1988 सोल और 1992 बार्सीलोना में खाली हाथ रहा था। अटलांटा में खेले गए ओलंपिक से भी किसी को खास उम्मीद नहीं थी लेकिन आखिरकार 16 साल लंबा पदक का सूखा इस ओलंपिक में खत्म हुआ।

उभरते हुए भारतीय खिलाड़ी ने 3 अगस्त 1996 को कांस्य पदक के मैच में ब्राजील के फरलैडो मैनिगनी को 3-6, 6-2,6-4 से हराकर भारतीय खेल प्रेमियों के चहरों पर मुस्कान ला दी। एकल प्रतियोगिता में अमेरिका के मशहूर लॉन टेनिस खिलाड़ी आंद्रे आगासी ने गोल्ड और इस्पेन के सरगी बूरुगुएरा ने सिल्वर मेडल जीता।

न केवल 3 बार से निराश लौट रहे भारत को ने पदक दिलवाया बल्कि ऐसा 44 साल बाद हुआ जब किसी एकल प्रतियोगिता में किसी भारतीय खिलाड़ी ने पदक जीता हो। इससे पहले के डी जाधव ने 1952 में कुश्ती में कांस्य पदक जीता था।

अटलांटा ओलंपिक में 13 खेलों में हिस्सा लेने के लिए भारत ने 49 खिलाड़ियों का दल भेजा था जिसमें से 40 पुरुष थे और सिर्फ 9 महिला खिलाड़ियों ने ही भाग लिया था।

हालांकि बाकी खेलों में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा-

हॉकी- लॉन टेनिस में इस सफलता के बाद हॉकी टीम का ही प्रदर्शन औसत से बेहतर रहा लेकिन टीम लगातार चौथी बार कोई भी पदक जीतने में नाकाम रही।

भारतीय ध्वजवाहक और कप्तान प्रगट सिंह की कप्तानी में खेल रही टीम पहले ही मैच में अर्जेंटीना से हार गई। इसके बाद टीम ने अमेरिका और स्पेन को मात दी लेकिन जर्मनी और पाकिस्तान को सिर्फ बराबरी पर रोक पायी।
अगले दौर के पहले मैच में दक्षिण कोरिया से भारतीय हॉकी टीम 3-3 की बराबरी पर रही। लेकिन ग्रेट ब्रिटेन से 3-4 की हार ने भारतीय हॉकी टीम को टूर्नामेंट में आठवां स्थान दिया।

एथलेटिक्स- कुल 6 भारतीय एथलीट अटलांटा ओलंपिक में हिस्सा लेने गए थे जिसमें से 4 महिला और 2 पुरुष खिलाड़ी थे लेकिन इन सभी ने निराश किया। महिला रिले रेस हो या पुरुश 1500 मीटर रेस, ट्रैंक इवेंट में भारतीय खिलाड़ी पहली हीट के बाद आगे नहीं बढ़ सके। फील्ड इवेंट में सिर्फ एक भारतीय खिलाड़ी शक्ति सिंह ने डिस्कस थ्रो में हिस्सा लिया और वह भी फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहे।

तीरंदाजी
तीरंदाजी में 3 पुरुषों ने एकल और टीम इवेंट में हिस्सा लिया और आगे बढ़ने का जज्बा तो दिखाया लेकिन मेडल आर्चरी टीम से दूर ही रहा। एकल प्रतियोगिता में सिर्फ एक तीरंदाज ही राउंड ऑफ 32 तक पहुंचा बाकि दोनों तीरंदाज राउंड ऑफ 64 के बाद बाहर हो गए। वहीं टीम इवेंट में पहली सीड में ही भारतीय टीम हार गई और राउंड ऑफ 64
में भी नहीं पहुंच सकी। (वेबदुनिया डेस्क)



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