खग्रास सूर्य ग्रहण आज रात: कितने बजे लगेगा ग्रहण? जानें क्या करें और किन कामों से बचें
आज रात खग्रास सूर्य ग्रहण का दुर्लभ नज़ारा: जानें समय, प्रभाव और जरूरी नियम
Total Solar Eclipse 2026: आकाश में घटने वाली खगोलीय घटनाओं में सूर्य ग्रहण हमेशा से ही कौतूहल और धार्मिक जिज्ञासा का केंद्र रहा है। इस बार सावन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर एक बेहद दुर्लभ खग्रास (पूर्ण) सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र के अंतर्गत घटित होगी।
Total Solar Eclipse 2026: ग्रहण का समय और दुर्लभ स्थिति
भारतीय समयानुसार, इस पूर्ण सूर्य ग्रहण की शुरुआत 12 अगस्त 2026 की रात 9 बजकर 04 मिनट से होगी, जो अगले दिन यानी 13 अगस्त 2026 की तड़के सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा।
Total Solar Eclipse 2026: क्या होता है खग्रास (पूर्ण) सूर्य ग्रहण?
जब चंद्रमा घूमते हुए सूर्य और पृथ्वी के बीच इस प्रकार आ जाता है कि वह सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह से ढंक लेता है, तो उसे खग्रास या पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं। इस दौरान कुछ पलों के लिए दिन में ही रात जैसा घना अंधेरा छा जाता है, जो देखने में अत्यंत अद्भुत और दुर्लभ होता है।
Total Solar Eclipse 2026: दुनिया में कहां-कहां दिखेगा यह नज़ारा?
वर्ष 2026 का यह अंतिम सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप के अधिकांश देशों, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, कनाडा, उत्तर-पूर्वी रूस, उत्तर-पश्चिम अफ्रीका, उत्तरी स्पेन, अटलांटिक महासागर और पुर्तगाल के क्षेत्रों में दिखाई देगा।
Total Solar Eclipse 2026: सूतक काल और भारत में इसका प्रभाव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले 'सूतक काल' लग जाता है, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है।
Total Solar Eclipse 2026: विशेष बात: चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार रात में लग रहा है और भारत में दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। देश के सभी मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और सामान्य पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी बाधा के जारी रहेंगे।
Total Solar Eclipse 2026: ग्रहण काल में क्या करें? (शुभ कार्य)
यद्यपि भारत में यह अदृश्य है, फिर भी आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ग्रहण काल के दौरान ध्यान और ईश्वर की साधना करना अत्यंत फलदायी माना गया है:
मंत्र जाप और साधना: ग्रहण अवधि में गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। सूर्य देव का यह विशेष मंत्र जपना बेहद शुभ होता है— "ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि। तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्॥"
धार्मिक ग्रंथों का पाठ: इस दौरान मौन रहकर ध्यान लगाएं या भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम और रामचरितमानस जैसे पवित्र ग्रंथों का पाठ करें।
शुद्धि और स्नान: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें, पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें, पूजा स्थल की सफाई करके दीपक जलाएं और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
दान-पुण्य: ग्रहण के बाद अपनी श्रद्धा अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल या धन का दान करें। गाय, पक्षियों और मूक पशु-पक्षियों को भोजन कराना विशेष पुण्य दायक माना जाता है।

