सिर चढ़कर बोल रहा है यूरो का जादू

जर्मनी विरुद्ध क्रोएशिया का रोमांचक मैच

रवींद्र व्यास|
वह जादू ही क्या जो सिर चढ़कर न बोले। फुटबॉल ऐसा ही जादू है और यूरो-2008 में इसे सिर पर चढ़कर बोलता हुआ देखा जा सकता है। यह जीवन-मरण का घातक-रोमांचक खेल है। हार-जीत में दीवाने मरने-मारने पर उतारू हो जाते हैं। हम जानते हैं खेलों ने हिंसक और गुस्सैल राष्ट्रवाद को जन्म दिया है लेकिन जब खेल होता है तो सिर्फ उसका रोमांच होता है। जीतने का जज्बा, जोश और जुनून होता है।

जाहिर है यूरो कप में यूरोपीय दमखम का ही जलवा है, बावजूद पल-पल बदलते खेल के रूख के मद्देनजर अलग-अलग टीमें अलग-अलग रणनीति अख्तियार कर एक-दूसरे से भिन्न शैली में खेलती हुई भिड़ रही हैं। यह ऐसा कुरुक्षेत्र है जहाँ पहले से बनी कोई भी रणनीति कारगर होती नहीं दिखती।

क्वार्टर फाइनल्स की स्थिति अभी साफ नहीं हुई है लेकिन जर्मनी, इटली और फ्रांस जैसी विश्व विजेता टीमों की हालत पतली है और उन्हें एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। जिन फुटबॉलप्रेमियों ने गुरुवार की रात क्रोएशिया और जर्मनी के बीच रोमांचक फुटबॉल देखा वे इस बात की ताईद करेंगे कि 4-4-2 के जिताऊ गठजोड़ से खेलने वाली जर्मनी की चमक इतनी फीकी थी कि लग ही नहीं रहा था, वह विजेता की सबसे तगड़ी दावेदार टीम है।
मध्यान्तर के बाद तो जर्मनी की हताशा और निराशा इतनी सतह पर दिखाई दे रही थी कि अंतिम पलों में उसके खिलाड़ी श्वेनस्टेगर को रेड कार्ड दिखाकर रैफरी ने बाहर निकाल दिया। क्रोएशिया ने जो खेल खेला उसमें लय और गति, तेजी और नियंत्रण का जोरदार संतुलन था। शुरुआती कुछ मिनटों का खेल छोड़ दें तो वे पूरे समय जर्मनी पर हावी रहे और अधिकांश समय गेंद उनके कब्जे में रही और खेल पर उनका पूरा नियंत्रण।
यूरोपीय टीमें लंबे-लंबे पासों के लिए जानी जाती हैं लेकिन क्रोएशिया ने छोटे पास (टच पासेस) का बेहतरीन मुजाहिरा किया। सिमिक, सरना, क्रेजकार प्रांजिक और ओलिक ने मिलकर जो मूव बनाए वे दर्शनीय थे। अपने पासेस के साथ ही गति लाकर इन्होंने पहले जर्मन खेमे को तितर-बितर किया, रक्षापंक्ति में सेंध लगाने के लिए गैप बनाई और तुरंत चाल तेज कर गेंद जाली में उलझाई। यह पहला गोल उनके ठंडे दिमाग का खतरनाक मूव था जिसे सरना ने गोल में बदल दिया।
जाहिर है यह क्रोएशिया की एक उम्दा तकनीक ही नहीं थी बल्कि सूझबूझ और व्यक्तिगत प्रवीणता भी थी और सही समय पर पास देने की टीम भावना भी, जबकि मार्सेल जॉनसेन, क्लिमेंट फ्रिट्ज, लुकास पोदोल्स्की, मिरास्लोव क्लोस और मारियो गोमेज जैसे स्टार्स से सजी टीम में न तेजी थी न नियंत्रण।

मध्यान्तर के बाद लगा कि वे अपनी हार मान चुके हैं जबकि क्रोएशिया ने दमखम वाला लेकिन कलात्मक, तेज लेकिन लयात्मक और तेज लेकिन लचीला खेल दिखाकर 90 मिनिट से ज्यादा समय तक दर्शकों को रोमांचित किए रखा लेकिन रोमांच का चरम तो धीरे-धीरे ही आएगा। रात को जागिये, यूरो कप देखिए, यह आपको आईपीएल से ज्यादा रोमांचित कर देगा।


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