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पूर्ण खग्रास सूर्य ग्रहण क्यों नहीं दिखाई देगा भारत में, जानिए

शनिवार, 4 दिसंबर 2021 (11:53 IST)
सूर्य ग्रहण कई प्रकार होते हैं जैसे खग्रास या पूर्ण, खंडग्रास, मान्द्य, कंकणाकृति, वलयाकार आदि। जब पृथ्वी पर चंद्रमा की छाया पड़ती है तब सूर्य ग्रहण होता है और जब पृथ्वी सूर्य तथा चंद्रमा के बीच आती है, तब चंद्र ग्रहण होता है। अओ जानते हैं किस कौन कौनसे सूर्य ग्रहण होते हैं।
 
 
क्यों नहीं दिखाई देगा भारत में पूर्ण सूर्य ग्रहण : यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा क्योंकि भारत दक्षिणी गोलार्ध में नहीं है। चंद्रमा धरती के एक ही हिस्से पर दिखाई देता है जहां चंद्रमा उदय होगा वहीं ग्रहण होगा। चंद्रमा दिन और रात दोनों ही समय निकलता है। धरती के जिस हिस्से पर दिन में चंद्रमा निकलता है वहीं पर सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। यह ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका और अटलांटिक के दक्षिणी भाग के लोगों को दिखाई देगा।
 
1. क्या होता है सूर्य ग्रहण ( What is solar eclipse ) : सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य आंशिक अथवा पूर्ण रूप से चंद्रमा द्वारा आवृत्त हो जाए। वैज्ञानिकों के अनुसार धरती सूरज की परिक्रमा करती है और चंद्रमा धरती की परिक्रमा करता है। जब सूर्य और धरती के बीच चंद्रमा आ जाता है तो वह सूर्य की रोशनी को कुछ समय के लिए ढंक लेता है। इस घटना को ही सूर्य ग्रहण कहते हैं।
 
2. पूर्ण सूर्य ग्रहण ( Purna khagras surya grahan ) : चंद्रमा जब सूर्य को पूर्ण रूप से ढंग लेता है तो ऐसे में चमकते सूरज की जगह एक काली तश्तरी-सी दिखाई है। इसमें सबसे खूबसूरत दिखती है 'डायमंड रिंग।' चंद्र के सूर्य को को पूरी तरह से ढंकने से जरा पहले और चांद के पीछे से निकलने के फौरन बाद काली तश्तरी के पीछे जरा-सा चमकता सूरज हीरे की अंगूठी जैसा दिखाई देता है। संपूर्ण हिस्से को ढंकने की स्थिति खग्रास ग्रहण कहलाती है। 
3. आंशिक सूर्य ग्रहण ( Partial solar eclipse full eclipse ) : आंशिक ग्रहण तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा एक सीधी लाइन में नहीं होते और चंद्रमा सूर्य के एक हिस्से को ही ढंक पाता है। यह स्थिति खण्ड-ग्रहण कहलाती है खंडग्रास का अर्थ अर्थात वह अवस्था जब ग्रहण सूर्य या चंद्रमा के कुछ अंश पर ही लगता है। अर्थात चंद्रमा सूर्य के सिर्फ कुछ हिस्से को ही ढंकता है।
 
4. वलयाकार सूर्य ग्रहण ( Annular solar eclips ) : सूर्य ग्रहण में जब चंद्रमा पृथ्वी से बहुत दूर होता है और इस दौरान पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है। ऐसे में सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता दिखाई देता है। कंगन आकार में बने सूर्य ग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं।

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