कप्तानी और आखिरी सलाम एक ही दिन

PTI
भारत ने जब ऑस्ट्रेलिया को नागपुर में 172 रन से हराकर श्रृंखला जीती तो कप्तानी महेंद्रसिंह धोनी नहीं बल्कि गांगुली ही कर रहे थे। धोनी ने गांगुली के प्रति पूरा सम्मान दिखाते हुए अंतिम क्षणों में उनसे कमान संभालने का आग्रह किया और भारत के सबसे सफल कप्तान ने इसे सहर्ष स्वीकार कर दिया।

इस तरह से 10 नवंबर को शुरू हुए भारतीय कप्तानी के स्वर्णिम दौर का अंत भी दस नवंबर को ही हुआ। भारत में कप्तानी लेकर 1932 से ही उठापटक चलती रही, जब देश ने पहली बार टेस्ट क्रिकेट में हिस्सा लिया था, लेकिन कुछ ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने इस पद को अच्छी तरह से सुशोभित किया और लंबे समय तक इस पर बने रहे। इन खिलाड़ियों की सूची में गांगुली शीर्ष नंबर पर काबिज हैं।

गांगुली ने भारत की तरफ से सर्वाधिक 49 मैच में कप्तानी की, जिसमें से 21 में उन्होंने टीम को जीत दिलाई, जो भारतीय रिकॉर्ड है।

गांगुली ने ऐसे समय में टीम की कमान संभाली थी जब भारत मैच फिक्सिंग के संकट से जूझ रहा था और उस समय के सबसे सफल कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन इसके जाल में फँसे हुए थे। सचिन तेंडुलकर जैसे महान बल्लेबाज ने भी जब कप्तानी छोड़ दी, तब गांगुली को यह जिम्मा संभाला गया।

भारत ने गांगुली की अगुवाई में पहली बार बांग्लादेश का दौरा किया और वह दस नवंबर 2000 का दिन था, जब बाएँ हाथ का यह बल्लेबाज पहली बार टेस्ट क्रिकेट में कप्तान के तौर पर मैदान पर उतरा था। भारत ने यह मैच नौ विकेट से जीता था और यह भी संयोग है कि तब गांगुली ने 84 रन की पारी खेली थी, जबकि अपनी अंतिम पारी में भी उन्होंने 85 रन बनाए थे।

भारत ने गांगुली की कप्तानी में ही विदेशों में जीत दर्ज करना शुरू किया था। उनकी कप्तानी में भारत ने जो 21 मैच जीते थे उसमें से 11 मैच विदेश और दस मैच भारतीय सरजमीं पर जीते गए।

यदि दस तारीख की बात की जाए तो यह भी संयोग है कि गांगुली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना जो पहला टेस्ट मैच खेला था वह 10 तारीख (10 अक्टूबर 1996) को शुरू हुआ था। दिल्ली में खेला गया यह मैच भारत ने सात विकेट से जीता था। वह मैच भी 10 तारीख (10 दिसंबर 2005 बनाम श्रीलंका) को ही दिल्ली में शुरू हुआ था जिसके बाद गांगुली को टीम को बाहर कर दिया था।

भाषा|
नई दिल्ली। वह 10 नवंबर 2000 का दिन जब गांगुली पहली बार भारतीय टीम के कप्तान के तौर पर टॉस के लिए मैदान में उतरे थे और इसके ठीक 8 साल बाद आज 10 नवंबर 2008 को 'दादा' ने अपने सबसे प्रिय खेल को अलविदा कहा।
यही नहीं, गांगुली ने 2002 में एंटीगा में वेस्टइंडीज के खिलाफ जब सभी 11 खिलाड़ियों से गेंदबाजी करवाई थी, तब भी मैच 10 तारीख ( 10 दिसंबर) को शुरू हुआ था। भाषा



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