sundarkand
✕

भगवान श्रीकृष्‍ण को ऋषिकेश क्यों कहा जाता है?

Updated: सोमवार, 4 जनवरी 2021 (17:38 IST)
भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु का पूर्णावतार कहा गया है। द्वापर युग में जन्मे वे विष्णु के दसावतारों के क्रम में आठवें अवतार और 24 अवतारों के क्रम में संभवत: वे 22वें अवतार थे। भगवान श्रीकृष्‍ण के सैंकड़ों नाम है उनमें से 108 नाम प्रमुख है। इन 108 नामों में ही एक नाम है ऋषिकेश। आओ जानते हैं इसक अर्थ और क्यों कहा जाता है उन्हें ऋषिकेश।
 
 
ऋषिकेश का शब्दिक अर्थ यदि हम निकाले तो होता है ऋषियों के केशया ऋषियों जैसे केश या बाल। परंतु इसका यह अर्थ नहीं होता है। प्रारंभ में भगवान विष्‍णु को हरिकेश या हृषिकेश कहा जाता था। संबभवत: यही बाद में ऋषिकेश हो गया।
 
 
हृषीकाणामीन्द्रियाणामीशः हृषिकेशः
अर्थात् वे (हृषीक=) इन्द्रियों के भी ईश्वर हैं इसीलिए हृषीक+ईश=हृषीकेश हैं। 
 
हृष्टा जगत् प्रीतकराः केशा रश्मयो ऽस्य हृषीकेशः।
गो का एक अर्थ इन्द्रियां भी होता है। जिसके पति या ईश्वर होने के कारण वे गोप हैं। उनके पूर्ण वश में इन्द्रियां हैं इसीलिए वे परमात्मा हैं। वे हर्षित होते हैं इसलिए भी हृषिकेश हैं। उनकी रश्मियों (सूर्य) से जगत् प्रीति करता है इसलिये भी वे हृषिकेश हैं।
 
गुडानिद्राआलस्यं इन्द्रियाणि वा तस्य ईशः अर्थात् जिसने निद्रा या आलस्य अथवा माया को जीत लिया वह गुडाकेश है। गीता में गुडाकेश अर्जुन को भी कहा गया है। वैसे यह नाम देवाधिदेव महादेव का भी है।
 
 
ऋषिकेश : भारत में उत्तराखंड में स्थित ऋषिकेश नामक एक पावन और पवित्र नगरी है जहां ध्यान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऋषिकेश को केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री का प्रवेशद्वार माना जाता है। यह स्थान शिव, राम, कृष्ण और ऋषि राभ्या की कथा से जुड़ा हुआ है। कहते हैं कि ऋषि राभ्या ने कठोर तपस्या किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ऋषिकेश के अवतार में प्रकट हुए थे। तब से इस स्थान को 'ऋषिकेश' नाम से जाना जाता है।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

शारदीय नवरात्रि 2026: महाअष्टमी और महानवमी की तिथि, पूजा मुहूर्त एवं व्रत पारण

16 shradh paksha 2026: श्राद्ध पक्ष में चतुर्थी के श्राद्ध का महत्व, जानिए कैसे और किसका करते हैं श्रद्ध

विजयादशमी 2026: कब है दशहरा, रावण दहन कब होगा?

16 shradh paksha 2026: श्राद्ध पक्ष में तृतीया के श्राद्ध का महत्व, जानिए कैसे और किसका करते हैं श्राद्ध

अक्टूबर 2026 के ग्रह गोचर और नक्षत्र परिवर्तन सहित जानिए प्रमुख व्रत एवं त्योहार

अगला लेख